Wednesday, March 23, 2016

आज की पत्रकारिता पर एस. पी. क्या सोचते?


           

मीडिया खबर के मंच पर इंडिया न्यूज के एडिटर इन चीफ दीपक चौरसिया जी आधुनिक टेलीविजन  पत्रकारिता के जनक स्वर्गीय एस. पी. सिंह की पुण्यतिथि के मौके पर मीडिया खबर के द्वारा आयोजित   '' परिचर्चा : राजनीतिक दलों की पत्रकारिता : वॅारुम, सोशल मीडिया और प्राइम टाइम की बहसें'' पर   9 मिनट 56 सेकंड में अपनी जबरदस्त असरदार बातें रखें आप अवश्य पढ़ें -


सबसे पहले हिन्दी पत्रकारिता के युग पुरुष एस. पी. सिंह जी के श्री चरणों में सादर नमन करता हूँ ।
मेरे ख्याल से हिन्दी पत्रकारिता की इतिहास अगर लिखी गई है, तो वो एस. पी. सिंह से शुरु और एस. पी. सिंह से खत्म होना चाहिए था चुकी उन्होंनेँ ने ही हिंदी पत्रकारिता को जन-जन तक पहुँचाई और उसकी नींव रखी है और ये बात मुझे कहने में कोई कुरेज नही हैं।
अपनी बात शुरु करु, मंच पर मेरे सभी सहयोगी बैठे है। मेरे तमाम सीनियरस बैठे है। जिन्होंने मुझे सिखाया है, आगे बढ़ाया है। उन सबका में अभिनंदन करता हूँ। 
बात शुरु करु उसके पहले एक बात कहना चाहता हूँ कि इंदौरी - इंदौरी की ज्यादा तारीफ कर देता है। निमिष भाई जो कुछ कहा उसमें आप 50 प्रतिशत काट लेना ।
आज की पत्रकारिता पर एस. पी. क्या सोचते?तो आज की जो मीडिया War Room: Facebook: Twitter और प्रिंट ापरेट की जो पत्रकारिता है मुझे नही लगता कि एस. पी. को बड़ी पसंद आती होगी।
कई तरह की शोज होती है, Prime Time की बहस होती है। अब सुनिए उस बहस की पीछे की हकीकत, में आपको बताता हूँ ।
Guest Coordinator 
कांग्रेस को Phone करता है उसका PR Public Relation सबसे पहले पूछता है विषय क्या है ? अच्छा Robert Vadra के खिलाफ कर रहे है, पूछना पड़ेगा । 3 घंटे बाद उसका फोन आता है। इस गेस्ट को पार्टी पर बोलने से मना किया है। अब बताइए बिना कांग्रेस के version से आप Robert Vadra पर क्या बहस करेंगे ।
कर लीजिए आप निष्पक्ष पत्रकारिता । दे दीजिए आप कांग्रेस का Version ।

आम आदमी पार्टी को अब फोन करते है। आम आदमी पार्टी पूछती है किस पर बहस करेंगे आप ? तो हम कहते है प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव ने आप पर जो आरोप लगाए है हम उस पर बहस करेंगे । अरविंद केजरीवाल की जो Sting Operation वाली जो सीडी आई है आपके आम आदमी पार्टी के नेता ने जो सीडी जारी की है उस पर बहस करेंगे । तो कहते है पार्टी ने इस पर बोलने से मना किया है।
बीजेपी से जब पूछते है कि सुषमा स्वराज जी जो है, मैं आपको एक छोटी उदाहरण दे रहा हूँ इसमें 19- 20 हो सकती है।
वसुनधरा राजे जी का बचाव कर रही है। अब पार्टी ने इस पर कोई लाइन तैयार नही किया है। वो कहेंगे कि पार्टी ने उस पर बोलने के लिए मना किया है।
ये तो कंट्रोलड है आज की तारीख में किसी नेता से आप Individual नेता से बात कर के आप अपने पैनल में नही बुला सकते। आज की तारीख में उनके मीडिया Coordinator Professional तरीके से बातें करते है। गिने-चुने 3-4 लोग है जिनको आप एक बजे / दो बजे अपने रिसर्च के टाइम में Request लिखाने के बाद वो अपने प्रवक्ताओं को पैनल पर Revert करेंगे और reverse करने के बाद वे आपको आधे घंटे- एक घंटे में जवाब देंगे की प्रवक्ता प्रतिनिधि जो है इस हिसाब से एक्स बंदे, वाई बंदे या जेड बंदे को आपके पास भेजा जाएगा और उसी हिसाब से आपके टाइमिंग का Selection होती है ।
मुझे नही पता कि इस हकीकत को कितने लोग जानते है ? और कितने लोग नही जानते है ? ये Television Journalism के हकीकत बन गया है ताकि Political Party अपने हिसाब से चीजों को नीगलेट कर सके ।
ये टेलीविजन चैनल को Coordinate करना पड़ता है नही तो पॅालिटिकल डेस्क मिलना बंद हो जाएगा।
अगर आपने Individually किसी Spokes Person को बुला लिया तो पार्टी अगले दिन से आपको गेस्ट देना बंद कर देगी ।
अगर आपने हमसे बिना पूछे बुलाया तो अगले बार से हम आपको गेस्ट नही देंगे ।
यह एक हकीकत है।
हो सकता है कि इन बातों से कई लोग सहमत नही हो कि यह पत्रकारिता का स्वरूप नही है इसे राजनीतिक दलों ने इस Module को Adopt कर लिया है।
इस स्थिति को किस हिसाब से समझा जाए ? और किस हिसाब से react किया जाए ?यह है राजनीतिक War Room बनाने का नतीजा । ये बात तब चला जब उन्होंने War Room बनाया । जहाँ तक मुझे याद पड़ता है मैंने पहली बार War Room शब्द जो है 1993 के चुनाव के समय में सुना था।
बाबरी मस्जिद ढाई जाने की बात हुए थे तब मैं तुरंत पत्रकारिता में आया था।
तब वो एक War Room बना था हमारे एक मित्र है उनके घर पर मित्र तो नही कहुंगा मेरे एक Political Source है उनके घर पर War Room बने थे उन्होंने ने कहा था प्रमोद महाजन से । उसके बाद धीरे - धीरे आते - आते 1998 के चुनाव तक कांग्रेस में होने लगा बाकी Political पार्टी ने भी Follow करने लगी और आज सब ने War Room बना ली है।
नितिश कुमार जी ने भी अपने घर में War Room बना लिया है। मेरे ख्याल से वे उन लोगों को लेकर War Room बनाया, ख्याल से क्या ये निश्चित है जिन लोगों ने नरेंद्र मोदी का कैंपेन किया था। जब War Room बने तो टेलीविजन क्रांति आई । हर चैनलस की मिनट टू मिनट मौनिटरिंग होती है, कितने देर लाइव चला ? कितने देर टेप चला ? कितनी देर ब्रेकिंग न्यूज चली ? टिकर पर क्या चला ? चुकी Pushkar ने इस तरह का टापिक रखा है तो मैं आपके सामने वो हकीकत बता रहा हूँ । यकीन मानीए तुरंत call Revert होता है फोन आता है कि ये आपने क्या चला दिया ? बहुत Organised System हो गया है Political Party का ।सोशल मीडिया पर आकर के बात खत्म करूँगा Twitter, Facebook ललित मोदी एक इंसान लंदन में बैठा हुआ है । जिस दिन देश की एक बहुत बड़ी Controversy Break होती है। वे विदेश में छुट्टीयां मनाते है , वहाँ पर बैठे - बैठे पुरी भारत सरकार को डिस्को डांडिया करा रहा है । जिसको जो कहना है कहे इसके बारे में जो लिखना है लिखे, खुली छूट है, चाहे नाम से लिखना हो लिखिए बिना नाम के लिखना हो लिखिए , चाहे अपनी पहचान रिलीज करना हो कीजिए नही रिलीज करना हो नही कीजिए । वह Political Party Individual नेता इस बात को अच्छे तरह से जानते है कि इसका राजनीतिक इस्तेमाल कैसे करना है ?
इन तीनों चीजों में भारतीय मीडिया की परिदृश्य को, भारतीय राजनीति की परिदृश्य, हम जैसा सोचते है उसके परिदृश्य, हम जैसा चिंतन करते है उसके परिदृश्य में हमारी सोच की परिदृश्य को पुरी तरह बदला गया है ।
और अंत में यह बात कह के खत्म करूँगा कि मेरे ख्याल से हम सब की देश इतना Matured है। यहाँ के लोग इतना Matured है। हमारी आबादी का एक बड़ा हिस्सा युवा में, हमारी देश विश्व में सबसे बड़ा युवाओं का देश है । Independent सोच हमारी प्रजातंत्र को आगे ले जाएगी। और मुझे लगता है कि हमारे युवाओं में Independent सोच कूट-कूट के भरा है। और अंत में यह कहना चाहूँगा कि हिन्दुस्तान का मीडिया, हिन्दुस्तान का अखबार हो, हिन्दुस्तान के टेलीविजन चैनल हो इस दाबे के साथ कह सकता हूँ कि पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा Independent और सबसे ज्यादा स्वतंत्र है तो यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी मजबूती और यही सबसे गर्व करने वाली बातें है।
बहुत- बहुत शुक्रिया ।

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