आखिरी कतार में खड़ा शख्स बताता है कि देश का असल मिजाज क्या है। देश के विकास पर प्रधानमंत्री के भाषण हो या कोट की शाइनिंग इससे कोई फर्क नहीं पड़ता जब तक देश की जनता की लाइफ स्टाइल न बदल जाये। 2019 का भारत आज तक एक परिवार के छत के नीचे की अवस्था को बनाने में लगा है।
प्रधानमंत्री को भी मजा आ रहा है। कभी गैस चूल्हा का जिक्र तो कभी शौचालय का। यही प्रधानमंत्री है जिसके आने से लगातार समाज के असमाजिक तत्वों के द्वारा नेतागिरी के विकल्प को बल मिला है।
आज का प्रधानमंत्री यह भी साबित कर दिया कि लगातार काम इस लिए करना पड़ रहा है क्योंकि उसके द्वारा बढ़ाये कदम लगातार देश के सामने नए संकट पैदा किया है और वह इस हाल में आ गया है कि उसे निंद नहीं आ रही है। यह वही प्रधानमंत्री है जिसने देश को बताया कि साहब ऐसे देश नहीं चलना चाहिए जहां सिर्फ प्रचार हो, ऐसे निर्णय हो जिससे प्रत्येक जनता सिस्टम के दरवाजे पर घंटी बजाने लगे, देश में प्रधानमंत्री की ऐसी करतूत हो जिसमें भाषण की चर्चा ज्यादा हो... काम की जब चर्चा हो तो देश की सिस्टम के नाम पर जनता कराह उठे, किसी प्रधानमंत्री के इवेंट्स की चर्चा से जनता पर कोई असर नहीं होता, किसी प्रधानमंत्री के द्वारा खुद को चौकीदार या चाय वाला नहीं कहा जाना चाहिए।
इन तमाम स्थिति ने देश में बेहूदा माहौल और चर्चा के वाहियात स्वरूप को जन्म दिया है। भारत जैसे देश में जब माहौल नाजुक हो तो हमें देश की जनता के दर्द को गंभीरता से समझना पड़ेगा। हमें खुद के सफलता और रॉकस्टार के फीलिंग्स से दूर रखना होगा।


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