मुझे लगता है कि आपको याद होगा दरसअल अपनी देश की तस्वीर क्या है? आज की भी और बीते कल की भी! मगर सबसे पहले आज रोटी की बात "पत्थर की मूरत को लगते है छप्पन भोग, दो रोटी के वास्ते मर जाते है लोग" माफ़ी चाहूंगा क्योंकि इस वक्त मुझे यह याद नहीं कि ये पंक्ति किसके द्वारा लिखी हुई है? लेकिन इसकी सच्चाई आपसे पूछना चाहता हूँ। आप जरा सोचिएगा !!
भारत में गरीबी की तस्वीर को समझना आज के दिनों में आसान है मगर इस समस्या से कैसे निजात पाई जाये? यह दरअसल कठिन है। आइये जरा समझते है इन आंकड़ों को -
आजादी के बाद 1951 में भारत की आबादी 36 करोड़ थी जो अब बढ़कर 127 करोड़ हो गई है। हकीकत यह है कि 6 साल बाद सन् 2022 में भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश हो जाएगा और सबसे गम्भीर बात यह है कि 37 करोड़ 84 लाख 60 हज़ार आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। और आपको यह भी मालूम होगा कि गरीब की श्रेणी में वह लोग आते हैं जिनकी दैनिक आय शहरों में 28.65 रुपये और गांवों में 22.24 रुपये से कम है। इन सब के बाद आप अपने भारत को किस तरह देखते है? किस तरह समझते है? मुझे नहीं मालूम ! मगर जानने की इच्छा है। आप इस लेख को पढ़ने के बाद दो-चार बातें अवश्य लिखिएगा।
आपके मन में यह भी सवाल उठ रहा होगा कि सिकेन शेखर आज इन बातों को क्यों टटोल रहा है? जबकि हमारा देश बदल रहा है। जरा देखिये इस तस्वीर को -
इन तमाम चुनौतियों के बीच रोटी और माँ के रिश्ते को समझना बेहद दिलचस्प लगता है और जब इस देश के नौजवानों से इस रिश्ते को समझने की कोशिश करता हूँ तो वे अक्सर इन पंक्तियों का सहारा लेते है। जरा नजर इस पर भी -
भारत में गरीबी की तस्वीर को समझना आज के दिनों में आसान है मगर इस समस्या से कैसे निजात पाई जाये? यह दरअसल कठिन है। आइये जरा समझते है इन आंकड़ों को -
आजादी के बाद 1951 में भारत की आबादी 36 करोड़ थी जो अब बढ़कर 127 करोड़ हो गई है। हकीकत यह है कि 6 साल बाद सन् 2022 में भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश हो जाएगा और सबसे गम्भीर बात यह है कि 37 करोड़ 84 लाख 60 हज़ार आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। और आपको यह भी मालूम होगा कि गरीब की श्रेणी में वह लोग आते हैं जिनकी दैनिक आय शहरों में 28.65 रुपये और गांवों में 22.24 रुपये से कम है। इन सब के बाद आप अपने भारत को किस तरह देखते है? किस तरह समझते है? मुझे नहीं मालूम ! मगर जानने की इच्छा है। आप इस लेख को पढ़ने के बाद दो-चार बातें अवश्य लिखिएगा।
आपके मन में यह भी सवाल उठ रहा होगा कि सिकेन शेखर आज इन बातों को क्यों टटोल रहा है? जबकि हमारा देश बदल रहा है। जरा देखिये इस तस्वीर को -
इस तस्वीर को देखने के बाद आपके मन बहुत से ख्याल आएंगे.......ख्याल आना लाजमी भी है लेकिन सबसे पहला ख्याल तो यह आया होगा कि क्या मैं भी इस कार्यक्रम को लाइव देख सकता/सकती हूँ ? तो इस सवाल का जवाब अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से पहले ही दे चुकी है 'निवेदिता फाउंडेशन' की जेनरल सेक्रेटरी 'नीलिमा ठाकुर जी' जल्दी से पढ़ते है कि आप लोगो के आमंत्रण हेतु क्या लिखा है उन्होंने- "आप सभी तू ही रे -2 में सादर आमंत्रित है। निवेदिता फ़ाउंडेशन और अपना रोटी बैंक माँ-बेटी के इस रिश्ते को प्रेज़ेंट करते हुए, शो में आपकी उपस्थिति की प्रार्थी है" तो आप भी तैयार हो जाएं इस कार्यक्रम में शिरकत करने लिए।
25 जुलाई 2016 दिन सोमवार को लोक कला मंच, 20-लोधी इंस्टीटुशनल एरिया, लोधी रोड, नई दिल्ली में शाम 5:30 बजे इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया जायेगा।
तू ही रे- 2 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' पर आधारित ये सांस्कृतिक कार्यक्रम है। तू ही रे- 1 कार्यक्रम के बारे में पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं। (http://sikenspeaks.blogspot.in/2016/02/blog-post_8.html?view=snapshot).
आगे बढ़े उससे पहले नजर जरा राम सिंहमार द्वारा लिखित इन पंक्तियों पर -
भूख लगी है बाबा,एक रोटी खिला दो बाबा,
एक रोटी न सही एक रुपया ही दे दो बाबा,
तड़पता,प्यासा और कुम्हलाता वो बच्चा यूँ ही बुदबुदाता रहता है,
नींद आ भी जाती है लेकिन एक रोटी के लिए ही मर जाता है।
कोई उसको चोर बताये, कोई झूठा तो मक्कार बताये है,
एक निवाला न देकर भी वो बाबू गाड़ी वाला गाली दे दुत्कार ही जाता है,
माँ ने देखा है तड़प तड़प के उस बच्चे का बिलखना, रात होती नहीं फिर भी भूखा सो जाता है, एक रोटी ही मांग रहा है बस वो एक गरीब है,
किस्मत अपनी से नसीब भी दूर है,तभी तो आज वो सड़को पर भीख मांगता है,
भारत का भविष्य गरीब है।
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जरा एक बार देख लीजिए अपने भारत को
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आज रोटी के पीछे भागता हूँ, तो याद आता है मुझे, रोटी खिलाने के लिए हमेशा माँ मेरे पीछे भागती थी... और कुछ नौजवानों ने यह भी कहा कि माँ की वो दो रोटियां कही मिलती नहीं, महंगे होटल में भूख मिटती नहीं। ... दरअसल गहराई हैं, इन बातों में इसमें कोई दो राय नहीं। बड़ा दिलचस्प होगा 25 जुलाई 2016 की उस शाम जब निवेदिता फ़ाउंडेशन और अपना रोटी बैंक इन मसलों पर सांस्कृतिक झरोखों को पेश करते हुए देश की राजधानी नई दिल्ली से देश के कोने-कोने में इस सन्देश को देने की कवायत में होगी। मगर बियॉन्ड द थर्ड ऑय के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोक कला मंच से महज 4.4 किलोमीटर पर स्थित संसद भवन में यह आवाज कितनी पहुंचेगी? जिससे 37 करोड़ 84 लाख 60 हज़ार भारी आबादी जो इस वक्त गरीबी रेखा के नीचे है। उसे भारत के वास्तविक खुशहाली में खुश देखा जा सके।
चलिए, जरा नजर उन लोगों पर जिन्हें मिलने है इस कार्यक्रम के दौरान अवार्ड
* नसीबा, सोनीपत से।
* रध्य, पानीपत से।
* कुलदीप सोनीपत से।
* राम सिंहमार पानीपत से।
* कार्तिक और भावना- न्यू आशा पब्लिक स्कूल, दिल्ली से।
* गर्वित शकुजा।
* रीनी कटारिया।
* शिविका।
* वन्या।
* कामिनी चौहान।
* सुमित चौहान।
* अमित ढैया।
* गुरमीत कौर।
* भावना झा।
* सुहानी यादव।
* हरिदान नारंग।
* इशानी भरद्वाज
और अब नजर निवेदिता फाउडेशन के वाईस प्रेसिडेंट 'राजीव गर्ग जी' के शब्दों पर "एक बेहद ख़ूबसूरत प्रोग्राम जो की माँ-बेटी के रिश्ते की बांडिंग के साथ साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के इस मिशन में आपकी भी सहभागिता को चाहता है! आप सभी का सादर स्वागत और आभार।
साथ ही आखिर में बियॉन्ड द थर्ड ऑय के तरफ से "जब एक रोटी चार टुकड़े हो और खाने वाले पांच तब मुझे भूख नहीं है कहने वाली व्यक्ति है- "माँ"" .........
आपका दोस्त।
सिकेन शेखर
* कुलदीप सोनीपत से।
* राम सिंहमार पानीपत से।
* कार्तिक और भावना- न्यू आशा पब्लिक स्कूल, दिल्ली से।
* गर्वित शकुजा।
* रीनी कटारिया।
* शिविका।
* वन्या।
* कामिनी चौहान।
* सुमित चौहान।
* अमित ढैया।
* गुरमीत कौर।
* भावना झा।
* सुहानी यादव।
* हरिदान नारंग।
* इशानी भरद्वाज
और अब नजर निवेदिता फाउडेशन के वाईस प्रेसिडेंट 'राजीव गर्ग जी' के शब्दों पर "एक बेहद ख़ूबसूरत प्रोग्राम जो की माँ-बेटी के रिश्ते की बांडिंग के साथ साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के इस मिशन में आपकी भी सहभागिता को चाहता है! आप सभी का सादर स्वागत और आभार।
साथ ही आखिर में बियॉन्ड द थर्ड ऑय के तरफ से "जब एक रोटी चार टुकड़े हो और खाने वाले पांच तब मुझे भूख नहीं है कहने वाली व्यक्ति है- "माँ"" .........
आपका दोस्त।
सिकेन शेखर


2 comments:
well placed , well presented .... curious minds....helping hands .....and active bodies will come forward ...... i m positive abt it ...poonam matia
Thank You Very much for joining here with precious feedback...
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