नहीं प्रसून साहब, देश की जनता को किसी हीरो या किसी पढ़े लिखे शख्स के खुदकुशी के मायने को समझने के लिए व्यक्तित्व विकास अब अहम नहीं है। किसी महान आदमी में कोई बीमारी हो जाये और किसी रोड छाप आदमी में भी वही बीमारी हो जाये तो इलाज के लिए विज्ञान को अलग अलग डिफाइन करने की जरूरत नहीं है। एक ही विज्ञान और एक ही इलाज दोनों हाल में काम क़र जायेगा। ऐसा नहीं है कि डॉ. के लिए महान आदमी को स्वस्थ्य करने में अलग विज्ञान का फॉर्मूला का इस्तेमाल किया जायेगा और रोड छाप आदमी को स्वस्थ्य करने में अलग। जब बीमारी एक है तो अलग विज्ञान की जरुरत नहीं पड़नी चाहिए।
सुशांत अपने ज़िंदगी के राह पर खूब छक्के जड़े हो, तो छक्का जड़ने का मतलब यह नहीं होता है कि वह कैच आउट न हो, और कैच आउट अगर न हुआ तो जरुरी नहीं है कि क्लीन बोल्ड भी न हो। बहुत सामान्य सी बात है साहब। स्टोरी की अप्रोच बताने की कोशिश में आप भूल रहे हैं कि जिस दुनिया में आप पत्रकार कहलाते हैं उसी दुनिया की एक सच यह है कि हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। अब कितने सुशांत की कहानी का आप सहारा लेंगे? कैसे कैसे डिफाइन करेंगे खुदकुशी को? इस हीरो की ज़िंदगी तो साहब सामन्य सी ही थी मगर आपके शब्दों ने किसी व्यूअर को यह जरूर एहसास करा दिया होगा कि बॉलीवुड भी एक चौराहा है जहां एक लम्बी कतार है तो सुन लीजिये.....
महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोगों ने की खुदकुशी
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार देश में सुसाइड के मामलों में 3.6 फीसदी की बढोत्तरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में कुल 1, 34, 516 लोगों ने खुदकुशी की जो 2017 के 1, 29, 887 आत्महत्या के मामलों के मुकाबले 3. 6 प्रतिशत अधिक है। आत्महत्या के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र (17, 972) में दर्ज किए गए। दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमश: तमिलनाडु (13, 896), पश्चिम बंगाल (13, 255), मध्य प्रदेश (11, 775) और कर्नाटक (11, 561) हैं। इन पांच राज्यों में ही 50. 9 फीसदी खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए। सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश जहां देश की 16. 9 प्रतिशत आबादी रहती है, वहां कुल खुदकुशी में से केवल 3. 6 प्रतिशत मामले ही दर्ज हुए। केंद्रशासित प्रदेश के मामले में सबसे अधिक दिल्ली में 2, 526 खुदकुशी के मामले दर्ज किए गए। 500 आत्महत्या के मामलों के साथ पुडुचेरी दूसरे स्थान पर रहा। सुसाइड कर मौत को गले लगाने वाले सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूर और गरीब तबके के लोग थे।
महाराष्ट्र में किसानों ने सबसे ज्यादा की खुदकुशी
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2018 में 5763 किसानों और 4586 खेतिहर मजदूरों ने खुदकुशी की है। अगर 2018 की बात करें तो किसानों की खुदकुशी में 5457 किसान पुरुष थे, जबकि 306 महिलाएं थी। खेतिहर मजदूरों की बात करें तो खुदकुशी करने वालों में 4071 पुरुष थे, जबकि महिलाओं की संख्या 515 थी। किसानों की खुदकुशी के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। कुल खुदकुशी के 34.7 फीसदी मामले महाराष्ट्र में, 23.2 फीसदी कर्नाटक में, 8.8 फीसदी तेलंगाना में, 6.4 फीसदी आंध्र प्रदेश में और 6.3 फीसदी मध्य प्रदेश में दर्ज किए गये।
हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार कर रहे खुदकुशी
इस रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वालों में किसानों के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। वर्ष 2018 में 12,936 लोगों ने बेरोजगारी से तंग आकर आत्महत्या कर ली। यह आंकड़ा 2017 में 34 और 2016 में 30 लोगों की खुदकुशी का था। वहीं 2018 में 10,349 किसानों ने आत्महत्या की। रिपोर्ट यह भी खुलासा हुआ कि सुसाइड करने वाले 1.3 लाख में से 66 प्रतिशत लोगों की आय प्रतिवर्ष एक लाख रुपये से कम थी। प्रत्येक पांच में एक दिहाड़ी मजदूर था । बेरोजगारों द्वारा खुदकुशी के जारी किए गए सरकारी आंकड़ों में सुसाइड करने वाले 82 फीसदी पुरुष हैं। एनसीआरबी डाटा के मुताबिक देश में बेरोजगारी की वजह से साल 2018 में औसतन 35 लोगों ने रोजाना खुदकुशी की है। इस तरह से हर 2 घंटे में लगभग 3 बेरोजगार खुदकुशी कर रहे हैं।
साल दर साल बढ़ रहे सुसाइड
2017 में 12,241 लोगों ने बेरोजगारी की वजह से खुदकुशी की थी, जबकि इसी दौरान खेती-किसानी से जुड़े 10,655 लोगों ने आत्महत्या की। वहीं, 2016 में 11,379 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने जान दी थी, जबकि इसी अवधि में 11,173 बेरोजगारों ने आत्महत्या की थी। बेरोजगारी की वजह से 2015 में 10,912 लोगों ने खुदकुशी की थी, जबकि उस साल किसानों की आत्महत्या के 12,602 मामले दर्ज किए गए थे।
दुनिया भर में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति कर लेता है सुसाइड
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक दुनियाभर में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं. यानी हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। यानी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। डब्लूएचओ की ओर से आत्महत्या पर जारी ग्लोबल डाटा के मुताबिक आत्महत्या करने वालों में 15 से 29 साल के लोगों की तादाद सबसे ज्यादा है। (इस तथ्य को hindi.oneindia.com पर भी प्रकाशित किया गया है).
अब जरा वक्त मिले प्रसून साहब तो फिर से आमने सामने हो लेते हैं खुदकुशी के मसले पर।

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