Saturday, June 11, 2016

“1947 से 1964 के बीच अगर यह सवाल उठता तो नेहरू जरूर परेशान दिखते”: सिकेन शेखर

देश के प्रथम प्रधानमंत्री "चाचा नेहरू", जी 'हाँ' चाचा नेहरू के नाम से अक्सर एक बात याद आती है कि बच्चें कल के भविष्य हैं। दरअसल चाचा नेहरू बच्चों में भारत का भविष्य देखते थे। वही आज के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का मानना है कि यदि हमें अपने देश के विकास को आगे बढ़ाना है तो हमारा मिशन कौशल विकास और कुशल भारत होना चाहिए। मसला कही न कही भारतीय विकास से जुड़ा है। दोनों प्रधानमंत्री ने सपना गजब का देखा मगर एक ने बिना करोड़ों रूपये का प्रचार किये लोगों तक अपनी बात पहुंचाई तो दूसरे ने देश का करोड़ों रूपये खर्च कर मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक अपनी बात पहुंचाई। देश बखूबी जानता होगा इस बात को।

अभी हाल ही में हिन्दुस्तान टाइम्स के फ्रंट पेज पर एक खबर छपी थी कि "पीएम्स स्किल इंडिया इनिशिएटिव स्कोर्स लो ऑन प्लेसमेंट्स"खबर को समझने की कोशिश करें तो मालूम चलता है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 17 लाख छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षिण ली मगर इनमें से लगभग 85 हज़ार छात्र-छात्राओं ने ही सफलता पूर्वक जॉब्स हासिल किया। मसला साफ़ है जिन बच्चों के बारे में चाचा नेहरू ने कहा कि बच्चें कल के भविष्य हैं और इन्हीं बच्चों में चाचा नेहरू भारत का भविष्य देखते थे फिर मोदी सरकार में 16,25,000 (सोलह लाख पच्चीस हजार) का यह आंकड़ा लगभग 95 फीसद का है जिन्हें जॉब्स प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंर्तगत प्रशिक्षण के बाद भी नहीं मिला। जाहिर सी बात है 1947 से 1964 के बीच अगर यह सवाल उठता तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री "चाचा नेहरू" जिन बच्चों में भारत का भविष्य देखते थे उनके लिए परेशान दिखते मगर मोदी जी के बारे में आपका क्या ख्याल है? एक-बार सोचना चाहिए आपको।

कभी वक्त हो तो जरा मिलिए उन युवकों से "जो 25 वर्ष के उम्र में अपने परिवार में रहते हुए जॉब के लिए चिंतित हैं" जरा उनके नजरिया से भी देश के भविष्य और विकास को समझिए ! और इन सब के बाद मोदी सरकार में हिन्दी के साथ कई अन्य भाषाओँ में लहराती "यदि हमें अपने देश के विकास को आगे बढ़ाना है तो हमारा मिशन कौशल विकास और कुशल भारत होना चाहिए" पंक्तियों को देख कर-पढ़ कर दिल में कई सवाल उठते हैं, जैसे- मोदी सरकार को इन शब्दों के लिए प्रचार करना ज्यादा महत्वपूर्ण है या फिर इन शब्दों के लिए समाज में धरातल पर कुछ ठोस करना महत्वपूर्ण है? जिससे इसके सही मायने को समझा जा सके। क्या सरकार के पास प्राथमिकता के तौर पर समझने के लिए वे तमाम आंकड़े नहीं जिससे यह समझा जाएँ कि कितनी युवाओं की संख्यां हैं जिन्हें रोजगार की जरूरत हैं और यही उनके परिवार और देश के विकास के लिए जरुरी हैं।

खैर, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की जब आंकड़ा सुचना के अधिकार कानून के तहत मिली तो एनएसडीसी के सीईओ जयंत कृष्णा साहब का बयान आया "द आरटीआई" डेटा वज नॉट ऎन ऎप्ट रिफ्लेक्शन ऑफ़ द स्कीम्स सक्सेस (The RTI data was not an apt reflection of the scheme's success) "आरटीआई डेटा योजना की सफलता का एक उपयुक्त प्रतिबिंब नहीं था" इस वक्त मोदी सरकार में कांग्रेस सरकार द्वारा प्रारंभ की गई सुचना के अधिकार कानून की क्या हालात है इस बयान से समझा जा सकता है।

आज इस ब्लॉग के जरिए कुछ और ही बात करने वाला था। "मेरा देश बदल रहा है आगे बढ़ है "2 मिनट 49 सेकेंड के इस गाने को पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल के जरिए लांच किया। जिसका थीम था ‘एक साल, बेमिसाल। प्रधानमंत्री जी को लगा कि एक साल की उपलब्धियां बताई जाये दो साल बाद तो उन्होंने ऐसा किया मगर आज से तक़रीबन 11 साल पहले सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई ) 2005 जो एक प्रभावी उपकरण है, जो खास तौर पर विभिन्न निकायों, एजेंसियों और सरकार के विभागों की गतिविधियों को जाँच कर पारदर्शिता के प्रति  सार्वजनिक और प्रदर्शन के लिए जवाबदेह रखती है और भ्रष्टाचार को कम करती है इसे लेकर मोदी जी को कतई नहीं लगा कि इसे सही रूप में चलने दिया जाये। क्योंकि देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है। इसी बात पर  चलिए जरा नजर घुमाते है मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है... इस गाने की लिरिक्स पर:

देखो आसमान में खिलकर सूरज निकल रहा है...

देश का परचम अब ऊंचा उड़ रहा है...

बरसों का अंधेरा रोशन हो रहा है...

गरीब की रसोई से धुआं हट रहा है...

मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है...

गरीब को मिला सहारा, कारोबार उभर रहा है...

किसान की फसल को बीमा का बल मिल रहा है...

मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है...

युवाओं के हाथों से भारत संवर रहा है...

गांव की सड़क से अब शहर जुड़ रहा है...

बैंक अब सभी का खाता खोल रहा है...

मील का सफर अब मन को भा रहा है...

हुनर के हौसले से रोजगार बढ़ रहा है...

मेरा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है...

सचमुच भारत में अब इन्हीं चीजों की जरूरत महसूस हो रही है देश की हालत और हालात जैसी भी हो, भाई साहब देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है...... अच्छी बात है। मोदी सरकार में कांग्रेस सरकार जैसी ही देश की नाजुक स्थिति है मगर मोदी जी ने शब्दों के सहारे लोगों को कहा देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है...... मेरठ जैसे जगह पर अपराध वही है। हिन्दू-मुस्लिम की तकरार वही है। फिर भी देश बदल रहा है आगे बढ़ रहा है...... क़र्ज़ के वजह से मोदी सरकार में भी किसान मर रहे है फिर भी देश बदल रहा है, आगे बढ़ रहा है.... महंगाई वही है, सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार वही है फिर भी देश बदल है, आगे बढ़ रहा है......  सच्चाई है भी कि देश बदल रहा है लेकिन सारे समस्याओं को दरकिनार कर के नए नाम गढ़ते हुए देश बदल रहा है। अगर इसे मोदी सरकार की पंच लाइन कहे तो ज्यादा फिट बैठेगा और एनडीए सरकार को खुरेज भी नहीं होनी चाहिए। आमूमन ऐसा देखा भी जाता है कि पंच लाइन जितनी दमदार काम न भी हो तो चलता है। अभी कुछ ही दिन पहले मोदी जी अमेरिका की यात्रा पर से स्वेदश वापस आये है। 7 जून 2016 का दिन ख़बरों के नजरिया से थोड़ा असमंजस जैसी स्थिति निर्मित करता दिखा सिर्फ इसलिए चुकी एक तरफ व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सातबी मुलाकात की खबर दुनिया देख रही होती है तो दूसरी तरफ वेस्टर्न केंटकी यूनिवर्सिटी के द्वारा 25 भारतीय छात्रों को प्रवेश मानकों पर खरा नहीं उतरने के चलते बाहर निकाल दिया जाता है साथ ही यह भी उन्हें  कहा जाता है कि स्वदेश लौट जाएं। वैसे तो इस तरह की खबर आम है मगर नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर है तब यह खास नजर आता है। वक्त जैसी भी मगर चाचा नेहरू के उन बच्चों के लिए बेहतर नहीं दिखता, भविष्य पर तो सवाल है ही मगर फिर भी बच्चों लिए आल द बेस्ट।

No comments:

Featured Post

जसबीर कविता मंच द्वारा काव्य संग्रह 'प्रकृति और भावनाएं' का विमोचन

जसबीर कविता मंच डॉ. जसबीर कौर ने 2020 में संस्थापित किया। इस काव्य मंच पर सभी कवि कवयित्री अपने मन के उद्गार व अनुभूतियां सांझा करते हैं। इस...