सिकेन शेखर ने भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर से पूछा अगर आपके पिता जी की मौत सड़क दुर्घटना में हुई होती और धक्का मरने वाली गाड़ी आपके ही ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता की होती और वाहन उसका पुत्र चला रहा होता और पुलिस अभियंता के पुत्र को थाना पर से ही जमानत दे दी होती फिर आपका अगला स्टेप क्या होता ....?
पहला सवाल - आप कभी सड़क दुर्घटना से हुई पिता की मौत की आहट में किसी पुत्र की आवाज बन सकते है?
दूसरा सवाल - आपके समाज में पुलिस दोषी को सिर्फ इस बात पर छोड़ देती है कि धक्का मरने वाली गाड़ी आपके ही ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता की है। ऐसे हालात में पुलिस की गैरजिम्मेदारी कदम और यातायात प्रशासन की लापरवाही पर आप चुप बैठे रहेंगे क्या?
तीसरा सवाल - इस घटना के बाद क्या आप चाहते है कि दोषी को बिना सजा मिले आप लोग इस खबर को अनसुना करते रहेंगे? मंत्री जी इससे आक्रोशित लोग जो इस न्याय की मांग कर रहे हैं जरा सोचिए उनके दिल में एक अँधा सरकार के खिलाफ कैसे-कैसे प्रदर्शन की कल्पना चल रही होगी?
चौथा सवाल - इस आलेख के जरिए हम आपको सिर्फ इस घटना से अवगत नहीं कराना चाहते है बल्कि इसके साथ साथ आपसे यह भी जानना चाहते है कि आपकी सरकार कितने घंटे में ग्रामीण विकास विभाग के कार्यपालक अभियंता के पुत्र को गिरफ्तार करने की वायदा कर रही है?
पांचवा सवाल- जिस थाना पर से थानाध्यक्ष के माध्यम से पुलिस अभियंता के पुत्र को जमानत दे दी जाती है उस थानाध्यक्ष के विरुद्ध आपकी प्रसाशन क्या कार्यवाई करेगी?
यह है खबर
घटना 21 जून की है। बिहार के वैशाली जिले के राजपूत टोले के रहने वाले रिटायर फौजी देवनाथ प्रसाद चौहान समाहरणालय से सटे मजिस्ट्रेट कॉलोनी से होकर पैदल जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही स्कार्पियो गाड़ी ने उन्हें ठोकर मार दी। ठोकर मार कर भागने की कोशिश कर रहे युवा चालक को कॉलोनी के गार्ड ने लोगों की मदद से पकड़ लिया। मामला पुलिस तक पंहुचा मगर आरोपी ने थाने में कुछ इस तरह परिचय दिया की पुलिस भी आरोपी के सामने बौना साबित होते दिखी। आरोपी खुद को एग्जीक्यूटिव इंजीनियर का बेटा बताकर पुलिस को अपने कंट्रोल में कर लिया फिर पुलिस ने पीआर बांड पर आरोपी को छोड़ दिया। वही दूसरी तरफ घायल फौजी देवनाथ प्रसाद चौहान जी की हालत गम्भीर देख परिजनों ने इलाज के लिए पटना के निजी नर्शिंग होम में भर्ती कराया, जंहा इलाज के क्रम में उनकी मौत हो गई।
आरोप
मृतक के परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया कि पुलिस ने उस गाड़ी चालक को गिरफ्तार करने के बाद छोड़ दिया। पुलिस के इस रवैया पर लोग आक्रोशित हो कर लगातार प्रदर्शन करते हुए मांग कर रहे है कि इंजीनियर के आरोपी पुत्र को पुलिस जल्द गिरफ्तार करें और नगर थाना अध्यक्ष के विरुद्ध प्रशासन कार्यवाई करें।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि ठोकर मारने वाली गाड़ी पर ग्रामीण विकास विभाग का नेम प्लेट लगा हुआ था। थाने में जब्त वाहन पर से नेम प्लेट हटा दिया गया। ताकि एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के आरोपी पुत्र को बचाया जा सके। मामला अफसर के बेटे का होने के वजह से पुलिस उसे बचाने की पूरी कोशिश में है।




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