अपने विद्यालय 'अक्षरा' के सहयोग से आज हमारी कोशिश बाढ़ से घिरे उन सैंकड़ों घरों के लोगों तक सहायता पहुँचाने की रही जो किसी कारण से खुले स्थान या बाढ़ राहत कैम्प तक नहीं आ पाये हैं । खुद के प्रयास से नाव की व्यवस्था की और तैयार ताजे भोजन के पैकेट्स के अलावे बच्चों के लिए बिस्कुट, ब्रेड और शुद्ध पानी के बोतल लेकर अंदर गाँवों तक पहुंचे । चारों तरफ पानी ही पानी और उसके बीच ऊँचे स्थानों पर शरण लिए राहत की बाट जोहते भूखे बेसहाय परिजन । बड़ा दर्दनाक दृश्य था ।
हमने भी हार नहीं माना चिलचिलाती धुप और नाव के झाड़ियों में फंसने के बावजूद उनलोगों तक पहुँच कर राहत सामग्री का वितरण किया जिन्हें वास्तव में इनकी जरुरत थी । हम ये मानते हैं की हमारे एक वक्त के भोजन उपलब्ध कराने से बाढ़ में फँसे इन लोगों का समस्या हल नहीं हो सकेगा इसके लिए आपलोगों से भी आग्रह हैं की सहायता हेतु आगे आये ।
साभार- सत्येंद्र कुमार यादव जी के फेसबुक वॉल
हमने भी हार नहीं माना चिलचिलाती धुप और नाव के झाड़ियों में फंसने के बावजूद उनलोगों तक पहुँच कर राहत सामग्री का वितरण किया जिन्हें वास्तव में इनकी जरुरत थी । हम ये मानते हैं की हमारे एक वक्त के भोजन उपलब्ध कराने से बाढ़ में फँसे इन लोगों का समस्या हल नहीं हो सकेगा इसके लिए आपलोगों से भी आग्रह हैं की सहायता हेतु आगे आये ।
साभार- सत्येंद्र कुमार यादव जी के फेसबुक वॉल




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