भारत की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गाँधी अभी हाल ही में हिंदुस्तान समाचार के साथ बातचीत की। बातचीत के दौरान कई ऐसे पॉइंट्स बियॉन्ड द थर्ड ऑय को हाथ लगी जो गवर्नमेंट की नेग्लिजेंस को बताती है। इन नेग्लिजेंस पर बियॉन्ड द थर्ड ऑय के प्रहार को अवश्य पढ़े :
1. मेनका गाँधी जी आपके विचार से लगता है कि आप भारतीय महिलाओं की स्थिति की तुलना में विदेशी महिलाओं की स्थिति को ज्यादा करीब से समझती है।
2. मेनका गाँधी जी को भारतीय महिलाओं के समक्ष सुरक्षा की चुनौती को सफाया करने के लिए विदेशी सेल फोन कंपनियां से लड़ाई लड़नी पड़ी। भारतीय महिलाओं के लिए यह दुर्भाग्य है कि मेनका गाँधी जैसी महिला आज मंत्री बनी हुई है। यह तो राबड़ी देवी जैसी हालात है।
3. जिस मोदी सरकार की सत्ता के नशे में मेनका गाँधी एसी में बैठकर महिलाओं की हालात को लात मारकर कह रही ही है कि इस सरकार में महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। मुझे लगता है देश कि एक खास ही समुदाय ऐसा होगा जो इन्हें जानता भी होगा। कितना दूर इन्हें यह समुदाय फेंकेगा इनको समझ लेना चाहिए। मतलब हालात को भी कुचल डाली यह महिला मंत्री।
4. हिन्दुस्तान के पंकज साहब ने मेनका गाँधी से एक सवाल किया था कि हर साल बड़ी संख्या में औरतें-बच्चे लापता हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है? जवाब में मेनका गाँधी कहती है, ''हमने रेलवे पर बहुत जोर डाला है''। आप समझिए जरा मोदी साहब के दलाल टाइप मंत्री की जुबानी को।
हिंदुस्तान के पंकज कुमार पांडेय जी के द्वारा मेनका गाँधी से पूछे गए सवाल 'एक सुस्पष्ट राष्ट्रीय महिला नीति कब तक तैयार होगी'? इस पर कोई स्पष्ट जवाब नही दे पाई थी मेनका गाँधी।
5. मोदी सरकार में मेनका गाँधी काम कैसे करती है ध्यान से पढ़े: मेनका कहती है, मैंने कहा है कि हर अस्पताल हर हफ्ते यह अपडेट दे कि उसके यहाँ कितने बच्चे सर्जरी से पैदा हुए? अपने ही जवाब में कहती है अभी तक फिडबैक नही मिला है, लेकिन हमें उम्मीद है कि आएगा। मतलब भगवान भरोसे? मसला था सिजेरियन पद्धति से बच्चे को जन्म देने को लेकर। मुद्दा गंभीर इसलिए है क्योंकि तमिलनाडु में 71 प्रतिशत सिजेरियन पद्धति से ही बच्चे पैदा हो रहे हैं। और यह पैसे कमाने का जरिया बन गया है।
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हिंदुस्तान समाचार पत्र में प्रकाशित इंटरव्यू
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