Friday, May 24, 2019

“बीजेपी ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की एक राजनीतिक शाखा है, जो भारत को गर्त में ले जा रही है: ‘द गार्डियन’


Lok Sabha Election Result 2019: देश-दुनिया के लिए सही नहीं है मोदी की यह जीत- द गार्डियन की राय, न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स ने भी लिखीं खिलाफ में बातें

Poll result 2019: लोकसभा चुनावों में बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली जीत का प्रतिष्ठित वैश्विक मीडिया नकारात्मक नजरिए से विश्लेषण कर रहा है। 'द गार्डियन' ने अपने संपादकीय में जहां मोदी की जीत को भारत और विश्व के लिए 'बुरी ख़बर' बताई है, वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने एनडीए के अगले कार्यकाल को एक लबां 'डरावना सपना' करार दिया है।

लोकसभा चुनाव (Poll Result 2019) में दूसरी बार लगातार बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत को दुनिया की मीडिया से नकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। नामी अख़बार ‘द गार्डियन’ और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने नरेंद्र मोदी की बतौर प्रधानमंत्री वापसी को भारत और विश्व के लिए ख़राब बताया है। ‘द गार्डियन’ ने लिखा है कि 1971 के बाद भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने जा रही है। पांच सालों तक अर्थव्यवस्था की बदहाली के बावजूद मोदी ने पिछले चुनाव के मुक़ाबले ज्यादा सीट हासिल की है। यह भारत और दुनिया के लिए बुरी ख़बर है।

अख़बार अपने संपादकीय में लिखता है, “बीजेपी ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की एक राजनीतिक शाखा है, जो भारत को गर्त में ले जा रही है। यह जानकार थोड़ा आश्चर्य होगा कि हिंदू समाज में प्रभाव रखने वाले सवर्णों, उद्योगपति-परस्त अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक रूढ़िवाद, महिलाओं के प्रति पारंपरिक घिसी-पिटी राय और राज्य की शक्तियों के साथ यह (बीजेपी) हमेशा खड़ी रही है। मोदी को मिली प्रचंड जीत से भारत की आत्मा ‘अंधकारमय’ राजनीति के आगोश में खो जाएगी।19.5 करोड़ मुसलमानों के प्रति दोयम दर्जे के नागरिक का विचार बढ़ जाएगा।” ‘द गार्डियन’ ने लोकसभा में मुसलमानों के घटते प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाए हैं और उसके लिए हिंदुत्व की राजनीति को उत्तरदायी बताया है। अख़बार लिखता है, “संख्या बल होने के बावजूद भी मुसलमान ‘राजनीतिक अनाथ’ बन चुके हैं। राजनीतिक वर्ग बहुसंख्यक हिंदुओं का वोट गंवाने के डर से मुसलमानों से दूरी बना रहा है।”

अमेरिका के ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने भी NDA की जीत पर नकारात्मक लेख छापा है। पंकज मिश्रा द्वारा लिखे लेख में नरेंद्र मोदी के लिए भारत का ‘हिंदू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है। इस लेख में भी पीएम मोदी के जीत की समिक्षा ‘हार्ड-हिंदुत्व’ के नजरिए से की गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख की शुरुआत पीएम मोदी के उस बयान का मजाक उड़ाते हुए की गई है, जिसमें उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान विशेषज्ञों के राय को दरकिनार कर बादलों की आड़ में अटैक करने का निर्देश दिया था। अख़बार ने मोदी को ‘विज्ञान के प्रति अंजान’ व्यक्ति करार दिया है और उनके तर्क जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘बादलों के बीच विमानों को पाकिस्तानी राडार ट्रेस नहीं कर पाएंगे’, इसे बचकाना बताया। इसके अलावा नोटबंदी पर भी प्रहार किया गया है और अर्थव्यवस्था को मिट्टी में मिलाने वाला व्यक्ति करार दिया है।

लेख में मोदी के कार्यकाल को हिंसक दौर के तौर पर पेश किया गया है। अख़बार लिखता है, “मोदी के कार्यकाल के दौरान भारत में वर्चुअल और रियल दोनों टर्म पर हिंसक घटनाएं हुई हैं। इस दौरान टीवी एंकर और ट्रोल आर्मी ने आलोचकों को एंटी-नेशनल करार दिया। ट्रोल्स ने औरतों को रेप करने की धमकी दी। मुस्लिम की मॉब लिंचिग की गई। जूडिशरी से लेकर सेना, न्यूज़ मीडिया, विश्वविद्यालय सभी जगहों पर हिंदुत्व प्रधान विचारधारा ने अपनी जड़ें जमा लीं।” न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे लेख में पंकज मिश्रा ने मोदी की वर्तमान जीत को भारत के लिए एक लंबे डरावने सपने की तरह बताया है।

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