एक साधारण से शहर में चोरी हो, डकैती हो, लूट हो तो शहर भी रोशनी में चमकने की क्षमता खो देता है और ऐसे हालात में शहर की एक अजोबो गरीब तस्वीर बन जाती है। शहर की असल हालात और क्षमता ऐसे ही वक्त में समझना आसान होता है और इसके ठीक सामने ऐसा दिन शहर को न देखना पड़े इसके लिए आपको समझना चाहिए कि इस देश में कौन से लोग वर्दी में हैं और उनकी तस्वीर किस तरह की बनती है? उनके सुबह से शाम तक के एक-एक एक्टिविटी पर आपकी नज़र होनी चाहिए।
शहर के सुरक्षा में तैनात वर्दीधारी को भी सामने निकलकर भी आना चाहिए। घर-घर जाकर दरवाजा भी खटकाना चाहिए यह कहते हुए कि मुझे आपके शहर को चमकते रोशनी में चमचमाते हुए आपके साथ देखना है। हर कीमत पर कोई खौफ और कोई डर आपके करीब नहीं आने दूंगा। क्योंकि इन्हीं कामों के लिए मेरे परिवार के लोगों को आज मुझ पर गर्व हो रहा है। मेरे परोस में मेरे ऑफिसर होने पर फक्र है। वे मेरी अब असल काबिलियत देखने के लिए टकटकी लगाए हैं। उन्हें आपकी खुशहाली देखकर मेरी सफलता का एहसास होगा। हमने किताब के हर एक शब्द को बड़ी शिद्दत से पढ़ा है। और जब हालात ऐसी न बने, तस्वीर ऐसी न दिखे तो आपको सवालों के जरिये इन पर प्रहार करना चाहिए। उन्हें एहसास होना चाहिए कि शहर में वर्दी के जब रंग को मानुष रंगहीन करने की कोशिश करेगा तो उसका जवाब कैसे देना है।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप वर्दी नहीं पहनते हैं, आप वर्दी में नहीं है मगर यह हम तमाम लोगों की कर्तव्य होनी चाहिए कि एक अधिकारी जब अपने काम को सही से अंजाम न दे पाए तो उसे कैसे रोशनी दिखानी है। एक अधिकारी फ़िल्मी स्टाइल में सिंघम बन जाता है। कोई ईमानदार अधिकारी कहलाता है। आपको समझना पड़ेगा कि इस प्रोफेशन में ऐसे शब्दों के जरिये किसी भी अधिकारी को सम्बोधित करना आपकी मूर्खता है। क्योंकि आप ऐसे माहौल में हैं जहां एक चौक पर आप उस अधिकारी की जयकार कर रहे होते हैं तो दूसरे चौक पर कोई दामिनी जन्म ले रही होती है तो किसी तीसरे चौक पर कोई गुनेहगार आदर्श बनने की हर हथकंडे अपनाता है और इन तमाम किस्सों में अधिकारी सबसे बड़ा खलनायक होता है। ऐसे अधिकारी को दण्डित कैसे किया जाए इस पर चर्चा होना इस वक्त की जरुरत है।
एक शहर में हो रहे क्षति को रोकना अधिकारियों की ड्यूटी है। और वे जब अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे होते हैं तभी चोरी, डकैती जैसी बड़ी घटना को शहर में अंजाम दिया जाता है। इन्हें अपनी शख्सियत पर जितनी नाज़ होती है क्या उन्हें अपने अधूरे कामों पर आये परिणाम से शर्म भी आती है? ऐसे हाल में इन्हें सज़ा मिलनी चाहिए। इन्हें एहसास होना चाहिए कि एक एक सेकेंड शहर की सुरक्षा इस वर्दी की कसम है, जिम्मेदारी है जिसे मरकर निभाना है।

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