नितीश कुमार जी कभी अपने चेहरे को कमीज के क्रीच के सामने रख के देखिये कि किसकी छवि सही है। सिस्टम और सत्ता को इतने कंगाल मत बना दीजिये कि आपके जन्मदाता की हैसियत की चिता जल जाये। सीपीआई(एम) के तरफ से कल मुझे एक ईमेल मिली, जिस ईमेल में बिहार में दम तोड़ते सिस्टम और सिस्टम के सामने तैनात बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय और नेता के किंग नितीश कुमार की हकीकत अब सामने है।
बिहार में इन दिनों हो क्या रहा है उसकी एक बड़ी तस्वीर सामने है। तो चलिए आपको बतलाता हूँ। बिहार में इन दिनों लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक महिलाएं और बच्चियां हिंसा की शिकार हो रही है। इसके लिए संयूक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है। मोदी जी को शर्म अगर आती है तो जरा अपने ट्विटर होम से एक चिंता की संदेश अपने भारतीय जनता पार्टी के हीरो लोगों को दे दें क्योंकि देश की जनता के सामने सन्देश देने के काबिल फ़िलहाल मेरे नज़र में तो ये साहब हैं ही नहीं।
आप सोचिये किसी को इस वक्त हैरानी नहीं हो रही है कि मोदी जी जिस देश में जिन महिलाओं को माता और बहन का दर्जा देते हैं और उन्हीं के सामने जब इनकी माता बहन कुचल दी जाती हैं तो इन्हें चिंता तक नहीं होती। और सीपीआई(एम) को इसके लिए स्टैंड लेना पड़ता है। इस बात का जिक्र करते हुए कि संयूक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है। इस देश में किसे शर्म आनी चाहिए? एक बार हर भारतीय को सोचने की जरुरत है और बिहार के जो लोग बिहार में जिस तरह का माहौल बना रहे हैं उन्हें अपने बिहारी के आईने में अपने समाज की शक्ल देखने की जरुरत है।
मुझे लगता है आपको हैरानी होनी चाहिए। आपको अगर हैरानी हो रही है तो सरक़ार को उसे अपने साम्राज्य की शक्ल दिखा दीजिये। मोदी जी के आप फैन हैं तो बने रहिये मगर उसे बताइये कि एक फैन होते हुए भी अब हम आपके सामने मरती जनता की बात करेंगे। आपके दीवानेपन में भी हम जनता की बात करेंगे। देश को सिर्फ वाह वाही की जरुरत नहीं है। जब विदेश के लोग खुद से वाह वाही करें तब उसे हम स्वीकार करेंगे। हम इंतज़ार करेंगे अपने भारतियों के ख़ुशी वाले दिन का मगर इस दर्द में चाहे मोदी जी हो या कोई कुमार किसी को हक़ नहीं देंगे वाहियात ढोंग रचने का।
ईमेल में आगे लिखा है घरेलू हिंसा में विश्व स्तर पर बढोतरी हुई है। वही भारत में सिर्फ़ 11 दिनों में सरकारी हेल्प लाइन के अनुसार महिला हिंसा की 92,000 शिकायतें दर्ज हो चुकी है। इसी बीच बिहार में कई घटनाएं सामने आई है। जहानाबाद में इलाज और एंबुलेंस के अभाव में एक बेबस मां अपने बच्चे को दम तोड़ते देखती रही। गया के अस्पताल में एक महिला मरीज के साथ बलात्कार की घटना। सामने आई है। उसी प्रकार खगौल में एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना सामने आई। यह बहुत हीं दु:खद और शर्मनाक है। लॉकडाउन के दौरान महिलाओं और बच्चियों के लिए सबसे अधिक खतरा वही है जहां उन्हें सबसे ज्यादा सुरक्षित होना चाहिए।
सबसे अधिक संवेदनशील तबका जो झुग्गी झोपड़ी में रहती है वह ज्यादा असुरक्षित है। वही लड़कियां व युवा साइबर क्राइम का दंश झेल रही है। राज्य महिला आयोग एंव महिला हेल्प लाईन के अनुसार बिहार में रोज करीब एक दर्जन घटना घरेलू हिंसा, यौन हिंसा, छेड़खानी का फोन पर दर्ज हो रहे हैं। वैसे में कोरोना से आम जनता की सुरक्षा के साथ साथ महिला सुरक्षा की गारंटी सरकार को तुरंत करनी चाहिए।
इसके साथ ही ईमेल में लिखा है कि पीएनपीडीटी (भ्रूण निर्धारण परीक्षण) एक्ट को जून तक के लिए ढीला करने का निर्णय लिया है जो काफी चिंता का विषय है। इसका विरोध करते हुए सीपीआई(एम) पार्टी ने भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालाय को पत्र लिख कर इसे वापस लेने की मांग की है।




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