कमाल के नेता निकले साहब, धंधा बंद करवा के भी मुनाफे का सपना देखते हो। सेना के खर्चों में से हिसाब का जुगाड़ ढूंढ रहे हो फिर भी हिसाब फिट नहीं बैठ रहा। कोरोना के लिए खर्चा-रुपइया-अठन्नी चवन्नी लेकर जनता के सामने आ जाओ जवाब मिल जायेगा।
एक चौकीदार को कितने कोट की जरुरत होती है? जवाब तैयार कर लो? बेचने की नौबत है तो खुद सामने आ जाइये? सिकेन 100 की बोली लगा देगा। जरुरत पड़ी तो 200 और 300 की भी। एक चौकीदार को साइकिल के सामने कार की जरुरत तो कभी नहीं होती फिर खुद की तस्वीर बदल लो साहब? उसकी भी बोली लिए तैयार रहेंगे। जोड़ जोड़ से चिल्लायेंगे। आवाज को फाड़ लेंगे। नहीं करेंगे अपने लाइव शो। नहीं डिमांड करेंगे 10 हज़ार की कीमत। मैनेज कर लेंगे।
एक फ़क़ीर जब अपने झोले की कीमत का अनुमान 3 दिसंबर 2016 में लगाए तो 2020 में उसकी हैसियत सिमट कैसे जाती है? प्रचार पर 2014-15 में 979.78 करोड़ रुपए कहां से लाये थे? 2019 से 2020 की तस्वीर तो साहब दिखाना भी मत नहीं तो इस देश की जनता वोट देना छोड़ देगी। आप मोदी हो। आप पीएम हो मगर आपमें अब वो बात नहीं। रिटायरमेंट ले लो साहब।

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