Tuesday, October 7, 2014

अब वक्त है कि मीडिया की जिम्मेदारी की पैमाने को बढ़ाई जाए- सिकेन शेखर
पत्रकार तरप रहा गददार पत्रकार कह ला रहा
मीडिया जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कह ले है मगर सच्चाई है कि संविधान में कही नही लिखा
मगर जरूरत है अब लिखने की
मीडिया की औकात या मीडिया की मजबूती जब कोई मरता है तो बेहतरीन Voice Over वाले अपने संवेदनशीलता को बेच कर आवाज लगाने का काम करता है
होता तो 60 प्रतिशत गवार मगर क्षेत्र में घटना घटने पर एक लौता है जो तालियाँ बजाता है , माइक लगा कर हलचल सुनाता है, अपनी जिम्मेदारी को छिपाता है, सब समझता है यह तो गरीब है इसकी घटना के पहले कोई जिम्मेदारी कहाँ कुछ नोटिस , कुछ सुझाव रावण जलने के पहले दे देता
यह तो बिन बुलाए मेहमान है
बस बाद में ही हक है
जहाँ मन किया नाच नचा दिया बाद बाकी जय राम जी की
अब वक्त है कि मीडिया की जिम्मेदारी की पैमाने को बढ़ाई जाए सरकार के द्वारा
कम से कम अच्छे लोगों को रखी जाए
गलत धंधा का शिकार कर रही है मीडिया इसे बंद की जाए

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