2015 की दिवाली में खूबसूरती की प्रकाश से कैसे जग को प्रकाशित की जाए? दरअसल सवाल है।
इस रौशनी में चमकती हुई देश और दुनिया की तस्वीर को देखना किसे अच्छा नही लगता हो. मगर यही रौशनी इस दुनिया की मौजूदा स्थिति को दरकिनार कर के प्रकाशित करे तो शायद इसकी वास्तविक तस्वीर को दबाई नही जा सकती । दिवाली के इस पावन अवसर पर फैशन इंडस्ट्री के दिग्गजों की दिवाली बेहद उम्दा और प्रभावशाली माना जा सकता है क्योंकि 'सफल फैशन डिजाइनर नाज जोशी की दिवाली हमें आज के अंधकार रूपी दिवाली से परे हो कर चुनौतियों से लड़ते हुए कैसे खूबसूरती की प्रकाश से जग को प्रकाशित की जाए इस संदर्भ में हमारे लिए प्रेरणादाय है। 'सिकेन शेखर' के साथ 'नाज जोशी' ने 2015 की दिवाली पर बेबाकी से रखी अपनी राय। पेश है विशेष अंश :
सिकेन शेखर : 2015 की दीपावली नाज़ जोशी जी के लिए कितनी खास मानी जाए ?
नाज़ जोशी : देखिये मुझे सजावट से बहुत प्यार है और शायद इसीलिए मैं डिज़ाइनर भी हूँ। इसीलिए मैं स्टाइलिस्ट भी हूँ। इसीलिए लोगों को ग्रूम भी करती हूँ। हमारा जो काम है वो इबादत है। Work is Worship.
मैं पटाखें में बिलीव नहीं करती हूँ। इससे बहुत ज्यादा प्रदुषण भी होती हैं। पैसे भी बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। मैं वो पैसे बचाती हूँ। मैं हर संडे और थर्सडे को साईं बाबा के मंदिर जाती हूँ। पैसे इक्कठा कर के वहां पर जो गरीब बच्चें होते हैं उनके साथ मैं शेयर करती हूँ। कभी- कभी मिठाई ले जाती हूँ। एक बार उनके लिए साईकिल ले गई थी। उनके कहने पर उन्हें आइसक्रीम भी खिलाती हुँ।
बच्चों से मुझे बेहद लगाओ है।
क्योंकि कही न कही मैं माँ नही बन सकती हूँ लेकिन एक माँ की जो ममता है उसे निछावर करती हूँ। तो मुझे उससे बहुत ख़ुशी मिलती है शांति मिलती हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दीपावली खुशियों का त्योहार हैं तो मैं गरीब बच्चों में बाँटती हूँ।
सिकेन शेखर : मेरे सवाल का ज़वाब नहीं मिला।
नाज़ जोशी : मुस्कुराते हुए बोली "क़्या"
सिकेन शेखर : सजावट तो सामान्य दिनों भी किया जा सकता है।
नाज़ जोशी : नहीं, लेकिन इसमें मैं एक्स्ट्रा सजावट भी करती हूँ। बहुत सारें लाइटिंग का इस्तेमाल कर के घरों को रौशनी से भर देती हूँ। वैसे तो बिल की भी चिंता होती है। फिर भी बिल की चिंता ज्यादा न करते हुए पुरे घर को रौशनी से जगमगाती हूँ।
सिकेन शेखर : नाज़ जोशी जी आपकी दीपावली को पूरी दुनिया दरअसल जानना चाहती हैं।
नाज़ जोशी : दीपावली तो तब से शुरू हो गई जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर लोगों को पहचाना है। तब से मुझे अपने में कॉन्फिडेंस आया है।
लोगों के नजरिया में बहुत बदलाव आया है देखने में। इस दीपावली मेरे अपने इंस्टिट्यूट फैशन गुरुकुल की सजावट मेरे लिए सबसे खास है। इस दीपावली के मौके पर थ्री डेज की रैंप वाक ट्रेनिंग सेशन का आयोजन कर रही हूँ। मॉडलिंग के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्र - छात्राओं को बेहद इसका लाभ मिल सकेगा।
सिकेन शेखर : दीपावली के दिन कौन सी वो खास काम है जिसे आप सबसे पहले करने वाली है ?
नाज़ जोशी : 12 बजते ही सबसे पहले तो मैं साईं बाबा को याद करने वाली हूँ। बाबा से बहुत पैसे मांगने वाली हूँ। मुझे बहुत पैसे मिले जिससे मैं गरीब बच्चों के लिए कुछ कर सकूँ। इस पैसे से एक एनजीओ चलाना चाहती हूँ। जहाँ पर गरीब बच्चें आकर के पढ़ें- लिखें। बजाए जो बच्चें भिख मांगते हैं सड़को पर। उनकी हर इच्छा को पूरा करना चाहती हूँ। इस दीपावली के मौके पर साईं बाबा मुझे इतना पावर और पैसा दें कि मैं यह तमाम चुनौतियों को एक खुशहाल ज़िंदगी में व्यतीत कर सकूँ।
उसके बाद मैं सुबह होते ही अपने इंस्टिट्यूट पर बच्चों को बुलाकर इस दीपावली के जश्न को एक दूसरे के साथ साझा हुए उन सभी बच्चों की खुशहाल ज़िंदगी के लिए शुभकमनाएं दूंगी। उसके बाद शाम में मैं फुलझड़ी जला कर खूब एन्जॉय करूंगी इस दीपावली के त्योहार को।
सिकेन शेखर : दीपावली में लोग गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं। लक्ष्मी मतलब पैसा दरअसल लोगों की मंशा होती हैँ। आपके साईं बाबा कुछ अलग नही हो जाएंगे ? गणेश जी और लक्ष्मी जी से नाराजगी तो नही हैं?
नाज़ जोशी : भगवान तो एक ही है। सबका मालिक तो एक ही है। चाहे आप गणेश की पूजा करों या लक्ष्मी की पूजा करों। मेरे ख्याल से सभी देवी- देवता एक ही हैं। मेरे जो दिल से आवाज आती है वो साईं बाबा के लिए ही आती है। मैं उनसे जो भी मांगती हूँ वो मुझे देते है और मैं सबके लिए मांगती हूँ। मैं भगवान गौतम बुद्ध को भी मानती हूँ। मुझे बेहद शांति की अनुभूति होती हैं।
सिकेन शेखर : अभी आप कह रही थी कि आपकी दीपावली तो तब से शुरू हो गई जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर लोगों को पहचाना है। आपके नजरिया से हमारे भारतीय समाज में वो कौन-कौन से लोग हैं जिनकी दीपावली का आज भी इंतजार हैं ?
नाज़ जोशी : इस भारतीय समाज में हैरानी की बात है कि लोगों को अपनी हकों के लिए भी लड़नी पड़ती हैं। वे सभी लोगों की दीपावली का आज भी इंतजार हैं जो इस वक्त न्याय, हक और अधिकार जैसी मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं।
सिकेन शेखर : आप अगर अनुमति देते है तो साथ एक गेम खेलना चाहूंगा।
नाज़ जोशी : अनुमति है।
सिकेन शेखर : बहुत- बहुत शुक्रिया।
सिकेन शेखर : मेरे पास इस वक्त 3 पटाखों की कैटेगरी है। रॉकेट, फुलझड़ी और बम। आपको पोलिटिकल चेहरों को बताना हैं जिनकी प्रोफाइल इन पटाखों से मिलती जुलती है।
नाज़ जोशी : जी अच्छा।
सिकेन शेखर : सबसे पहले रॉकेट के ख्याल से कौन सी वो पोलिटिकल चेहरा है जिनकी प्रोफाइल इस पटाखें से मिलती जुलती है?
नाज़ जोशी : अरविन्द केजरीवाल।
सिकेन शेखर : क्यों ?
नाज़ जोशी : अरविन्द केजरीवाल जी विल्कुल रॉकेट की तरह बहुत जल्दी एक्साइटेड होते है और फिर तुरंत टाये-टाये फिस हो जाते है।
सिकेन शेखर : अगर फुलझड़ी की बात करूँ तो इस ख्याल से कौन सी वो पोलिटिकल चेहरा है जिनकी प्रोफाइल इस पटाखें से मिलती जुलती है?
नाज़ जोशी : सोनिया गांधी।
सिकेन शेखर : क्यों ?
नाज़ जोशी : क्योंकि उनकी स्टाइल बेहद खूबसूरत लगती है मुझे।
सिकेन शेखर : और सबसे ज्यादा आवाज करने वाले बम के कैटेगरी में किस पोलिटिकल पर्सनालिटी को देखती हैं ?
नाज़ जोशी : नरेंद्र मोदी जी।
सिकेन शेखर : हालांकि आपके द्वारा जो मैसेज दिया जा रहा है कि मैं पटाखें में बिलीव नहीं करती हूँ। इससे बहुत ज्यादा प्रदुषण भी होती हैं। पैसे भी बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। ऐसे में बाजार से बम के ना बिकने से मोदी जी के ऊपर प्रभाव पड़ सकता है और बिहार का चुनाव भी इसका गवाह है।
नाज़ जोशी : जी। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : अगर आपकी बात करू कि आप खुद को 3 पटाखों की कैटेगरी- रॉकेट, फुलझड़ी और बम, किस कैटेगरी में आना चाहेंगी ?
नाज़ जोशी : फुलझड़ी। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : और शायद यही वजह है कि शाम में मैं फुलझड़ी जला कर आप खूब एन्जॉय करेंगी इस दीपावली के त्योहार को।
नाज़ जोशी : जी विल्कुल। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : आखिर में आपसे जानना चाहूंगा क्या कुछ दीपावली के इस खूबसूरत से त्योहार के मौके पर आप खाने वाले है ?
नाज़ जोशी : देखिये मैं अपने सबसे पसंदीदा डिशेज़ - पुरी-खीर, आलु और राजमा की सब्जी इस दीपावली के मौके पर खाने वाली हूँ।
सिकेन शेखर : नाज़ जोशी जी बहुत -बहुत शुक्रिया समय साझा करने लिए और दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं।
नाज़ जोशी : जी आपको भी।
इस रौशनी में चमकती हुई देश और दुनिया की तस्वीर को देखना किसे अच्छा नही लगता हो. मगर यही रौशनी इस दुनिया की मौजूदा स्थिति को दरकिनार कर के प्रकाशित करे तो शायद इसकी वास्तविक तस्वीर को दबाई नही जा सकती । दिवाली के इस पावन अवसर पर फैशन इंडस्ट्री के दिग्गजों की दिवाली बेहद उम्दा और प्रभावशाली माना जा सकता है क्योंकि 'सफल फैशन डिजाइनर नाज जोशी की दिवाली हमें आज के अंधकार रूपी दिवाली से परे हो कर चुनौतियों से लड़ते हुए कैसे खूबसूरती की प्रकाश से जग को प्रकाशित की जाए इस संदर्भ में हमारे लिए प्रेरणादाय है। 'सिकेन शेखर' के साथ 'नाज जोशी' ने 2015 की दिवाली पर बेबाकी से रखी अपनी राय। पेश है विशेष अंश :
सिकेन शेखर : 2015 की दीपावली नाज़ जोशी जी के लिए कितनी खास मानी जाए ?
नाज़ जोशी : देखिये मुझे सजावट से बहुत प्यार है और शायद इसीलिए मैं डिज़ाइनर भी हूँ। इसीलिए मैं स्टाइलिस्ट भी हूँ। इसीलिए लोगों को ग्रूम भी करती हूँ। हमारा जो काम है वो इबादत है। Work is Worship.
मैं पटाखें में बिलीव नहीं करती हूँ। इससे बहुत ज्यादा प्रदुषण भी होती हैं। पैसे भी बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। मैं वो पैसे बचाती हूँ। मैं हर संडे और थर्सडे को साईं बाबा के मंदिर जाती हूँ। पैसे इक्कठा कर के वहां पर जो गरीब बच्चें होते हैं उनके साथ मैं शेयर करती हूँ। कभी- कभी मिठाई ले जाती हूँ। एक बार उनके लिए साईकिल ले गई थी। उनके कहने पर उन्हें आइसक्रीम भी खिलाती हुँ।
बच्चों से मुझे बेहद लगाओ है।
क्योंकि कही न कही मैं माँ नही बन सकती हूँ लेकिन एक माँ की जो ममता है उसे निछावर करती हूँ। तो मुझे उससे बहुत ख़ुशी मिलती है शांति मिलती हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दीपावली खुशियों का त्योहार हैं तो मैं गरीब बच्चों में बाँटती हूँ।
सिकेन शेखर : मेरे सवाल का ज़वाब नहीं मिला।
नाज़ जोशी : मुस्कुराते हुए बोली "क़्या"
सिकेन शेखर : सजावट तो सामान्य दिनों भी किया जा सकता है।
नाज़ जोशी : नहीं, लेकिन इसमें मैं एक्स्ट्रा सजावट भी करती हूँ। बहुत सारें लाइटिंग का इस्तेमाल कर के घरों को रौशनी से भर देती हूँ। वैसे तो बिल की भी चिंता होती है। फिर भी बिल की चिंता ज्यादा न करते हुए पुरे घर को रौशनी से जगमगाती हूँ।
सिकेन शेखर : नाज़ जोशी जी आपकी दीपावली को पूरी दुनिया दरअसल जानना चाहती हैं।
नाज़ जोशी : दीपावली तो तब से शुरू हो गई जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर लोगों को पहचाना है। तब से मुझे अपने में कॉन्फिडेंस आया है।
लोगों के नजरिया में बहुत बदलाव आया है देखने में। इस दीपावली मेरे अपने इंस्टिट्यूट फैशन गुरुकुल की सजावट मेरे लिए सबसे खास है। इस दीपावली के मौके पर थ्री डेज की रैंप वाक ट्रेनिंग सेशन का आयोजन कर रही हूँ। मॉडलिंग के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्र - छात्राओं को बेहद इसका लाभ मिल सकेगा।
सिकेन शेखर : दीपावली के दिन कौन सी वो खास काम है जिसे आप सबसे पहले करने वाली है ?
नाज़ जोशी : 12 बजते ही सबसे पहले तो मैं साईं बाबा को याद करने वाली हूँ। बाबा से बहुत पैसे मांगने वाली हूँ। मुझे बहुत पैसे मिले जिससे मैं गरीब बच्चों के लिए कुछ कर सकूँ। इस पैसे से एक एनजीओ चलाना चाहती हूँ। जहाँ पर गरीब बच्चें आकर के पढ़ें- लिखें। बजाए जो बच्चें भिख मांगते हैं सड़को पर। उनकी हर इच्छा को पूरा करना चाहती हूँ। इस दीपावली के मौके पर साईं बाबा मुझे इतना पावर और पैसा दें कि मैं यह तमाम चुनौतियों को एक खुशहाल ज़िंदगी में व्यतीत कर सकूँ।
उसके बाद मैं सुबह होते ही अपने इंस्टिट्यूट पर बच्चों को बुलाकर इस दीपावली के जश्न को एक दूसरे के साथ साझा हुए उन सभी बच्चों की खुशहाल ज़िंदगी के लिए शुभकमनाएं दूंगी। उसके बाद शाम में मैं फुलझड़ी जला कर खूब एन्जॉय करूंगी इस दीपावली के त्योहार को।
सिकेन शेखर : दीपावली में लोग गणेश जी और लक्ष्मी जी की पूजा करते हैं। लक्ष्मी मतलब पैसा दरअसल लोगों की मंशा होती हैँ। आपके साईं बाबा कुछ अलग नही हो जाएंगे ? गणेश जी और लक्ष्मी जी से नाराजगी तो नही हैं?
नाज़ जोशी : भगवान तो एक ही है। सबका मालिक तो एक ही है। चाहे आप गणेश की पूजा करों या लक्ष्मी की पूजा करों। मेरे ख्याल से सभी देवी- देवता एक ही हैं। मेरे जो दिल से आवाज आती है वो साईं बाबा के लिए ही आती है। मैं उनसे जो भी मांगती हूँ वो मुझे देते है और मैं सबके लिए मांगती हूँ। मैं भगवान गौतम बुद्ध को भी मानती हूँ। मुझे बेहद शांति की अनुभूति होती हैं।
सिकेन शेखर : अभी आप कह रही थी कि आपकी दीपावली तो तब से शुरू हो गई जब भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में एक तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर लोगों को पहचाना है। आपके नजरिया से हमारे भारतीय समाज में वो कौन-कौन से लोग हैं जिनकी दीपावली का आज भी इंतजार हैं ?
नाज़ जोशी : इस भारतीय समाज में हैरानी की बात है कि लोगों को अपनी हकों के लिए भी लड़नी पड़ती हैं। वे सभी लोगों की दीपावली का आज भी इंतजार हैं जो इस वक्त न्याय, हक और अधिकार जैसी मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं।
सिकेन शेखर : आप अगर अनुमति देते है तो साथ एक गेम खेलना चाहूंगा।
नाज़ जोशी : अनुमति है।
सिकेन शेखर : बहुत- बहुत शुक्रिया।
सिकेन शेखर : मेरे पास इस वक्त 3 पटाखों की कैटेगरी है। रॉकेट, फुलझड़ी और बम। आपको पोलिटिकल चेहरों को बताना हैं जिनकी प्रोफाइल इन पटाखों से मिलती जुलती है।
नाज़ जोशी : जी अच्छा।
सिकेन शेखर : सबसे पहले रॉकेट के ख्याल से कौन सी वो पोलिटिकल चेहरा है जिनकी प्रोफाइल इस पटाखें से मिलती जुलती है?
नाज़ जोशी : अरविन्द केजरीवाल।
सिकेन शेखर : क्यों ?
नाज़ जोशी : अरविन्द केजरीवाल जी विल्कुल रॉकेट की तरह बहुत जल्दी एक्साइटेड होते है और फिर तुरंत टाये-टाये फिस हो जाते है।
सिकेन शेखर : अगर फुलझड़ी की बात करूँ तो इस ख्याल से कौन सी वो पोलिटिकल चेहरा है जिनकी प्रोफाइल इस पटाखें से मिलती जुलती है?
नाज़ जोशी : सोनिया गांधी।
सिकेन शेखर : क्यों ?
नाज़ जोशी : क्योंकि उनकी स्टाइल बेहद खूबसूरत लगती है मुझे।
सिकेन शेखर : और सबसे ज्यादा आवाज करने वाले बम के कैटेगरी में किस पोलिटिकल पर्सनालिटी को देखती हैं ?
नाज़ जोशी : नरेंद्र मोदी जी।
सिकेन शेखर : हालांकि आपके द्वारा जो मैसेज दिया जा रहा है कि मैं पटाखें में बिलीव नहीं करती हूँ। इससे बहुत ज्यादा प्रदुषण भी होती हैं। पैसे भी बहुत ज्यादा खर्च होते हैं। ऐसे में बाजार से बम के ना बिकने से मोदी जी के ऊपर प्रभाव पड़ सकता है और बिहार का चुनाव भी इसका गवाह है।
नाज़ जोशी : जी। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : अगर आपकी बात करू कि आप खुद को 3 पटाखों की कैटेगरी- रॉकेट, फुलझड़ी और बम, किस कैटेगरी में आना चाहेंगी ?
नाज़ जोशी : फुलझड़ी। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : और शायद यही वजह है कि शाम में मैं फुलझड़ी जला कर आप खूब एन्जॉय करेंगी इस दीपावली के त्योहार को।
नाज़ जोशी : जी विल्कुल। (मुस्कुराते हुए) .
सिकेन शेखर : आखिर में आपसे जानना चाहूंगा क्या कुछ दीपावली के इस खूबसूरत से त्योहार के मौके पर आप खाने वाले है ?
नाज़ जोशी : देखिये मैं अपने सबसे पसंदीदा डिशेज़ - पुरी-खीर, आलु और राजमा की सब्जी इस दीपावली के मौके पर खाने वाली हूँ।
सिकेन शेखर : नाज़ जोशी जी बहुत -बहुत शुक्रिया समय साझा करने लिए और दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं।
नाज़ जोशी : जी आपको भी।


1 comment:
very nice article on naaz joshi
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