Saturday, June 24, 2017

हिंदुस्तान ने मानवाधिकार के मुद्दे को बड़ी बेशर्मी से ख़बर बनाया: सिकेन शेखर


हालात बदत्तर हैं।  ख़बर और इरादा मोटिवेशनल हैं। दरअसल हिंदुस्तान में छपी यह खबर है। क्या सचमुच इनसे ही सीखने की जरुरत है? या, फिर इन्हें इस हालात से बाहर निकालने की जरुरत है? हिंदुस्तान की इस सस्ती लोकप्रियता वाली पत्रकारिता में असल मुद्दा तो नदारद है। ज़रा सोचिये स्वच्छता अभियान को कितना हाई प्रोफाइल लुक दिया गया था। यंहा तक कि गांधी का चश्मा भी इस्तेमाल हुआ तो इसी चश्मे से पीरू शर्मा और भगवानी जी की जिंदगी की स्थिति को देखने की जरुरत है। स्थिति और हालात को बदलने की जरुरत है। हिंदुस्तान ने मानवाधिकार के मुद्दे को बड़ी बेशर्मी से ख़बर बनाया है: सिकेन शेखर
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