तो आज शिक्षक दिवस है। बहुत प्लांटेड वे में देश को मैं देखता हूँ इस दिन को मानते हुए। मेरे भी कई गुरु हैं। मगर मुझे ये स्वीकार नहीं कि इस दिन की महत्व को याद करते हुए आज उन्हें याद करूँ। जब पैकेट में पैसे न हो तो कोई गुरु आपसे ये नहीं कहेगा कि 'आ जाओ बच्चे शिक्षा है अनमोल रत्न पढ़ने का तुम मेरे साथ करो जतन' आप में से बहुत लोगों को पता है मैंने अपने अकेडमी से प्रोफेशनल स्टडीज में बहुत इनडिसिप्लिन स्टूडेंट रहा हूँ।
अब आज की शिक्षा पर ही मैं आपसे बात करता हूँ। अगर कोई बोले भैया मुझे क्वालिटी एजुकेशन चाहिए लेकिन मेरे पास पैसा नहीं है? मुझे नहीं लगता है कि आपमें से शिक्षक दिवस को फैशनेबल बनाने वाले कोई शख्स आगे आएगा! मतलब उस शख्स के पास पैसा रहेगा तभी आप भी गुरु बनियेगा और उससे बात कीजियेगा और जब तक पैसा नहीं तब तक आपके नजर में वो शख्स समाज का सबसे नीचे तबके का इंसान होगा। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। आपके शिक्षकों की गलती है। उन्होंने ने तो आपको इस दिवस को कैसे मनाना है? कैसे मनाना चाहिए? इसकी शिक्षा और संस्कार शायद ही दिए होंगे? अगर दिए होते तो आज आपका हश्र पैसों के नोट पर जो चलने की जो चलन है नहीं हुआ होता। अब जब तक इन चुनौतियों को दूर करने में असफल हूँ तब तक मुझे यह दिवस आपके मायनों से समझना गवारा नहीं।
अब आज की शिक्षा पर ही मैं आपसे बात करता हूँ। अगर कोई बोले भैया मुझे क्वालिटी एजुकेशन चाहिए लेकिन मेरे पास पैसा नहीं है? मुझे नहीं लगता है कि आपमें से शिक्षक दिवस को फैशनेबल बनाने वाले कोई शख्स आगे आएगा! मतलब उस शख्स के पास पैसा रहेगा तभी आप भी गुरु बनियेगा और उससे बात कीजियेगा और जब तक पैसा नहीं तब तक आपके नजर में वो शख्स समाज का सबसे नीचे तबके का इंसान होगा। इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। आपके शिक्षकों की गलती है। उन्होंने ने तो आपको इस दिवस को कैसे मनाना है? कैसे मनाना चाहिए? इसकी शिक्षा और संस्कार शायद ही दिए होंगे? अगर दिए होते तो आज आपका हश्र पैसों के नोट पर जो चलने की जो चलन है नहीं हुआ होता। अब जब तक इन चुनौतियों को दूर करने में असफल हूँ तब तक मुझे यह दिवस आपके मायनों से समझना गवारा नहीं।
आपका दोस्त- सिकेन शेखर



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