सबसे पहले इस लिंक को ओपन कर जरा देखिये देश का नंबर 1 न्यूज़ चैनल अपने दर्शकों को क्या दिखाना चाहता है !
https://www.youtube.com/watch?v=d4dwnXCPd3c
पैसों और रसूख के दम पर खड़ी की गई इस 'ईमारत' जिसे स्कूल कहते है। यहां से सिर्फ मासूम प्रद्यूम्न की लाश ही नहीं निकली, उस शिक्षा व्यवस्था की कलई भी खुल गई जिसमें बच्चों के भविष्य के साथ मज़ाक होता है, हर दिन उनके सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होता है, मां-बाप के भरोसे का कत्ल होता है। लिहाज़ा देर से ही सही 'एक दर्दनाक हादसा हो जाने के बाद ही सही', 'परिजनों और समाज का आक्रोश फूटने के बाद ही सही', 'शासन जागा', 'प्रशासन जागा' और देश की सर्वोच्च आदालत में मामले की गंभीरता को बखूबी समझा गया।
ये वही पंक्तियाँ है जिसे 'आज तक' 'भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्यूज चैनल' के नाम पर जनता की आवाज बनकर खूब लोगों तक पहुंचाया। यह वही आज तक है जो 'सबसे तेज़' होने का ज़िक्र भी अपने पंच लाइन में करता है। इसे पढ़ने के बाद हो सकता है कि आप आज तक की चकाचौंध में इस चैनल के अंध व्यूअर बन जाए मगर आपको ऐसा करने से पहले इस मामले को समझना चाहिए। आज तक ने अपने 'स्पेशल रिपोर्ट' में फिक्शन स्टाइल में नॉन फिक्शन स्टोरी को दमदार वॉइस ओवर और म्यूजिक के दम पर खुले तौर पर कहा कि 'एक दर्दनाक हादसा हो जाने के बाद ही सही' 'परिजनों और समाज का आक्रोश फूटने के बाद ही सही' शासन जागा, प्रशासन जागा और देश की सर्वोच्च आदालत में मामले की गंभीरता को बखूबी समझा गया'' मतलब प्रद्यूम्न की हत्या को आज तक ने सही करार दिया तब जब शासन और प्रशासन ने इस मामले पर गंभीरता से कदम बढ़ाया। देखिये बहुत कुछ मैं नहीं कहूंगा मगर इन पक्तियों पर आपको विचार करना चाहिए?
आपका दोस्त
सिकेन शेखर




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