नेता ऐसा होता है जो देश को खाता है,
दीमक बनके उसको चाट जाता है।
मजहब के नाम पर दंगे कराता है,
सबको लड़ाकर पेट भरके सो जाता है।
वह खाना कहां से लाये, जो दिन भर रिक्शा चलाये,
फिर भी नेता कहलाने के लिए उसे भी खूब सताए।
किसी मां की गोद ये उजार दे,
तो किसी सुहागन की मांग की सिंदूर ये उतार दे,
कितने बहनों का दिल दुखाता है.
तो कितने खुदगर्ज़ होता है।
यह नेता अपने मतलब के लिए,
गधे को भी बाप बनाते है।
चीजे महंगी ये कराते हैं,
खुद पेट भरके खाते हैं।
जो धुप में पसीना बहाकर कमाते हैं
वो ही भूखे रह जाते हैं।
हाथ जोड़कर वोट ये मांगते हैं,
जीत जाने पर आँख चुराते हैं।
गिरगिट के जैसे रंग बदलने वाले,
झूठ बोलने से कभी न हिचकिचाते हैं।
- महजबीन खान

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nice
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