Monday, March 12, 2018

भारत की महिलाएं जो होती है वह प्यार और समर्पण के भावना के लिए जानी जाती हैं: सरिता राय

*बियॉन्ड द थर्ड ऑय द बिग कन्वर्सेशन के मंच पर समाज सेविका सरिता राय
*स्वाभिमान लोक सेवा संस्थान, ई-रेडियो और सुदर्शन न्यूज़ वैशाली के संयुक्त तत्वाधान में हुआ आयोजन
*8 मार्च 2018 को स्वाभिमान भवन में हुआ था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर द बिग कन्वर्सेशन का आयोजन  

समाज सेविका सरिता राय बियॉन्ड द थर्ड आई के द बिग कन्वर्सेशन के दौरान 
बियॉन्ड द थर्ड आई के द बिग कन्वर्सेशन के मंच पर सोशल एक्टिविस्ट सरिता राय ने अपने संबोधन में सबसे पहले इस कार्यक्रम में शिरकत की महिलाओं का धन्यवाद ज्ञापन किया।  उसके बाद एक सवाल पूछी कि कितने लोग हैं जो मुझे पहचानती हैं? तो कार्यक्रम में उपस्थित 98 प्रतिशत महिलाओं ने हाथ उठाकर जवाब दी। उसके बाद अपने संबोधन में कहीं आज मैं यहाँ ख़ुशी की बात करने नही आई हूँ बल्कि आज मैं यहाँ पर आप सभी से शिकायत करने आई हूँ। मैं एक बार पहले कहा था जिस-जिस को समस्याएँ हैं क़ानूनी तौर पर, वो मेरे पास आयेंगे ! इसके बाद अपने सवाल में पूछती है, मैंने कहा था याद है सभी को? उपस्थित महिलाएं जवाब में ‘हाँ’ कहकर उत्तर देती हैं।  फिर सरिता राय कहती है, बस दुःख इस बात की है कि आप सभी में से सिर्फ एक महिला अपनी लीगल समस्या लेकर वहां तक चलकर मेरे पास आई।  इसका मतलब यही हुआ कि हम सिर्फ बातें करते हैं। हम सिर्फ बातें बनाते हैं काम नही करते है।  मैंने जब पूछा कि कितनी महिलाएं मुझे पहचानती हैं तो बहुत लोगों ने हाथ उठाया।  लेकिन समस्या उस दिन सभी के पास थी और जब आने की बारी आई तो महिलाएं अपनी समस्या लेकर नही आई।  इसका मतलब यह कि यहाँ पर हम बातें करते हैं और वहां पर काम नही करते।  आप लोग क्यों नहीं आये इसका जवाब मुझे दीजियेगा।

बियॉन्ड द थर्ड आई ‘द बिग कन्वर्सेशन’ में सिकेन सबसे पहले सरिता राय के इस संबोधन को सुनने के बाद कानून के रखवालों की हकीकत जानने की कोशिश में सवाल किया, आपने सवाल क़ानूनी कार्यवाई को लेकर रख दिया? मतलब कानून कि स्थिति क्या है समाज में? प्रशासन क्या कमजोर नज़र आ रही है? जिससे आप लोगों को आगे आना पर रहा है? सरकार की क्या स्थिति है तमाम क़ानूनी कार्यवाई को लेकर और सबसे महत्वपूर्ण कि जब ये ग्रामीण महिलाएं किसी भी समस्या को फेस करती हैं तो सिस्टम फ्रेंडली नज़र नही आती है क्या?

इस पर समाज सेविका सरिता राय ने अपने जवाब में कहा, देखिये, कानून की बात मैं करूं तो मैं कहूंगी, खासकर भारत की महिलाएं जो होती है वह प्यार और समर्पण के भावना के लिए जानी जाती हैं तो महिलाएं जो हैं इतना प्यार और समर्पण में ग्रसित होती है कि जब उनके साथ कुछ गलत होता हैं तो उसके खिलाफ आवाज उठाने में डर जाती है और वह ख़ुद को ऐसा मान लेती हैं कि हम सिर्फ इसी के लिए जाने जाते हैं चुंकि बचपन से सिखाया गया हैं कि समर्पण रखों, प्यार रखों, तो कही न कही डर होता है जिसके वजह से चाह कर भी बोल नही पाती हैं।
समाज सेविका सरिता राय बियॉन्ड द थर्ड आई के द बिग कन्वर्सेशन के दौरान 

‘द बिग कन्वर्सेशन’ में ई-रेडियो के प्रधान संपादक त्रिनाथ मिश्र का सवाल, गवर्नमेंट के नियमानुसार चल रहे कार्यक्रम से क्या महिलाओं की स्थिति वाकई बेहतर हो रही है?  पर सरिता राय ने कहा, देखिये, अगर प्रैक्टिकल फैक्ट में कहूँ तो सरकार कोई भी आये एक्चुअल चीजे ग्राउंड लेवल पर नहीं होता हैं। यह प्रैक्टिकल फैक्ट है।  मैं किसी पार्टी की बात नहीं करती।  मैं किसी पार्टी में नहीं हूँ तो पार्टी या पॉलिटिक्स की बातें नही करूंगी।  होता क्या है कि कुछ चीजे आती है लेकिन जब उसको ग्राउंड लेवल पर करने की बात आती हैं तो वो चीजे एक्चुअल में ग्राउंड लेवल पर होता नहीं है क्योंकि ग्राउंड लेवल पर जाते नहीं हैं। स्कीम  बहुत सारी आई, अभी भी मोदी सरकार में स्कीम्स बहुत सारी  आई है लेकिन उस पर अमल करने की बात जब होती है तो ग्राउंड लेवल पर होता नहीं हैं।

‘द बिग कन्वर्सेशन’ में बियॉन्ड द थर्ड आई का अगला सवाल था कि अंतरराष्ट्रिय महिला दिवस की अहमियत को आज के दिन किस तरह से परोसने की जरुरत दिखती है? जवाब में कहा, आज की अहमियत को मेरा जो मानना है आज महिला दिवस जो है, महिला के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।  मैं अगर कहूँ तो महिला दिवस एक दिन नही होना चाहिए।  हमारा दिवस तो हर रोज है।  महिला दिवस क्या हम एक दिन मना रहे हैं? एक दिन बस हम याद करते हैं कि भाई हम भी स्ट्रोंग हैं।  ये जो दिन हैं याद करने का दिन है कि हम भी स्ट्रोंग है।

‘द बिग कन्वर्सेशन’ में अगला सवाल था कि जब आप ग्रामीण महिलाओं को देखती है तो इन्हें सशक्त करने के लिए और किस तरह के कदम उठाने की जरुरत दिखती है समाज में? जवाब में कहा, मुझे जो लगता है, मैं कई सालों से स्लम क्षेत्रों में कार्य कर रही हूँ। ग्रामीण महिलाओं को किसी चीज का पता नही होता। जैसे सेनेटरी पैड अभी हमलोगों ने सेनेटरी पैड पर हमलोगों ने जागरूकता अभियान चलाई। अभी गाँव में बहुत सारी महिलाएं हैं, जिसे सेनेटरी पैड के बारे में नही पता है तो मुझे लगता है कि जिस 2018 के ज़माने में हम आ गए हैं  ख़ुद को हम मॉडर्न बोल रहे हैं उसके पीछे देखे तो ग्रामीण महिलाओं को कई चीजों के बारे में जानकारियां नही हैं तो हमारे समाज के जो बुद्धिजीवी वर्ग के जो लोग है अगर अपने-अपने तरीकों से हर मोहल्ले में, हर महिलाओं को जागरूक करें तो मुझे लगता हैं कि देश को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं।

8 मार्च 2018 को समाज सेविका सरिता राय और बियॉन्ड द थर्ड आई के फाउंडर सिकेन शेखर द बिग कन्वर्सेशन के दौरान 
एक वाकया बताती हूँ आज से कुछ दिनों पहले मैं समस्तीपुर में काम कर रही थी। मैंने देखा, दो भाई बहन हैं।  झोपड़ी में सड़क के किनारे रहते हैं।  भीख मांगते हैं चुंकि माता-पिता जी नहीं हैं। एक दिन की बात है कि उसे जब भीख नही मिला तो बहन को भूख लगी थी। बहन बहुत छोटी है जिसकी उम्र लगभग 10 वर्ष है। बहन अपने भाई से बोली भैया मुझे बहुत जोर से भूख लगी है तो भाई ने आटा चोरी करने के लिए दुकान में गया चुंकि उसे कुछ मिला नहीं तो आटा चोरी करने के दौरान पकड़ा जाता है, फिर वहां के लोगों ने उसकी बहुत जोर पिटाई की। उस बच्चे की विडियो मेरे पास अभी भी है वह महज 12 वर्ष का बच्चा है और वह बच्चा आज पुलिस की हिरासत में जेल में हैं। वह बच्चा जुवेनाइल है। आप सोच सकते है। आज हम महिला दिवस मना रहे हैं और वह बच्ची किस हालात में है? एक बच्चा इसीलिए जेल में हैं क्योंकि आटा चोरी किया अपनी बहन को खिलाने के लिए. तो हमने समस्याओं पर बात की तो समाधान कैसे होगा? हम अभी भी सिर्फ अच्छी-अच्छी चीजों को देख रहे हैं।  बुरी चीजों पर नही जा रहे हैं और खासकर जो बैकग्राउंड में जो समस्याएँ हैं उसके तरफ नही जा रहे हैं तो समस्याएँ वही की वही रह जा रही हैं तो मैं यह चाहूंगी कि हर एक वार्ड में जहां समस्याएँ हैं वहां जाकर उनकी मदद करें और स्लम में जाकर उन्हें जागरूक करें तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।

‘द बिग कन्वर्सेशन’ में अगला सवाल था कि प्रशासन को और किस तरह से पहल करने की जरुरत को आप देखती है जिससे महिलाएं अपनी समस्याएँ को समाधान करने में सफल हो सके?

सरिता राय ने अपने जवाब में कहा, देखिये, यहाँ पर सिर्फ प्रशासन ही नहीं बल्कि, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया ये तमाम जो लोकतंत्र के स्तंभ कहे जाते हैं सभी को अपने अंदर संवेदनशीलता लाने की जरुरत हैं अगर कार्यपालिका को 12 साल के बच्चे वाले केस में संवेदनशीलता नज़र आती तो वह बच्चा जुवेनाइल नहीं कहा जाता।  वह जेल में इस वक्त नहीं होता।

‘द बिग कन्वर्सेशन’ में सरिता राय से अगला सवाल था कि देखिये, हमलोग 2018 में आ गए हैं, सामने 2019 है, मोदी लहर की जब बात होगी तो महिलाओं के सन्दर्भ में तमाम जुमलेबाजी हमें नज़र आएगी तो ऐसे में नेताओं के लिए क्या संकेत है?

जवाब में कहा, मेरा जो मानना है मैं किसी पार्टी और पॉलिटिक्स की बात नहीं करूंगी। मैं एक साधारण समाजसेविका हूँ तो सत्ता में कोई भी सरकार हों इनकी बड़ी योगदान हैं देश की विकास में और एक बात यह भी है कि आज कल नेता लोग सुख भोगने के चक्कर में ज्यादा रहते हैं तो यह जो सुख भोगने की जो दिलचस्पी है ना? तो इस दिलचस्पी से अलग हट के महिलाओं के समस्या और दर्द देखकर सही एक्शन प्लान करें।
स्वाभिमान भवन में 8 मार्च को आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिलाएं
देखिये, कई बार होता क्या हैं कि थाने जब वो एफआईआर दर्ज कराती है तो एफआईआर दर्ज होने के बाद भी सुना नही जाता है। क्यों नहीं सुना गया? क्योंकि वह संवेदनशील नहीं है। उन्होंने अपने काम को बस ड्यूटी समझ रखा है। उन्हें अपने काम के बियॉन्ड जाकर सोचना पड़ेगा। देखिये, ऑफिसर को सोचना चाहिए कि अगर मेरे एक मिनट के एक सिग्नेचर पर अगर किसी महिला का केस सुना जा सकता है तो उसके लिए हम 10 दिन का समय क्यों लगाते है? अब बताइए इसकी क्या जरुरत है जो हम समय बर्बाद भी करते है और उसे दौराते भी है? तो पार्टी पॉलिटिक्स में भी संवेदनशीलता की जरुरत है अगर एसा होता है तो अपने आप में एक समाधान है।
    
‘द बिग कन्वर्सेशन’ में सरिता राय से आख़िरी सवाल था कि जब प्रशासन की बात हो तो देश का कोई हिस्सा दिखता है जहां महिलाओं के लिए वहां का माहौल बेहतर नज़र आती है?

देखिये, मैं ख़ुद नार्थ ईस्ट से आई हूँ। मेघालय का ज़िक्र मैं करूंगी क्योंकि वहां की महिलाएं पूरी तरह सशक्त दिखती हैं। जिस तरीके से अन्य जगहों पर कई चीजें पुरुषों के नाम पर होती है। वैसे ही वहां महिलाओं के नाम पर चीजे होती है तो अन्य जगहों की तुलना में मणिपुर, मेघालय की महिलाएं  बहुत ही सशक्त हैं। हमारे यहाँ क्या है कि समाज में पुरषों की वर्चस्प अधिक है इसलिए महिलाओं की सुनी नही जाती है और जिस समाज में महिलाओं की सुनी जाती है वहां की स्थिति महिलाओं के लिए बेहतर हैं जिससे हमें सीखने की जरुरत हैं।



No comments:

Featured Post

जसबीर कविता मंच द्वारा काव्य संग्रह 'प्रकृति और भावनाएं' का विमोचन

जसबीर कविता मंच डॉ. जसबीर कौर ने 2020 में संस्थापित किया। इस काव्य मंच पर सभी कवि कवयित्री अपने मन के उद्गार व अनुभूतियां सांझा करते हैं। इस...