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| रितु सिंह (को-फाउंडर एंड वाईस प्रेसिडेंट, सशक्त नारी मंच) व् ट्विंकल कुमारी (जेनरल सेक्रेटरी, सशक्त नारी मंच) |
बियॉन्ड द थर्ड आई, स्वाभिमान लोक सेवा संस्थान, ई-रेडियो और सुदर्शन न्यूज़ वैशाली के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर द बिग कन्वर्सेशन में रितु सिंह (को-फाउंडर एंड वाईस प्रेसिडेंट, सशक्त नारी मंच) व् ट्विंकल कुमारी (जेनरल सेक्रेटरी, सशक्त नारी मंच) ने अपने सन्देश में कुछ इस तरह अपनी बातें रखी। यह कार्यक्रम 8 मार्च 2018 को हाजीपुर स्थित स्वाभिमान लोक सेवा संस्थान में आयोजित किया गया था.
एक स्त्री को परिवार की धुरी कहा जाता है पर उसी धुरी को हमारा समाज हाशिए पर रखता है। उन्हे उनके अधिकरों से वंचित रखना, आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रुप से उनका शोषण करना। हमारे समाज की स्त्रियाँ हमेशा से ये सब झेलती रही हैं और इन सब के पीछे जो मुख्य वजह है वो हैं उनकी हर परिस्थिति से समझौता कर लेने की प्रवृति। समझौते की इस प्रवृति के पीछे कारण होता हैं अशिक्षा एवं जागरुकता का अभाव।
स्त्री चाहे कोई भी हो, चाहे वो ग्रामीण परिवेश से जुड़ी हो अथवा शहरी परिवेश से हम जब भी बात स्त्री सशक्तिकरण की करें सबसे पहले आवश्यकता है महिलाओं को, लड़कियों को शिक्षित व अपने अधिकरों के प्रति जागरूक करने की। शिक्षा व जागरुकता के अभाव में नारी सशक्तीकारण सिर्फ स्वप्न मात्र होगा।
अक्सर देखा जाता है कि लड़कियाँ या महिलाएँ घर में ही अपने ही रिश्तेदारोँ के द्वारा किए गए शोषण का शिकार होती है और दुर्भाग्यपूर्ण इस डर से चुप चाप सब सहती रहती है कि 'लोग क्या कहेंगे?' और अन्तत: भयावह परिणाम सामने आता है। परंतु वास्तव में यही वक्त होता है अपने लिए, अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का, अपने साथ हो रहे गलत व्यवहारों के विरोध में आवाज उठाने का।
आज अगर आधी आबादी का एक हिस्सा चाँद तक पहुंचा है तो यह संभव हो सका है उनके स्वयं के प्रति अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने व अपने सपनों को पुरा करने की ललक, दृढ इच्छा शक्ति व संकल्प। उन्होंने अपने अंदर के डर व हिचक को पीछे छोड़ा है तभी आगे बढ पाई है। महिलाओं को सशक्त करने के क्रम में दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है आर्थिक सशक्तिकरण का जिस दिन से महिलाएँ आर्थिकरुप से आत्मनिर्भर होने लगेंगी उनकी ज्यादातर समस्याएँ स्वत: ही समाप्त हो जाएँगी।
खास बात यह है कि महिलाओं के आर्थिक सबलता हेतु हमारी सरकार भी सजग है जिसका उदाहरण है लागू की जाने वाली अनेकों योजनाएँ जो स्वरोजगार के माध्यम से समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करती है। बस जरुरत है हम महिलाओं को आगे बढने की अपने जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपने अधिकरों को भी जानने-समझने और सजगता के साथ उसका प्रयोग करने की। इस कदम के शुरूआत के साथ ही निश्चित रुप से महिलाओं के स्वर्णिम युग की शुरुआत होगी। महिलाएँ सिर्फ एक परिवार की नही वरण समाज की संसार की धुरी कही जाएगी।

2 comments:
thankful to join u ....
Nice
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