Thursday, September 26, 2019

PM साहेब इवेंट और भाषण के नशा से नहीं कुचल सकते 21वीं सदी के भारत: सिकेन शेखर


गाँधी की जयंती पर बौखलाकर देश को खुले में शौच-मुक्त घोषित कर देना मूर्खता की हदों को पार करना है मोदी जी। किसी राष्ट्र का चाहे वो कोई भी नेता हो उसके उम्र से देश के नाम के पहले वाहियात तरक्की वाले शब्दों से ही क्यों आपको अपनी नेतागिरी चमकाने की जरुरत लगती है? इस देश की हकीकत को क्यों आप अपनी वाहियात हरकतों से छिपाना चाहते हैं? विश्वविख्यात भारतीय समाजिक कार्यकर्ता एवं उद्यमी डॉ बिन्देश्वरी पाठक के बेहद करीब हैं आप हुजूर जरा उनके ही क्षेत्रों की स्थिति को देख लीजिये।



एक तरफ जहां खुले में शौच करने पर मध्य प्रदेश में दो दलित बच्चों की हत्या का मामला सामने आया है तो दूसरी तरफ मोदी सरकार 2 अक्टूबर को देश को खुले में शौच मुक्त घोषित करने वाली है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के एक गांव में पंचायत भवन के सामने शौच करने पर दो व्यक्तियों ने कथित तौर दो दलित बच्चों को लाठियों से पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना के सिलसिले में मामला दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ये मामला देश को खुले में शौच मुक्त करने के सरकार दावे की हकीकत को बयां कर रहा है। दरअसल गुजरात के उप-मुख्यमंत्री ने बुधवार को बताया कि प्रधानमंत्री 2 अक्टूबर यानि कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अहमदाबाद में देश को खुले में शौच मुक्त घोषित करने का एलान करेंगे। उन्होंने बताया कि 20,000 सरपंचों के मौजूदगी में साबरमती रिवरफ्रंट पर इसकी घोषण की जाएगी। इनमें आधे सरपंच गुजरात के होंगे तो वहीं बाकी अन्य राज्यों से आएंगे। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, केंद्र शासित प्रदेश और अन्य राज्यों के सरपंच भाग लेंगे।

उन्होंने कहा कि गांधी के स्वच्छता के सपने को सामाजिक मिशन के रूप में लेते हुए पीएम ने इस दिशा में जागरूकता पैदा करने में देश का बेहतरीन तरीके से नेतृत्व किया। एनडीए ने अपने पहले कार्यकाल में स्वच्छ भारत और शौचालयों का निर्माण बड़े स्तर पर करवाया था। शौचालयों का निर्माण विशेष रूप से बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया था।

बता दें कि इससे पहले पेयजल और स्वच्छता विभाग ने जानकारी दी है कि देश के देश के 5,99,963 गावों को खुले में शौच मुक्त बना दिया गया है। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि 699 जिलों को खुले में शौच मुक्त करने के टारगेट को 2 अक्टूबर की तय डेडलाइन से पहले पूरा लिया जाएगा। वहीं शहरी विकास मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि ‘हम बहुत जल्द ऑडिट पूरा करेंगे। ऑडिट के लिए एक कड़े सिस्टम का पालन किया जा रहा है और यही वजह है कि कुछ शहरों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) का दर्जा पाने के लिए कड़े मापदंडों का पालन करना पड़ रहा है।

देश का प्रधानमंत्री क्यों इस स्थिति में आ जाता है कि उसे हर एक दिन और दिवस को बड़े समारोह देने का नशा होता है? इस देश की दूसरी तस्वीर हमने आपको दिखाया था यहां सोने के लिए सही छत तक नहीं है और ऐसे में मोदी की नेतागिरी समारोह से महत्वपूर्ण हो जाती है। जरा उसकी भी तस्वीर आप देख ही लीजिये।
वीडियो लिंक : Khabar Nahi Kahani

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