मोदी की विदेश छवि यही है कि भारत में दूसरे देश का शख्स घुसपैठिया बन के रहने लगे और पाकिस्तान बांग्लादेश और आफ्गानिस्तान जैसे देश अपने नागरिकों को मोदी की महानता पर न बुलाये और इसके लिए अमित शाह अपने सेनाओं के साथ भारत में ग़दर करने पर देशभक्ति दिखाए तो बांग्लादेश द्वारा आये संकेत (बांग्लादेश ने भारत से अवैध नागरिकों की लिस्ट मांगी) को आपको समझना पड़ेगा।
इस देश में नेता कई बार अपने लोगों का पॉलिसी मेकिंगिंग डिसीजन से जान लेने जैसी करतूत करते हैं। अगर CAB पर निर्णय की बात की जाये तो अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 300 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
भारत में ऐसी स्थिति पैदा करने के लिए सबसे पहले मोदी सरकार पर कठोर कार्यवाई होनी चाहिए।
क्या मोदी सरकार को इस बात की जानकारी नहीं कि भारत जैसे देश में कैसे लोग रहते हैं? कितनी सामन्य उनकी जिंदगी है? कैसे वो किसी बातों को न समझते हुए भी प्रदर्शन के लिए जी जान लगा देते हैं?
मोदी की ऐसी करतूत कई बार देखने को मिली है जिसमें मोदी किसी सामन्य से मसले पर एक तरफ निर्णय लेते हैं और दूसरी तरफ आम जनता की जान सड़कों पर जाने की स्थिति बन जाती है।
नोट बंदी को याद कीजिये, इस नेता ने देश में ऐसे हालात पैदा कर दिया था जिससे नवजात बच्चे भी सड़कों से गुजरने दौरान मौत मुंह में जाने लगे थे। लगभग उस दौरान 40 लोगों की मरने की खबर एक निर्णय से देखने को मिली थी। ऐसे प्रधानमंत्री किस मानसिकता का हो सकता है इस सवाल का जवाब आपको ढूँढना चाहिए।
क्यों यह प्रधानमंत्री इस बात का निर्णय करने के काबिल नहीं कि कोई ऐसा निर्णय न हो जिससे किसी की जान किसी भी हाल में जाए।
अमित शाह के लिए घुसपैठियों का फैक्टर जिस शब्द के आगे पीछे भटक रहा है उसे फिर से जरा चश्मा निकालकर समझना पड़ेगा। जब बांग्लादेश अवैध नागरिकों की लिस्ट खुद से मांग रही है तो एक्शन लो हुजूर। एक यही काम अगर अच्छे से हो जाये तो जिस अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के डेटा पर राष्ट्रभक्ति का जुनून दिखा रहे हैं सब शांत हो जायेगा।

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