Monday, December 30, 2019

हाजीपुर सिटी में कुछ लोगों के पॉइंट ऑफ़ व्यू पर बेबाक और बेखौफ अपनी राय

हाजीपुर सिटी में कुछ लोगों के पॉइंट ऑफ़ व्यू पर बेबाक और बेखौफ अपनी राय साझा कर रहा हूँ। जिसे समझना है समझिये जिसे नहीं समझना है मत समझिये। कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने एक माहौल विकसित कर रखा है। किसी के साथ कुछ होगा तो उनके चाहने वाले उनके न्याय में खड़े होंगे। अभी ऐसा ही हाल आपने दिल्ली में भी देखा, जब तमाम बच्चे रात के वक्त दिल्ली पुलिस मुख्यालय के मेन गेट पर धरना देने के लिए तैयार नज़र आये।

अब ऐसे में आपके जेहन में एक सवाल होगा कि सिकेन क्यों किसी एक शख्स को लेकर एक कदम आगे नज़र आ रहा है? इस पर मेरी राय साफ़ है। आप मान लो किसी ने मेरी हत्या कर दिया। मैं कभी नहीं चाहूंगा कि कोई शख्स न्याय के लिए प्रदर्शन करें।

मेरे नज़र में गाँधी की भूख हड़ताल से लेकर आज के अन्ना आंदोलन जैसे वाहियात चीजों की जरुरत नहीं इस आज़ाद देश में, तब जब आप तमाम शख्स एक साथ तिरंगे के नीचे खड़े होते हो। आपके पास हर जटिल से जटिल मसले को सुलझाने के लिए पर्याप्त सिस्टम है, पर्याप्त लोग हैं फिर भी किसी को सड़क पर उतड़ना पड़ रहा है। यह वाहियात तस्वीर है। इसका सीधा मतलब है.... कोई खास शख्स इन समस्याओं में जो आमने सामने है उसके बीच संवाद नहीं हो पा रही है।

अब आप देख लो, वैशाली पुलिस के बारे में आपके जेहन में कितने सवाल है, मगर इस गर्त में डूबे शहर को देखो संवाद का कितना वीआईपी माहौल है कि संवाद हो नहीं पा रहा। अभी इस पर मैंने खास कैंपेन शुरू किया है और कोशिश करूंगा कि इसे सफल करके रहूं।

मेरा मतलब साफ़ है। अगर किसी की जान आज अपराधियों के हाथ में आ टिकी है तो पुलिस की तैयारी क्या है? क्या वह पुलिस को इतना भी एहसास है कि उसके लापरवाही के वजह से ऐसा हुआ? और ऐसा एहसास है तो जरा हिम्मत से आकर बोले कि यह मेरी गलती है और इसके लिए मुझे दंड मिलनी चाहिए।

एक आईपीएस का क्वालिफिकेशन क्या होता है साहब? यही कि जनता मरते रहे? अपराधी सर चढ़कर बोले और भैया मैं अपनी वर्दी के रंग को मेन्टेन करता रहूं तो साहब आपको समझ लेना चाहिए कि आप किसी कुर्बान हुए शख्स के लिए आईपीएस हो गए हो जो आपके सामने आज सांस लेने के भी स्थिति में नहीं है।

अब यहां सिकेन का मतलब साफ़ है कि आपको जनता का आईपीएस बनने के लिए डिग्री नहीं जनता के बीच हीरो बनना पड़ेगा। नहीं तो आपके पास डिग्री तो है ही मगर आज जनता इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं, क्योंकि आप अपना काम कर नहीं रहे हैं।

मेरा मानना साफ़ है कि साहब सिस्टम इस रूप में चलता रहे कि हर आवाज को सुनने  लिए जिम्मेदार लोग बिना किसी के बुलाबे पर आवाज सुनने के लिए आगे निकलकर आये। उसी तिरंगे के खातिर जिस तिरंगे के लिए मान और सम्मान हर किसी के दिल में हैं। बहुत दिल में बातें हैं मगर जैसे-जैसे वक्त हाथ में होगा जरूर आप सभी से साझा करूंगा। जय हिन्द। 

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