Wednesday, April 15, 2020

आपकी आवाज: आप कब आश्चर्य करेंगे? पीएम साहब बड़े आसानी से आपको गुमराह करते हैं।



#पहला_झूठ:भारत सरकार ने सही समय पर सही कदम उठा लिया।
#सफेद_झूठ! भारत में पहला केस 30 जनवरी को आया। उस समय भारत ने कुछ एयरपोर्टों पर मात्र तापमान लेना प्रारंभ किया था, न कि उपयुक्‍त स्‍क्रीनिंग करना। डब्‍ल्‍यूएचओ की तरफ से चेतावनियां आने के बावजूद ट्रम्‍प के स्‍वागत में हज़ारों लोगों को जुटाया गया।

#दूसरा_झूठ: उन्‍नत और अधिक सामर्थ्‍यवान देशों में भारत के मुकाबले अधिक कोरोना केस आये हैं और भारत ने उनके मुकाबले बहुत अच्‍छी तरह से इस महामारी का मुकाबला किया है।
#बिल्‍कुल_झूठ! भारत में कोरोना केसों का सही आकलन करना ही सम्‍भव नहीं है, क्‍योंकि प्रति दस लाख परीक्षण की दर भारत में लगभग सभी देशों से कम है। हम वास्‍तव में जानते ही नहीं हैं कि वास्‍तव में कोरोना से संक्रमित आबादी कितनी है। यह हमें सीधे मौतों से पता चलेगा कि वास्‍तव में संक्रमण का परिमाण क्‍या है।
 इसलिए पीएम ने जो आंकड़े बताये, वे सभी झूठ हैं।

#तीसरा_झूठ: आर्थिक संकट कोरोना संकट के कारण पैदा हो गया है, जिससे बचना मुमकिन नहीं था।
#सरासर_झूठ! आर्थिक संकट पूरी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में 2019 के तीसरे क्‍वार्टर से ही भयंकर रूप में प्रकट हो चुका था, कोरोना का पहला केस आने से पहले ही ऑटोमोबाइल सेक्‍टर, टेक्‍सटाइल सेक्‍टर में मन्‍दी स्‍पष्‍ट रूप से देखी जा सकती थी। कुल मैन्‍युफैक्‍चरिंग गतिविधि सिंकुड़ रही थी और वैश्विक एजेंसियों ने आने वाले साल में भारत की वृद्धि दर का आकलन पहले से कम करके चार प्रतिशत से नीचे रहने की भविष्‍यवाणी कर दी थी।कोरोना महामारी से पहले ही मोदी राज में चार करोड़ नौकरियां जा चुकी थीं।

#चौथा_झूठ: पीएम ने कहा कि ग़रीब मज़दूर और मेहनतकश उनके परिवार के समान हैं और उनकी तकलीफों को कम करने का हर प्रयास किया जा रहा है।

#बेशर्म_झूठ! सच्‍चाई यह है कि देश के गोदामों में करीब 7 से 8 महीनों के लिए पर्याप्‍त भोजन है। पर्याप्‍त बुनियादी सामग्रियां हैं। लेकिन इन खाद्य व बुनियादी सामग्रियों का सार्वभौमिक व सार्वजनिक वितरण करने का कोई एलान नहीं किया गया। लेकिन कल ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कारपोरेट घरानों को हुए आर्थिक हानि से निपटने के लिए क्‍या-क्‍या छूटें दी जायेंगी, यह बता दिया था। कारपोरेट घरानों के लिए असली ''राष्‍ट्र को सम्‍बोधन'' कल ही हो गया था। तभी यह बात बता दी गयी थी कि पूंजीपतियों को मज़दूरों को और ज्‍यादा निचोड़ने के लिए पूरी कानूनी छूट दी जायेगी।
 
#पांचवां_झूठ: सिर्फ लॉक डाउन को 3 मई तक जारी रखने से कोरोना महामारी से निपटा जा सकता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन भारत सरकार को पहले ही बता चुका है कि कोरोना संक्रमण भारत में अब जिस चरण में है, उसमें महज़ लॉकडाउन पर्याप्‍त नहीं है, बल्कि बहुत ही बड़े पैमाने पर मास टेस्टिंग, क्‍वारंटाइनिंग और ट्रीटमेंट की आवश्‍यकता है। इसके बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं और जो थोड़े-बहुत उठाये गये हैं, वे निहायत अपर्याप्‍त हैं। सभी स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ व डॉक्‍टर इस सच्‍चाई का बयान बार-बार कर रहे हैं, लेकिन इसके बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

#छठा_झूठ: कोरोना की रोकथाम पूरी तरह से जनता की जिम्‍मेदारी है और इसलिए वह ''वफादार सिपाही की तरह लॉकडाउन के सारे नियमों का पालन करे, बुनियादी सेवाएं प्रदान कर रहे लोगों का सम्‍मान करे, बुजुर्गों का ध्‍यान रखे, ग़रीबों की मदद करे'', वगैरह। लेकिन सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन के अलावा ठोस तौर पर क्‍या करे, इसके बारे में कोई बात नहीं।

जो चीज़ सबसे ज़रूरी है वे तीन काम हैं: पहला, व्‍यापक पैमाने पर मास टेस्टिंग, क्‍वारंटाइनिंग व ट्रीटमेंट; दूसरा, ग़रीब मेहनतकश आबादी के लिए सभी बुनियादी वस्‍तुओं का सार्वभौमिक व सार्वजनिक वितरण; और तीसरा, सभी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को पर्याप्‍त सुरक्षा उपकरण व टेस्टिंग किट्स मुहैया कराना, जिसके लिए स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी शुरू से ही मांग कर रहे हैं। इस बारे में पीएम के पास कहने के लिए कुछ नहीं था।

#सातवां_झूठ: पीएम ने सीमित संसाधनों का भी रोना रोया, हालांकि एनपीआर-एनआरसी करने की गैर-जरूरी और जनविरोधी प्रक्रिया चलाने के लिए ये सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं थे; हाल ही में सांसदों के वेतनों और भत्‍तों में भारी बढ़ोत्‍तरी करने में सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं थे; पूंजीपतियों को हर साल लाखों करोड़ रुपयों की छूट देने और सारे गबनकारी पूंजीपतियों को छूट देने और चार्टर्ड विमानों से भगाने में सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं थे; कोरोना महामारी फैलने के बाद 102 चार्टर्ड विमानों से धनपशुओं की औलादों को देश वापस लाने में सीमित संसाधन कभी बाधा नहीं थे।

लेकिन जब ग़रीब आबादी को इस संकट में खाना देने की बात आयी तो सीमित संसाधनों का रोना शुरू! इसी सरकार ने कल सुप्रीम कोर्ट में अपने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा सभी अस्‍पतालों का कोरोना से निपटने के लिए राष्‍ट्रीकरण करने का विरोध किया है।

#आठवां_झूठ: वैसे तो गरीबों को प्रचारमंत्री ने अपना ''परिवार'' बताया, लेकिन इन्‍हीं गरीबों के बीच भारी आबादी पर कोरोना संकट के नाम पर जो हमले हो रहे हैं, उसके बारे में पीएम के पास कहने के लिए एक शब्‍द भी नहीं था। इस रूप में भी फासीवादी गिरोह कोरोना संकट को ग़रीब मुस‍लमान आबादी को निशाना बनाने का एक अवसर बना रहे हैं। इस समय भी सीएए-एनआरसी के खिलाफ जारी जनान्‍दोलन के नेतृत्‍व के लोगों की धरपकड़ जारी है।

#नौवां_झूठ: लॉकडाउन के दौरान सभी गतिविधियों को बन्‍द करने की बात पीएम बार-बार कर रहे थे। लेकिन बुनियादी सेवाओं के अलावा और भी कई गतिविधियां जारी हैं। जैसे कि संसद सत्र न होने के बावजूद ऑर्डिनेंस के रास्‍ते चार में से तीन प्रस्‍त।

(शशि भूषण दुबे जी के द्वारा इस आवाज को बियॉन्ड दी थर्ड आई के टीम तक पहुंचाई गई है। आप भी अपनी आवाज हम तक पहुंचाएं)

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