Thursday, April 16, 2020

PM Modi साहब, कह दीजिये 'स्पेशल यात्रीगण कृपया ध्यान दें' : सिकेन शेखर बाजपेयी



मोदी सरकार के सामने मेरी यह आवाज उन लोगों के लिए हैं जिन्हें इस वक्त अपने घरों तक पहुँचने के लिए रेलवे की मदद की जरुरत है। मुझे मालूम है इन शब्दों के लिए आपमें से कई लोग मुझ पर कड़ी प्रतिक्रिया देंगे: सिकेन शेखर बाजपेयी।

रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय के नेता लोग बहुत वीआईपी हो गए हैं। आप लोग पहले फेज के लॉकडाउन में सेना के जवानों व् अधिकारियों  को यात्री समझा और फेज क्या बदला कि यात्री से स्पेशल यात्री का टैग लगा दिए।

साहब कभी अपने जनता को जनता भी समझ लिया करो। अपने विकास के टैग को गहरे रंग से भी रंगने की कोशिश किया करो। जरुरत जितनी इस देश में किसी खास यात्री का बनना है तो बना दो हर जनता को खास यात्री। मैंने अपने ब्लॉग में लिखा था कि ट्रेन की रफ़्तार भी लौटेगी मगर मैं नहीं सोचा था कि मंत्रालय इतना हद तक गिर जायेगा कि लॉकडाउन के दौरान वीआईपी ट्रीटमेंट में यात्री से स्पेशल यात्री का टैग जोड़ना पड़ेगा।  साहब, वो यात्रीगण कृपया ध्यान दें को 'स्पेशल यात्रीगण कृपया ध्यान दें' कर देना, अपने स्पेशल यात्री के लिए।

इस देश में जवान और जनता में क्यों फर्क किया आपने अपने विकास के रथ पर? ऐसा क्या था कि आप अपने 1200 जनता के साथ नहीं कर सकते थे? जो 1200 जवानों के लिए किया। आखिर देश के कई जगहों पर आपकी जनता भी तो फंसी है। क्यों फंसे लोगों के बीच अपने विकास को ललकारा है? आपने कैसे सोचा कि लोग मेरे इस बेवकूफ़ी को माफ़ कर देंगे? अरे साहब, रेलवे की मदद से क्या अपने जनता को उनके घरों के नजदीकी रेलवे स्टेशन तक भी छोड़ने की क्षमता नहीं रही आप लोगों में? और ये क्या लॉकडाउन का फेज बदलते ही 1200 जवानों को ड्यूटी पर लगाने के लिए स्पेशल यात्री का टैग देकर अपने विकास के रथ के नाम कर दिया। क्यों ड्यूटी लेना महत्वपूर्ण हो गया है?

जरा सोचो, किसने आपको नेता बनाया? किसकी वो वोट की गिनती थी जिसे चुनाव के दौरान अक्सर आप गिना करते थे जिसकी संख्या से आज नेता कहला रहे हो? साहब, जिस दौर से आप गुजर रहे हो आप दिख रहे हो कि आप अपने रीढ़ की हड्डी को संभालने की स्थिति में नहीं हो।

क्या दिल्ली से बिहार जाने वाले यात्री जो फंसे हैं उन्हें सफलता पूर्वक अपने विकास के रथ पर मेडिकल चेकअप के साथ नहीं पहुंचा सकते थे? अरे साहब, 1500 के जगह 5000 ले लेते। दिखा देते बढ़ते भारत की तस्वीर। सोशल डिस्टेंसिंग चाहिए न? आप कर देते यात्री डिस्टेंसिंग एक नए शब्द का जिक्र? दिक्कत क्या थी? मेडिकल फैसिलिटी के दम पर मुश्किल में फंसे लोगों का कर देते मदद। यहीं नहीं। हर एक राज्य में एक या दो चक्कर लगवा देते अपने ट्रेन का। हर कोई सही सलामत घर पहुँच जाता। मगर क्या किया तुमने? याद रखना। इतिहास का पन्ना तुम्हारे लिए आइना बनेगा और जब अपनी छवि देखोगे तो दिमाग में बियॉन्ड दी थर्ड आई द्वारा उठाया सवाल। जय हिन्द।

पूरी खबर पढ़ें: 

लॉकडाउन के बीच ‘स्पेशल यात्रियों’ के लिए ट्रेनें चलाएगा रेलवे, सेना के 1,200 जवानों और अफसरों के लिए होगी सुविधा

 ट्रेनों के कैंसल होने के होने के चलते फंसे हुए जवानों को ड्यूटी तक पहुंचाने के लिए रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने आपसी तालमेल के जरिए जवानों को पहुंचाने के लिए व्यवस्था बनाई।

भारतीय रेलवे ने 3 मई तक के लिए यात्री सेवाओं को कैंसल कर रखा है, लेकिन कुछ स्पेशल यात्रियों के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। ये स्पेशल यात्री कोई और नहीं बल्कि सेना के जवान और अधिकारी हैं, जिन्हें बेंगलुरु से ले जाकर देश के कई अन्य हिस्सों में स्थित उनकी पोस्ट्स पर छोड़ा जाएगा। दरअसल सेना के करीब 1200 जवान और अफसर हैं, जो बेंगलुरु में हैं और उन्हें इस महीने अपनी ड्यूटी पर तैनाती लेनी है। ये जवान 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते फंस गए थे, लेकिन अब क्योंकि लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। ऐसे में जवानों को ड्यूटी पर पहुंचाने के लिए ट्रेनें चलाने का फैसला लिया गया है।

ट्रेनों के कैंसल होने के होने के चलते फंसे हुए जवानों को ड्यूटी तक पहुंचाने के लिए रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और रेल मंत्रालय ने आपसी तालमेल के जरिए जवानों को पहुंचाने के लिए व्यवस्था बनाई। सूत्रों ने कहा, ‘जिस वक्त लॉकडाउन का ऐलान किया गया, उस दौर में ये जवान और अफसर बेंगलुरु. बेलगाम और सिकंद्राबाद में स्थित ट्रेनिंग सेंटर्स में तैनात थे, ये सभी दक्षिणी कमांड में स्थित हैं।’ इन सभी ट्रेनिंग सेंटर्स में से 300 से 500 से ज्यादा अफसरों ने अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली है और अब उन्हें ड्यूटी पर तैनात किया जाना है।

सरकारी सूत्रों के मुकाबले जवानों को पहुंचाने के लिए जम्मू तवी और गुवाहाटी के लिए दो ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। ये ट्रेनें नॉन-एसी होंगी। सूत्रों ने बताया कि उत्तरी एवं पूर्वी सीमाओं पर ऑपरेशंस की जरूरतों को पूरा करने के लिए इन जवानों को ट्रेनों के जरिए भेजा जाएगा। इसके लिए मिलिट्री स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया गया है। एक ट्रेन उत्तरी कमांड के जवानों को लेकर जाएगी, जो अंबाला से लेकर जम्मू तक तीन स्टेशनों में जवानों को छोड़ेंगी। यह ट्रेन 17 अप्रैल को चलेगी। इसके अलावा गुवाहाटी के लिए जाने वाली पूर्वी कमांड की ट्रेन 18 अप्रैल को निकलेगी, जो हावड़ा से होते हुए गुवाहाटी जाएगी।

सूत्रों के मुताबिक 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद इन जवानों को भेजा जाएगा। इन जवानों को पश्चिमी, उत्तरी एवं पूर्वी कमांड में भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ऐसे सैन्यकर्मियों को ही भेजा जाएगा, जो मेडिकली फिट हैं। हालांकि रोजाना चलने वाली ट्रेनों से उलट ये विशेष ट्रेनें कुछ स्टेशनों पर थो़ड़े ज्यादा वक्त तक रुकेंगी क्योंकि लंबे सफर पर ट्रेनें चलेगी। दोनों ही स्पेशल ट्रेनों में पैंट्री कार भी होगी। यही नहीं इन ट्रेनों को रेलवे और आर्मी की ओर से सैनिटाइज भी किया जाएगा। (आभार: जनसत्ता)

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