Monday, May 18, 2020

थैंक यू इंडिया ! टर्निंग फेज ऑफ़ इलेक्ट्रो होम्योपैथी को आपने वाकई नया टर्न दिया है: सिकेन शेखर बाजपेयी


थैंक यू इंडिया ! टर्निंग फेज ऑफ़ इलेक्ट्रो होम्योपैथी को आपने वाकई नया टर्न दिया है। 17 मई की सुबह 10 बजे से लगातार अब तक डटा हूँ और यह सिलसिला इस सुबह के साथ 18 मई की रात 11 बजे तक जारी रहेगी। मगर मकसद क्या है?



मकसद बस इतना सा है कि जिस कैंसर बीमारी को लेकर आप लोग समय और पैसा बर्बाद करते हैं, उसे लेकर अब सतर्क हो जाएं। फ़िलहाल कैंसर का जिक्र इसलिए क्योंकि मैंने कैंसर सब्जेक्ट पर इलेक्ट्रो होम्योपैथी द्वारा इलाज मरीजों का इंटरव्यू करने का मौका और जिस ख़ुशी को मैंने देखा है वह सबसे खास अनुभव रहा मेरे ज़िंदगी में।
 
खैर..... इलेक्ट्रो होम्योपैथी में 'इलेक्ट्रो' शब्द के मायने को समझने की जरुरत है। और यही शब्द हेल्थ के समक्ष चुनौती बनते वाहियात रोगों को नाश करने के लिए पर्याप्त है। इस देश में कई चिकित्सकों ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के मायने को समझने में खुद को असफल पाया है, जिन्हें अब निराश होने की कतई जरुरत नहीं है।

आज के भारत के पास इलेक्ट्रो होम्योपैथी के अनुसन्धान केंद्र भी है, तो संस्थान भी और इन जगहों से बन रही तस्वीर की अगर सफलता के बेहतर परिणाम देखना हो तो भारत के ही इंदौर में स्थित देवी अहिल्या हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का चक्कर आपको एक बार अवश्य लगाना चाहिए।



मेरी निगाहों के सामने इस वक्त तमाम देश के इलेक्ट्रो होम्योपैथी के चिकित्सक की तस्वीर है। आप सब लोग बहुत ही सामन्य सी ज़िंदगी जी रहे हैं। आप लोगों में असामन्य होने की क्षमता है। आज का भारत इलेक्ट्रो होम्योपैथी के साथ सबसे आगे है। विश्व में दूसरा कोई नहीं, न दूर है, न पास।

मगर जिस शोध का मैं जिक्र कर रहा हूँ, जिस 'गैंग्रीनॉल फोर्ट' से प्रभावित होकर मैं इन शब्दों का जिक्र कर रहा हूँ उसके इर्द गिर्द अब आपको भी खड़ा होने का वक्त है। 

याद रखियेगा, वक्त बहुत कम है। हमें एक क्रांति के सहारे आगे आना होगा। आज भारत के पास डॉ. के.पी. सिन्हा जैसे शख्सियत हैं। जिन्होंने कैंसर के सामने जिस 'गैंग्रीनॉल फोर्ट' को रखा है, ऐसा उदाहरण पूरे विश्व में कहीं नहीं हैं। फिर भी देश में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सकों की स्थिति बहुत नाजुक है। 

आज 2020 के सामने मुझे जो चुनौती नज़र आ रही है उसका जिक्र मैं यहां अपने ब्लॉग 'बियॉन्ड द थर्ड आई ' में कर रहा हूँ। वक्त मिले तो आप भी मेरी मदद कीजियेगा इस आवाज को बुलंद करने में। ताकि इलेक्ट्रो होम्योपैथी में आने वाले लोग व् इसके साथ जो इलेक्ट्रो होम्योपैथी के योगदान में भूमिका निभा रहे शख्स, इसे ड्रीम प्लान में शामिल कर इन चुनौतियों का सफाया कर सके।

मेरे नज़र में चुनौती शब्द का अर्थ बेहतर आज और कल के लिए निर्णय है। साफ़ शब्दों में कहूं तो आपकी मौजूदा समस्या से निकलने और सफलता बीच लिए जाने वाले बेहतर निर्णय जिसे आपको लेना अहम है। तो आप भी जरा समझने की कोशिश कीजिये कि आपकी क्या कुछ चुनौतियां है।

मैं अक्सर जब इंटरव्यू लेता हूँ तो इस सवाल के जरिये समझना चाहता हूँ कि आखिर आगे की क्या निर्णय है बेहतर कल के लिए? मेरे नज़र में सबसे बड़ी चुनौती जो इस वक्त इलेक्ट्रो होम्योपैथी समक्ष दिख रही है जिसके मद्देनज़र आपको निर्णय लेने की जरुरत है, वो है:

पहला: इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विकास के लिए कम्पलीट ट्रेंड चिकित्सकों का होना अत्यंत जरुरी।

दूसरा: जो इलेक्ट्रो होम्योपैथी के डॉक्टर अपने जोश और जुनून के साथ इस क्षेत्र में कुछ योगदान देना चाहते हैं, वो सिन्हा इलेक्ट्रो होम्यो अनुसन्धान केंद्र से संपर्क कर शोध सम्बंधित जानकरी पर नज़र डाले, क्योंकि इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विकास के इसी क्रम में उनके नजरिया में शोध सम्बंधित विषय पर एक बड़ी परिवर्तन का होना महत्वपूर्ण है।

शोध सम्बंधित जानकारी के लिए भारत में कई प्लेटफॉर्म है, मगर हर जगह आपको बुकिश नॉलेज बहुत मिलेंगे, प्रैक्टिकल और बेहतर इलाज के लिए सबसे बेहतर रिजल्ट सिन्हा इलेक्ट्रो होम्यो अनुसन्धान केंद्र द्वारा संचालित अस्पतालों में ही देखने को मिलेंगे।

अगर किसी शख्स को इस सम्बन्ध को कोई अन्य अपडेट हो, तो बियॉन्ड द थर्ड आई से जरूर शेयर करें। तथ्य सही पाए जाने पर सिन्हा इलेक्ट्रो होम्यो अनुसन्धान केंद्र के नाम के साथ उस संस्थान के बारे में भी जिक्र करूंगा।   

तीसरा: सम्पूर्ण भारत में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के विकास में कार्य कर रहे लोग आवर्ड और सर्टिफिकेट के नाम पर किसी भी एसोसिएशन का हिस्सा या वेवजह किसी कार्यक्रम के आयोजन में शिरकत करने के जगह मौजूदा दौर में हो रहे दवा सम्बंधित शोध व् बेहद लाइलाज बीमारी के लिए समर्पित इलेक्ट्रो होम्योपैथी के चिकित्सकों के साथ कॉन्फरेंस का हिस्सा बने, जहां पर सस्ती लोकप्रियता के जगह कार्यक्रम में विषय वस्तु अहम है।

चौथा: भारत देश में इलेक्ट्रो होम्योपैथी से सम्बंधित प्रैक्टिस कर रहे चिकित्सकों द्वारा अपने नॉलेज और अपनी समझ से पा रहे प्रैक्टिस के दौरान सफलता को सोशल मीडिया या इवेंट के माध्यम से अपने आस पास के लोगों को प्रेरित करना अहम है। 

पांचवा: चिकित्सा पद्धति सम्बंधित हर बड़ी उपलब्धि को सरकार तक आवाज पहुँचाने के साथ उसकी वास्तविक तस्वीर से सरकार को अवगत करना आदि सबसे अहम चुनौतियां है।

चलिए तो ऐसे ही कई किस्सों को लेकर चर्चा और परिचर्चा का हिस्सा बनते हैं सिन्हा इलेक्ट्रो होम्यो अनुसन्धान केंद्र द्वारा आयोजित टर्निंग फेज ऑफ़ इलेक्ट्रो होम्योपैथी के इस खास कार्यक्रम में। 

सिकेन शेखर बाजपेयी

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