Saturday, May 30, 2020

किसी ने क्या खूब कहा है, 'दिल में जिसके नृत्य भरा हो, घुंघरू भी उसके गुलाम हो जाते है': अमिता कमल

* अमिता कमल, रेडियो उद्घोषिका, आकाशवाणी, ज्ञान वाणी एफएम


डांस यानि नृत्य किसी की भावनाओं को व्यक्त करनेका सबसे अच्छा तरीका है। नृत्य के माध्यम से हम खुशी, प्यार, दुख और दर्द व्यक्त कर सकते हैं। इसके अलावा डांस, मनोरंजन और मूड को ताज़ा तरीन करने का भी अच्छा माध्यम है। अगर संगीत के बाद दिमाग को शांति पहुंचा सकता है तो सिर्फ और सिर्फ नृत्य ही है। भारत में हर त्यौहार, शादी या और कोई कारन नृत्य के बिना अधूरा माना जाता है।

"किसी ने क्या खूब कहा है, 'दिल में जिसके नृत्य भरा हो, घुंघरू भी उसके गुलाम हो जाते है'"

भारत में नृत्य की उत्पत्ति की बात करें तो कहा जाता है कि आज से 2000 हज़ार वर्ष पूर्व त्रेता युग में देवताओं की विनती पर ब्रह्मा जी ने नृत्य वेद तैयार किया, तभी से नृत्य की उत्पत्ति संसार में मानी जाती है। जब नृत्य वेद की रचना पूरी हो गई तब सबसे पहले नृत्य करने का अभ्यास भरत मुनि के सौ पुत्रों ने किया था।

29 अप्रैल के दिन समूचा विश्व अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस मनाता है। अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस की शुरूआत 29 अप्रैल 1982 से हुई। यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय थियेटर इंस्टीट्यूट की अंतर्राष्ट्रीय डांस कमेटी ने  29 अप्रैल को नृत्य दिवस के रूप में स्थापित किया।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस के लिए 29 अप्रैल को इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन आधुनिक "बेले डांस" के जनक कहे जाने वाले प्रसिद्ध फ्रांसीसी डांसर जीन जाॅर्ज नावेरे का जन्म हुआ था उन्हीं की याद में ये दिन मनाया जाता है। वे नृत्य के महान सुधारक भी थे।

जीन जाॅर्ज नावेरे ने 1760 में 'लेटर्स ऑन द डांस' नाम की एक किताब भी लिखी थी जिसमें उन्होंने डांस और उससे संबंधित विषयों पर अपने विचार बताए थे। इसके बाद इन्होंने 'लेट्स मीट द बैले' किताब लिखी जिसमें बैले के बारे में काफी कुछ बताया गया था।

पूरी दुनिया में डांस के कई प्रकार है, हर जाति और संस्कृति ने अपने हिसाब से डांस की नई शैली को जन्म दिया।  इन दिनों कई लोक नृत्य भी काफी पापुलर हो गए है जो दुनिया में हर जगह देखे जा सकते हैं। ऐसे ही कई डांस स्टाइल है जो आजकल काफी मशहूर है और जिन्होंने आज सारी दुनिया में धूम मचाई हुई है।

डांस की इस श्रृंखला में पहले बात करते हैं 'हिप होप डांस ' की

इन दिनों युवाओं के बीच ये डांस ज्यादा प्रसिद्ध है। इस डांस स्टाइल को स्ट्रीट डांसिंग भी कहते हैं। इसकी शुरुआत सन् 1970 के दशक में हुई थी और आज दुनिया में ये सबसे प्रसिद्ध डांस स्टाइल है।

सालसा की बात की जाए तो ये क्यूबा का डांस स्टाइल है। जो सबसे कामुक और जीवंत माना जाता है। इसमें एक जोड़ा एक साथ परफार्म करता है। डांस के इस स्टाइल में सबसे ज्यादा रोमांस, प्यार और फीलिंग्स को दिखाया जा सकता है। पूरी दुनिया में इसे कपल्स के बीच सबसे ज्यादा प्रसिद्ध माना जाता है। पहले इसे अमेरिकन म्यूजिक पर किया जाता था और अब लोग इसे किसी भी तरह के गाने पर करने लगे है।

अब बात करते है भारतीय नृत्य शैली कथक की ये नृत्य शैली नज़ाकत और नफासत से भरी हुई है। इस नृत्य शैली में अदाएं और मुद्राए भी होती है। भारत के 8 प्रकार के शास्त्रीय नृत्य शैली में कथक सबसे महत्वपूर्ण नृत्य शैली होती है। पुराने ज़माने में इसका उपयोग कथाओं और महाकाव्यों का वर्णन करने में किया जाता था। यह सबसे कठिन नृत्य शैली होती है जिसे बकायदा सीखा जाता है। इस नृत्य को सीखने पर कई परीक्षाएं भी देनी पड़ती है जो अलग-अलग स्तर पर होती है।

भारतीय शास्त्रीय नृत्य में कथक सबसे महत्वपूर्ण है। कथक नृत्य का इतिहास अनेक परिधियों से घिरा हुआ है। कथक शब्द का प्रयोग प्राचीन महाकाव्यों में प्राप्त होता है, कथक एकल नृत्य है, परन्तु अभिनय प्रयोगों के इस दौर  में नृत्य, नाटिकाएं तथा समूह में भी नृत्य होने लगे हैं।

पश्चिमी एशियाई देशों में बैले डांस महिलाओं के द्वारा किया जाने वाला नृत्य है। इस प्रकार इस डांस स्टाइल में शरीर के सभी अंगों को स्थिर रखकर सिर्फ पेट के निचले हिस्से को चलाया जाता है जिसे बैली यानि नाभि कहते है।

हिप्स के इस हिस्से को चलाना भी इसी शैली का एक भाग है। सलमान खान और कैटरीना कैफ की फिल्म "एक था टाइगर" के गीत 'माशल्ला- माशल्ला' में यही डांस की फाॅर्म है। इसे अरबी डांस के नाम से भी जाना जाता है। इसकी लोकप्रियता आज दुनिया भर में फैली हुई है, पश्चिम में इसकी कई शैलियों का विकास हुआ है। इन सभी डांस स्टाइल के अलावा, कई और प्रकार के डांस स्टाइल भी होते है जिनमें ज़ैज़, काॅन्टीनेंटल, भरतनाट्यम, टैप, वैलेट या गंगनम डांस प्रमुख है।

अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस को पूरे विश्व में मनाने का मुख्य उद्देश्य जनसाधारण के बीच नृत्य के महत्व को बनाए रखना और विश्व के लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित करना था जिससे लोगों में नृत्य के प्रति जागरूकता फैले।

साथ ही सरकारों द्वारा पूरे विश्व में नृत्य को शिक्षा की सभी प्रणालियों में एक उचित स्थान उपलब्ध कराना था। इसी के असर के कारण सन् 2005 में नृत्य दिवस को प्राथमिक शिक्षा के रूप में केन्दित किया गया।

2 comments:

Anonymous said...

nice

T y saheb said...

Bahut khoobsurat

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