Sunday, September 13, 2020

रघुवंश बाबू नेताओं के नेता थे: सिकेन शेखर बाजपेयी #BeyondTheThirdEye



आज सिकेन लिखेगा। नेतागिरी में कट टू कट एक्शन लेने के सामने मैंने रघुवंश बाबू को हारते हुए देखा था। जहां पर रघुवंश बाबू की जरुरत थी वहां की जनता के सामने इनकी योजना में इतनी क्षमता नहीं थी कि जनता को जमीन से 4 फुट ऊपर ऊंचाई की सैर करा सके। रघुवंश बाबू को जितना मैंने देखा ये नेताओं के नेता बहुत बेहतर थे। इनकी जनता इनके सामने जितनी विकलांग बनी है इनसे प्रभावित नेताओं से बस एक बात कहूंगा... इनके कार्य अभी अधूरे हैं। श्रद्धांजलि अर्पित अगर सच्चे मायने में करने हैं तो सड़कों पर उत्तर जाइये। मैं जिस वैशाली जिला से हूँ वहाँ के किसी भी नेता में मैंने नेतागिरी वाली क्षमता नहीं देखा। चाहे वो नित्यानंद हो या रामविलास। फर्श से अर्श तक इन्हें क्या नहीं मिला मगर साहब इंतज़ार कीजियेगा इसका जवाब मिलेगा। गोटी सेट करना ही राजनीत और राजनीति का मकसद हमेशा यहां के नेतागिरी में मैंने देखा, जिसका परिणाम यहां की विकलांग जनता की तस्वीर हमेशा मेरे सामने नज़र आती रही। बहुत कुछ संकेत मैंने आपके लिए यहां कर दिया है... निर्णय आप कर लीजिये कि इस देश में नेताओं के लिए नेता की जरुरत है या जनता के लिए नेता की? रघुवंश बाबू जब भी वैशाली की जनता को तड़पते हुए देखूंगा आपको जरूर याद करूंगा। वक्त कम है इस वजह से इस आलेख को यहां पर ही रोकना पड़ रहा है मगर इसके आगे की तस्वीर आते जाते आपसे साझा कर लिया करूंगा। जय हिन्द। सिकेन शेखर बाजपेयी।

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