ऑल इंडिया रेडियो और ज्ञान वाणी की प्रसिद्ध रेडियो जाॅकी व् उदघोषिका आरजे अमिता को डॉ. सरोजिनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड फॉर वुमन से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह का आयोजन एशियन अकादमी ऑफ आर्ट्स व् इंटरनेशनल विमेंस फिल्म फोरम के संयुक्त तत्वावधान में 17 से 19 सितंबर तक आयोजित छठा ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल के दौरान किया गया था।
इस सम्मान समारोह का आयोजन कोरोना की वजह से ऑनलाइन प्रोग्राम के माध्यम से किया गया था। यह सम्मान देश विदेश के विभिन्न क्षेत्रों तथा देश की तरक्की में विशेष योगदान देने वाली चुनिंदा महिलाओं का चयन कर उन्हें प्रदान किया जाता है।
आपको बता दें, आरजे अमिता उन चंद आरजे में से हैं जिन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं। सबसे पहले इन्हें वर्ष 2017 में लिसिनर क्लब द्वारा सम्मानित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2019 में इन्हें प्राइम न्यूज़ के एक समारोह में बेस्ट रेडियो जर्नलिस्ट के भी ख़िताब से नवाजा गया था। साथ ही वर्ष 2019 में ही इन्हें बिटियाँ गौरव अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। आरजे अमिता बिटियाँ गौरव अवार्ड से सम्मानित होने वाली पहली आरजे हैं।

आपको बता दें, डॉ. सरोजिनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड फॉर वुमन इन्हें इनके द्वारा रेडियो में 10 साल में किए गए सराहनीय कार्यों को देखते हुए प्रदान किया गया है। इस साल आरजे अमिता ने कोरोना काल में अपने यू ट्यूब चैनल 'आर जे अमिता की बात' के माध्यम से लोगों को जागरूक किया। साथ ही साथ जम्मू के एक एनजीओ ने भी इनकी आवाज़ को कोरोना अवेयरनेस के तौर पर इस्तेमाल किया था।
आरजे अमिता देश की ऐसी आरजे हैं जो रेडियो में रहते हुए प्रिंट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय हमेशा लिखती रहती हैं। रेडियो, टेलीविज़न और महिलाओं के मुद्दे पर इनकी कलम हमेशा बेबाक रूप में चलती है। साथ ही रेडियो व् टेलीविज़न के विशेष दिन को हमेशा अपने शब्दों व् अपनी खूबसूरत आवाज से स्वागत करती हैं। देश के युवाओं को रेडियो व् टेलीविज़न के हर एक ऐतिहासिक टर्न से अमिता रूबरू कराती हैं। विशेष दिन पर बियॉन्ड दी थर्ड आई के लिए भी आरजे अमिता अपनी कॉलम कंट्रीब्यूट करती हैं। हाल के दिनों पर नज़र डाले तो आरजे अमिता की कॉलम 'अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस' पर बियॉन्ड दी थर्ड आई के पाठकों पर सबसे ज्यादा छाप छोड़ी थी जिसका शीर्षक था 'किसी ने क्या खूब कहा है, 'दिल में जिसके नृत्य भरा हो, घुंघरू भी उसके गुलाम हो जाते है।'
आरजे अमिता डॉ. सरोजिनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड फॉर वुमन पाकर बेहद उत्साहित हैं। बियॉन्ड दी थर्ड आई से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुझे फिर से एक नई ज़िम्मेदारी मिल गई है जिसका मुझे ईमानदारी से निर्वहन करना है। अमिता का मानना है कि ये सब उनके मित्रों और परिवार वालों की मदद से सम्भव हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोस्तों ने उन्हें चैनल के प्रोग्रामिंग के दौरान कॉन्टेंट डेवलपमेंट में काफी मदद की और परिवार वालों ने प्रोत्साहित किया जिससे यह मुकाम मेरे लिए आसान हुआ और आखिर में डॉ. सरोजिनी नायडू इंटरनेशनल अवार्ड फॉर वुमन के लिए एएएफटी के प्रेसिडेंट संदीप मारवा व् उनकी पूरी टीम का शुक्रिया अदा किया।

2 comments:
Congrats Dear Amita Jee
Thanku ji
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