Friday, October 23, 2020

बोल जमूरे, हां मदारी, खेल दिखाएगा, पब्लिक को मजा आएगा: सिकेन शेखर बाजपेयी


नमस्कार, एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी अपनी गरिमा को नीलाम करने के लिए बिहार में दस्तक दे रहे हैं। पीएम मोदी देश के सबसे बेकार और वाहियात नेता में से एक हैं जो चुनावी अखाड़ा में जनता के साथ सबसे वाहियात हरकत करते हैं। 'सबसे वाहियात हरकत' शब्द का इस्तेमाल करना इसलिए अहम है क्योंकि पीएम कुर्सी पर बैठा शख्स अगर जनता को गुमराह करने जैसी हरकत करे तो उसे उसी रूप में जवाब मिलना जरुरी है।

अब देखिये न, अभी साहब खुद भारत में कोरोना पर ब्रांड अंबेस्डर बने हुए हैं और खुद बिहार में आकर जनता को इसकी मार मारने के लिए रैली कर रहे हैं। यह नेता अगर जनता से बना होता तो शायद यह गलती कभी नहीं करता। कोरोना पर इस नेता ने सकारात्मक कार्य क्या नहीं किया? मगर चुनाव जीतने के नशा ने पीएम मोदी को सख्त आपदा प्रबंधन एक्ट को भी तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। कोरोना पर माहौल बिगाड़ना और कानून की मर्यादा को तोड़ना भी  एक अपराध है। और आज पीएम मोदी अपराधी छवि के नेता में से एक हैं। देश का दुर्भाग्य है कि संविधान का हीरो ही संविधान का हत्यारा हो चला है। आप ऐसे नेता में किस तरह की देश भक्ति की भावना को देखते हैं? तब जब संविधान के समक्ष ही चुनौती दे बैठा है।
 
खैर, इस देश में अधूरी देश भक्ति है वरना ऐसे नेता को देश के चौक चौराहा पर सजा जैसी प्रावधान की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि कोई नेताओं के आदर्श और देश का लोकप्रिय नेता का टैग लेकर संविधान को कुचलने की हिम्मत न करें। ऐसा होने पर नेता लोगों की मानसिकता कानून पर दादागिरी करने जैसी करतूत को जन्म देगी। आपको वक्त मिले तो सोचियेगा। एक बार और सौ बार भी।

इन तमाम स्थिति में पीएम मोदी बिहार की जनता से क्या कहेंगे? कैसे कहेंगे? किन किन लाचार शब्दों के सहारे ड्रामा करेंगे इन सभी तथ्यों को जरा समझते हैं।

27 जुलाई 2017, वो दिन था जब मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी एक बार फिर से बिहार की जनता के लिए मौजूदा दौर में हो रहे विकास के नाम में एक साथ दिखी। लेकिन जरा समझिये, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में मोदी की जरुरत बिहार की धरती पर भाजपा और नीतीश की जोड़ी के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? तो इसका जवाब साफ़ है, साहब अपनी और पार्टी के 1214 दिनों की मेहनत पर जनता से रूबरू होकर ही 1825 दिनों की सत्ता अपने नाम कर सकते हैं। और इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है वो तमाम सीट जहां पर मोदी जी कदम रखते हुए खुलकर अपने भाषण से राजद और कॉन्ग्रेस पर वार करके आम जनता को अपने पार्टी के कमल निशान पर वोट करने का सन्देश देना चाहते हैं।

2020 बिहार विधानसभा चुनाव में मोदी जी 23 अक्टूबर 2020 को सासाराम, गया और भागलपुर में रैली करेंगे तो 28 अक्टूबर 2020 को दरभंगा, मुजफ्फरपुर और पटना में। 1 नवंबर 2020 को छपरा, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर में, तो 3 नवंबर 2020 को पश्चिमी चंपारण, सहरसा और फारबिसगंज अररिया में ताबड़तोड़ रैली करेंगे। 

बिहार में प्रधानमंत्री मोदी की 12 रैलियां होंगी। इन सभी रैली में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कानून की धज्जियां उड़ाते और पीएम मोदी के साथ हाथ लहराते हुए पीले पीले फूल से बने भारी भरकम माला में जनता के सामने नज़र आएंगे। हम पार्टी के नेता और वीआईपी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। 

2020 बिहार विधानसभा पर मैं कोई बात करूं इससे पहले जरा मोदी और नीतीश की जोड़ी जो पिछले 1214 दिनों की रही, उन दिनों के वादों और संकल्पों पर भी नज़र डाल ही लेते हैं।

तो याद कीजिये सबसे पहले मोदी और उनके सेनाओं के वादों को:

भाजपा के मोदी जी मेक इन बिहार के साथ डिजिटल बिहार का सपना दिखाया था। नए प्रखंड, अनुमंडल, जिले समेत प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन की बात कही थी। प्रत्येक साल 10वीं और 12वीं के 5,000 मेधावी छात्राओं को स्कूटी तथा छात्र-छात्राओं को लैपटॉप देने की बात कही थी। दलित और महादलित परिवारों को रंगीन टीवी देने का संकल्प लिया था। उच्च शिक्षा के साथ प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की बात कही थी। गरीबों को हर साल धोती और साड़ी देने का संकल्प लिया था। हर साल कृषि के लिए अलग बजट प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया था।

समय पर लोन चुकता करने वाले किसानों को ब्याज रहित कृषि लोन की बात कही थी। कृषि के लिए अलग फीडर, 12 घंटे बिजली, घरों में 24 घंटे बिजली देने के भी संकल्प लिये थे। मैं जब इस आलेख को लिख रहा हूँ तो समय 11:44, दिन गुरुवार, दिनांक 22 अक्टूबर और बिजली बिहार में गुल है। एक साल में हर गांव में बिजली पहुंचा दी जाएगी यह भी संकल्प में मोदी जी कहे थे। किसानों को आकर्षित करने के लिए उन्हें ब्याज दर मुक्त कृषि ऋण दिया जाएगा। पानी-बिजली की समस्या दूर करते हुए बीज और उर्वरकों की उपलब्धता सरल बनाई जाएगी। घर के आगे नल लगा है पानी का पता नहीं मगर मोदी जी के यह भी एक वादे थे। जब बिहार के गांव में कदम रखता हूँ तो मोदी जी की वादों के सामने मोदी जी की असल औकात एक एक कदम पर नज़र आ जाती है। 

2015 के दौर में मोदी जी सूबे में एक-एक नया कृषि व वेटनरी कॉलेज खोलने की बात किये थे। हर गांव बारहमासी पक्की सड़क से जुड़ेंगे इस बात की भी घोषणा किये थे। युवाओं को राज्य में ही रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए भी संकल्प लिए थे। गरीबों को शौचालय एवं बिजलीयुक्त पक्का मकान दिया जाएगा। 2022 तक सभी गृहविहीनों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाएगा। ये वो वादें थे जिसने मोदी जी को बिहार में दहाड़ने के बाद 157 सीट में से सिर्फ 53 सीट ही दिलाया। यह मोदी जी की असल हैसियत थी। अब जरा याद कीजिये मोदी जी द्वारा 2015 में किये वादों को और 2020 की जमीनी हकीकत को।

यह कहानी का एक हिस्सा है। अच्छे दिनों के 1214 दिनों की मोदी जी की मेहनत है। 23 अक्टूबर 2020 की तस्वीर आज सामने है। जरा निकलिए और देखिये आज के बिहार को।

22 अक्टूबर को मोदी की सेना फिर से वादें की है। फिर कहीं वोट लेकर गायब न हो जाये। 2015 के मोदी जी के वादों का चिता जल गई मगर 2020 बिहार विधानसभा चुनाव के वादों को जरा देखिये। मोदी जी अपने सेना के साथ बिहार को आत्मनिर्भर बनाने निकले हैं और आत्मनिर्भर के लिए कुछ हो उससे पहले उन्होंने संकल्प पत्र बना लिया है जिससे सत्ता की गद्दी उन्हें मिल सके। यही वो संकल्प है जिसका जिक्र मोदी जी आज से बिहारी जनता के सामने दहाड़-दहाड़कर करेंगे।

संकल्प पत्र में  पहला संकल्प है - कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बिहार की एनडीए सरकार ने देश के सामने मिसाल रखी है। अभी तक टीका बनाने वाले ने मिसाल का क्रेडिट नहीं लिया पर मूर्ख नेताओं ने जनता के सामने टीका दिलाने का मिसाल अपने नाम कर लिया है। यह मोदी की सेना है। भाजपा का संकल्प है कि जैसे ही कोरोना का टीका आई.सी.एम.आर द्वारा स्वीकृति के बाद उपलब्ध होगा, हर बिहारवासी का नि:शुल्क टीकाकरण करवाएंगे।

यहां सरकार की नियत समझिये। मोदी सरकार पहले कोरोना पर जनता को गुमराह कर रही है। यहां की जनता को कोरोना में रैली करने के लिए भीड़ जुटाने पर विवश कर रही है। सुविधा के नाम पर रैली के दौरान जनता के लिए कोई जांच की व्यवस्था नहीं है। आओ भाषण सुनो और कोरोना पर कानून तोड़ों की मुहिम में मोदी जी भी साथ दे रहे हैं मगर मोदी सेना की संकल्प देखिये सबसे पहले कोरोना पर इलाज करने की बात हो रही है।

जब इस आलेख को मैं 22 अक्टूबर को लिख रहा हूँ तब तक बिहार में 2,08,377 मामले कोरोना के सामने है। तब जब हर कोई खुली मैदान में मोदी मोदी कर रहा है। कोई जाँच की व्यवस्था नहीं। हर दिन बिना जांच के अस्पताल के दहलीज पर लगभग 1000 नए मरीज सामने आ रहे हैं। अगर जाँच की व्यवस्था जनता के घरों तक हो जाये तो मोदी को जिन लोगों का समर्थन मिला उस संख्या के बराबर देश में कोरोना मरीज की संख्या नज़र आएगी।

बिहार में प्रत्येक 10 लाख व्यक्ति पर 2,104 कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं। अगर जांच की व्यवस्था ठीक की जाये तो मौजूदा दौर में 2,73,520 कोरोना के नए मामले महज एक मिनट में हमारे सामने आ जायेंगे। और यह वो आंकड़े हैं इस राज्य में जो इस वक्त खुलेआम रैली का हिस्सा बन रही है। जिसका शिकार अब तक कई भजपा के दिग्गज नेता हो चुके हैं। आपने सुखियों में देखा भी होगा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 को लेकर रैली कर रहे भाजपा के नेता सुशील मोदी, शाहनवाज हुसैन और राजीव प्रताप रुडी कोरोना पॉजिटिव पाये गए हैं। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय की तबियत भी ठीक नहीं है। कोरोना से अब तक छोटे से बड़े दर्जनों भाजपा नेता की मौत हो चुकी है। मगर चुनाव का नशा देखिये तो मोदी जैसे नेता कानून तोड़ने पर उतारू हो चला है।

अगर बिहार पर नज़र डाले तो अब तक 1,019 लोगों की जान कोरोना से गई है जिसकी खबर ओपन डिजिटल प्लेटफॉर्म से लेकर समाचार के चैनल पर सुर्ख़ियों में लगातार तैर रही है मगर मोदी जी की क्वालिटी देखिये खुद जीत का नशा चखने के लिए मैदान में भाषण के लिए लालायित हैं। ऐसे मौत के सामने भाजपा का पहला संकल्प मौत पर ही टीका आज बन गया है।

आत्मनिर्भर बिहार के लिए भाजपा का दूसरा संकल्प - बिहार में मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित तकनीकी शिक्षा को हिंदी भाषा में उपलब्ध कराना है। मोदी जी की महानता देखिये ट्रांसलेशन जैसे चीजों को संकल्प में स्थान दे रहे हैं। इस राज्य में पांचवीं कक्षा के बच्चे के पास सरकारी विद्यालय में बेहतर शिक्षा की सुनिश्चित व्यवस्था नहीं मगर हुजूर उच्च शिक्षा पर प्रकाश डाल रहे हैं।

आत्मनिर्भर बिहार के लिए भाजपा का तीसरा संकल्प - आने वाले 1 वर्ष में राज्य के सभी प्रकार के विद्यालय, उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों में 3 लाख नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। दो दिन पहले तक इनके गठबंधन के मुखिया तेजस्वी पर चिल्ला रहे हैं पैसा कहां से लाओगे नए नौकरी वाले लोगों के लिए, अब इस संकल्प पर नीतीश कुमार कैसे अपने बयान को नया रंग देंगे उसे भी देखिएगा। तेजस्वी साहब ने भी इसी सवाल को मंच पर उठाया है। 

आत्मनिर्भर बिहार के लिए भाजपा का चौथा संकल्प - बिहार को नेक्स्ट जेनरेशन आईटी हब के रूप में विकसित करके अगले 5 वर्षों में 5 लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर उपलब्ध करना है। इन मुद्दों को लेकर आज से मोदी जी अपने रैली में दहाड़ने वाले हैं।
 
आत्मनिर्भर बिहार के लिए भाजपा का पांचवां संकल्प - स्वयं सहायता समूहों तथा माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के माध्यम से 50,000 करोड़ की माइक्रो फाइनेंस से 1 करोड़ नयी महिलाओं को स्वावलंबी बनाना है।

छठा संकल्प - 10 हजार चिकित्सक, 50 हजार पैरामेडिकल कर्मियों सहित राज्य में कुल 1 लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी के अवसर प्रदान करना है। साथ ही दरभंगा एम्स का संचालन 2024 तक सुनिश्चित भी करना है। 

आत्मनिर्भर बिहार के लिए भाजपा का सातवां संकल्प - सशक्त कृषि, समृद्ध किसान के संकल्प पर आगे बढ़ते हुए धान तथा गेहूं के बाद अब दलहन की भी खरीद एमएसपी की निर्धारित दरें करना है।

साथ ही आठवां संकल्प - ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के 30 लाख लोगों को वर्ष 2022 तक पक्के आवास उपलब्ध कराना है।

नौवां संकल्प - दुग्ध उत्पादन को लेकर कोओपरेटिव तथा कोम्फेड को प्रोत्साहित करना तथा प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निजी निवेश के लिए सुगमता प्रदान कर 2 वर्षों में निजी तथा कोम्फेड आधारित 15 नए प्रोसेसिंग उद्योग खड़ा करना है।

साथ ही दसवां भाजपा का संकल्प - प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को आगे बढ़ाते हुए सरकार अगले 2 वर्षों में इनलैंड यानि मीठे पानी में पलने वाली मछलियों के उत्पादन में राज्य को देश का नंबर वन राज्य बनाना है और आखरी संकल्प भाजपा का आत्मनिर्भर बिहार के लिए बिहार के 1000 नए FPO को आपस में जोड़कर राज्य के विशेष फसल उत्पाद जैसे मक्का, फल, सब्जी, चुड़ा, मखाना, पान, मसाला, शहद, मेंथा, औषधीय पौधों की सप्लाई चेन विकसित करना है। इससे राज्य में 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित होंगे। तो ये तमाम वो बातें हैं जिसे लेकर मोदी जी अपने रैली में जमकर भाषणबाजी करेंगे। 

अब जल्दी से नीतीश कुमार जी को समझ लेते हैं। कट टू कट बात करूं तो नीतीश कुमार ने आर्थिक हल युवाओं पर बल, घर-घर तक पक्की गली से लेकर नालियां देने की बात किये थे। अवसर बढ़ें, आगे पढ़ें, शौचालय का निर्माण करके घर का सम्मान बढ़ाने की बात किये थे। साहब ने हर घर बिजली लगातार देने की बात भी कही थी।  हर घर नल का जल देने की बात बिहार में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, मगर नल का जल कितना लोगों के काम आया यह भी एक बड़ा सवाल है।

आरक्षित रोजगार से लेकर महिलाओं का अधिकार भी नीतीश कुमार के सात निश्चय में सम्मलित था, मगर बिहार के लिए यह नेता कितनी ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाया उसकी तस्वीर आप ग्राउंड लेवल पर साफ़ तौर पर देख सकते हैं। सड़कों पर विद्यार्थी 5 वर्षों में भी स्नातक की शिक्षा लेने में असमर्थ है। प्रदेश का ऐसा हाल करने के लिए नीतीश कुमार को चौराहे पर क्या सजा मिलनी चाहिए इस पर भी बात कीजिये।
 
यह नेता खुद को बहुत प्रोफेशनल समझता है। जनता के दुःख दर्द में वीआईपी निर्णय करता है और जब वोट लेने की बात होती है तो जनता के सामने खाली हाथ खड़ा हो जाता है। नीतीश कुमार जैसे नेताओं से एक बात कहूंगा दो टूक में अगर विकास पुरुष हो, हर दिन बिहार के हित में कार्य किये हो, जनता समस्या पर अपने दफ्तर में बैठकर निर्णय लेने की क्षमता रखते हो तो चुनाव के समय दफ्तर से ही वोट बटोरने की हैसियत का निर्माण कर लेते तो समझ जाता कि वही गट्स है बिहार को नये दिशा में ले जाने की।

खैर, इन पहलुओं पर कोई बातें नहीं करूंगा। क्योंकि जमीन पर जब भी कदम रखता हूँ तो सामान्य सामान्य सी योजनाओं में बड़ी लापरवाही दिखती है और उसकी तस्वीर भी कई बार मैंने आपको दिखाया है।  

इन सभी हालातों के बीच आज से हो रहे रैली में मोदी जी क्या बोलेंगे? उनके पास वो कौन कौन से मुद्दे हैं जिसके जरिये अपनी पागलपन और बौखलाहट बिहार के फुटपाथ पर के लोगों पर उतारेंगे? इन मुद्दों को जरा समझिये। और इस बात को भी मान लीजिये कि मोदी वही शख्स हैं जो बिहार के लोगों को सबसे ज्यादा मूर्ख समझते हैं।

यहां के ग्राउंड में सबसे ज्यादा नौटंकी करते हैं। बिहारी लोगों के बीच अनाफ सनाफ बातें करते हैं। यह नेता ऐसे भाषण देता है जैसे यहां की जनता एकदम रोड छाप है और सिकेन शेखर बाजपेयी की बातों पर यकीन नहीं है तो आज की भाषण को जरा ध्यान से सुन लीजियेगा। 2015 की वादों पर यह नेता कितना खड़ा उतरा उस पर भी सुन लीजियेगा कि सम्बोधन से कैसे सारे तथ्यों को गायब करके यह नेता आपको 1990, 1995, 2000 के राजद दौर में  लेकर जायेगा।
 
यह नेता खुद को इतना बेशर्म साबित करेगा कि अपने हर एक 2015 के वादों को भुलाकर 2020 में खुद की जीत सुनिश्चित है इस पर ताल ठोकेगा। बिहार की लहर को विकास की लहर से जोड़कर यह नेता जनता के सामने जनता के कष्ट पर अपना नंदन-वंदन और अभिनन्दन करेगा।

जब यह नेता सासाराम की धरती पर होगा तो वहां की आम जनता को राजा कहेगा और फिर कहेगा कि यहां के राजा तो दिल्ली पर शासन करने का इतिहास रचा है और फिर से राष्ट्रहित में शासन करने लिए वहां की आम जनता को भाजपा और नीतीश कुमार की जोड़ी पर बटन दबाने के लिए प्रेरित करेगा। सासाराम यानि कि रोहतास की धरती ने मोदी को पिछले बार एक सिंगल सीट भी नहीं दिया जिसकी बौखलाहट मोदी जी के भाषण में साफ़ तौर पर दिखेगी। मोदी पिछली बार यहां 4 सीट में से एक सिंगल सीट भी अपने नाम नहीं कर पाए जिसका नतीजा यह हुआ कि साहब इस बार वहां सिर्फ 2 सेना को ही चुनाव-ए-जंग में उतारने में सफल हुए। सासाराम की धरती से रोहतास के सभी 7 विधानसभा सीट पर मोदी अपनी वाहियात भाषण शैली के सहारे राजद पर सबसे गंदा प्रहार करेंगे।

गया की धरती पर राजद के समर्थन में वोट पड़ने पर यह नेता आतंक और भय का माहौल सबसे ज्यादा विकसित करेगा। राजद और अपने विपक्षी पार्टियों पर यह नेता अपने गंदे राष्ट्रभक्ति का ज़हर उगलेगा। यह नेता हर वो बेशर्म कोशिश करेगा जिससे पवित्र स्थल गया इस नेता के जुबान से ही अपवित्र हो जायेगा।

और जब वहां की आम जनता इसके राग में मोदी मोदी करेगा तो गया को बचाने की बात करेगा। जैसे गया की हत्या कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल कऱ रहे हो। गया की धरती को यह नेता बिहार की उदय का प्रतिक साबित करके वहां की आम जनता को लुभाने की कोशिश करेगा। गया की आम जनता की समस्या को दरकिनार करके बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए की तय जीत पर भारत माता की जय जयकार करेगा।

यह नेता मोदी सरकार में विकसित गया की अंतर्राष्ट्रीय पहचान को भी पुनः परिभाषित करेगा। पीएम मोदी के 12 रैलियों में गया ही वह जगह होगा जहां सबसे ज्यादा मोदी जी अपनी बेशर्मी की सीमा लांघने की कोशिश करेंगे। मोदी के लिए भाजपा की वहां 4 सीटें हैं। पिछली बार इनके 2 विधायक जीते तो 2 हार गए थे। इस बार मोदी जी अपने 4 सीट के साथ अपने सहयोगियों के लिए भी जीत सौ प्रतिशत हासिल करने की बात करेंगे। मतलब 10 में 10 सीट पर जीत तय को लेकर जनता के साथ ताल ठोकेंगे।

जब यह नेता भागलपुर की धरती पर होगा तो राज्य और केंद्र सरकार द्वारा विकास के लिए किये जा रहे कार्यों का जिक्र करके भागलपुर की जनता को गुमराह करेगा और भागलपुर में अगर किसी ने विकास किया है तो उस नाम के साथ भारतीय जनता पार्टी का नाम जोड़ने की कोशिश करेगा।

भागलपुर मोदी के लिए ऐसा जगह है जहां मोदी  की सबसे ज्यादा पसीना छूटने वाली है। 2015 में साहब के 4 विधायक हिम्मत जुटाए थे भागलपुर की धरती से बिहार विधानसभा पहुंचने की, मगर वहां की वही जनता थी जिसने भाजपा की एक नेता को भी विधायक का टैग नहीं लगने दिया। इस बार भी साहब वहां अपने 4 सेना के लिए विपक्षी पार्टियों पर भाषण का ज़हर उगलेंगे और सहयोगियों समेत 7 विधानसभा सीट पर जीत हासिल करने के लिए पूर्वानुमान पर ही जीत का झंडा गाड़ेंगे।

28 अक्टूबर 2020 को मोदी जी अपनी पहली भाषण की शुरुआत दरभंगा की धरती से शुरू करेंगे। वही दरभंगा जिसका जिक्र मोदी जी ने अपने संकल्प पत्र में एम्स के साथ चौड़ा होकर किया है। गांव में किसी बेवकूफ लड़का को अगर तिलक मिल जाता है तो चर्चा ऐसे लोग करते हैं जैसे क़यामत हो गया हो। वही हाल मोदी जी दरभंगा पर करने जा रहे हैं। दरभंगा को दूल्हा बनाकर मोदी जी एनडीए के खाते में 10 सीट की भीख मांगने वाले हैं।

मोदी जी अपनी पीएम की छवि को सबसे ज्यादा इसी शहर से हिलाने वाले हैं। आप सभी लोग ध्यान जरूर दीजियेगा उनके भाषण पर। पिछले बार मोदी जी के 4 सेना इस जमी पर मात खा गई थी। इस बार भी 6 सेना के साथ अपने रण में हैं। नीतीश और मोदी के सामने तेजस्वी की पार्टी आमने सामने है। इसके साथ ही इसी दिन दरभंगा के बाद मोदी जी मुजफ्फरपुर में बौखलाने वाले हैं।

पिछली बार 2015 में इन्हें 6 सीट पर मात मिली थी। इस बार अपने जादू को यहां के लोगों पर जमकर चलाना चाहते हैं। 11 सीटों पर एनडीए के नेताओं के जीत के लिए मोदी जी जनता के सामने अपनी बेशर्म दाग पर क्रीम लगाने वाले हैं। मुजफ्फरपुर वही शहर है जिसे नीतीश और मोदी के नेतागिरी ने सबसे ज्यादा चोट किया है। स्वास्थ्य को लेकर हो या सुरक्षा को लेकर इन नेताओं ने सबसे ज्यादा इस शहर की गरिमा को धूमिल किया है। आखिर मोदी अपनी बेशर्म छवि को कैसे इस शहर में वोट और विपक्षी पर चोट के सामने विकसित करते हैं यह देखना सबसे दिलचस्प होगा। क्योंकि यही वह शहर है जिसे लेकर नीतीश कुमार पर सबसे ज्यादा सवाल उठा, मगर नीतीश इतने बेशर्म नेता निकले कि सबसे समझौता करके पाप का अपने नीति और नियत में सहारा लिया। नीतीश की छवि यहां साफ़ खत्म हो जाती है। 2015 में यहां पर राजद के खाते में 6 सीट दर्ज हुए थे तो 9 में से सिर्फ 3 सीट ही भाजपा के हाथ लगी थी। जरा सोचिये, जिस जगह पर मोदी जी को अपने हैसियत के दम पर 6 सीट पर मात मिली थी वह मोदी जी स्टार प्रचारक और प्रधानमंत्री के हैसियत से क्या क्या यहां ड्रामा करेंगे। इंतज़ार कीजियेगा हर चीज आपको भाषण में दिखने वाली है। 

28 अक्टूबर 2020 की दिन की आखरी रैली मोदी जी पटना की जमी पर करेंगे। वही पटना, जहां मोदी जी ने 2015 में नीतीश कुमार पर ऐसे वार किया था जैसे नीतीश कुमार कीचड़ के कीड़ा हो। आम चुनाव 2014 की जीत ने मोदी जी को ऐसा कॉन्फिडेंस दिया था कि साहब ने पटना में आकर 2015 का बिहार चुनाव को भी अपने नाम कर लिया था। मोदी की पार्टी जिसने वर्ष 2015 में 157 में से सिर्फ 53 सीट लेकर आई उस पार्टी की कॉन्फिडेंस को अगर आप याद करेंगे तो मोदी जी को चुनाव का माहौल और मौसम अपने खेमे में दिखता था।

पटना की वही भाषण थी जिसने मेरे जहन में मोदी की एक वाहियात छवि विकसित किया था। मोदी के शब्दकोश में उस वक्त भाजपा एक आंधी थी, जिसे बारिश भी भीगा नहीं पा रही थी और हकीकत मात्र 157 में 53 सीट मोदी के नाम पर।

नीतीश कुमार पर मोदी की एनालिसिस यही थी कि बिहार की जनता इन्हें नहीं स्वीकार करने वाली। यह साहब एसी रूम में पत्रकारों के साथ ज़हर उगलते हैं। इनके घमंड सातवें आसमान पर है और हम तो प्रधानमंत्री के हैसियत से सेवा करते हैं और हिसाब लेकर जनता के बीच जाते हैं।

मोदी जब 2015 में नीतीश के सामने कदम रखे थे तो अपराध के आंकड़े अपने भाषण में रखे थे और उन्हीं आंकड़ों के जरिये नीतीश कुमार की सरकार को जंगलराज कहा था। तब वर्ष 2015 था और मोदी के लिस्ट में जो आंकड़ा था वो जनवरी महीने का था। उस वक्त गंभीर अपराध के कुल मामले 13808 थे। और दूसरा आंकड़ा जो मोदी जी ने पेश किया था वो जून 2015 का था जो 18564 कुल अपराध के मामले थे।

मोदी अगर सच्चे नेता होंगे तो इसी अवतार को ज़िंदा रखेंगे। और एक बार पुनः इस वर्ष के भी जनवरी और जून के आपराधिक मामले को बिहार की जनता से साझा करेंगे। अगर मोदी ऐसा नहीं करते हैं तो सिकेन इन आंकड़ों को पहले ही आपसे साझा कर दे रहा है।

भाजपा और नीतीश जी की जोड़ी में वर्ष 2020 जनवरी में जो गंभीर अपराध के मामले आये उसकी संख्या है 20467 और इसके साथ जून 2020 पर नज़र डाले तो कुल गंभीर अपराध के मामलों की संख्या 23595 है। अब इस सवाल का जवाब कौन देगा? 2015 में तो मोदी जी नीतीश के विरुद्ध बयान दिए तो जंगलराज कह दिया और आज इतने बढ़े आंकड़ों पर क्या रामराज है? तब जब मोदी और नीतीश दोनों साथ हैं। ये कैसी नेतागिरी है? क्या यह बेहूदगी नहीं है? कि आज के जंगलराज को मोदी रामराज कहे? क्या मोदी इसी टाइप के नेतागिरी में अपना दिमाग चलाते हैं? क्या इतना इनका स्तर गिरा हुआ है? अपनी शक्ल कभी आईने में इन्हें दिखती है या नहीं? मोदी के सामने देश के पत्रकार अगर इन्हें इनकी शक्ल दिखाने शुरू कर दें तो यह नेता कभी बिहार की धरती पर भाषण देने के काबिल नहीं रहेगा। क्योंकि भाषण की गरिमा को भी शर्मशार कर देते हैं साहब।

यही नेता है जिसने गांधी मैदान पटना से अपराध पर वर्ष 2015 में नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि सामान्य मानवी के लोग बिहार में सुरक्षित नहीं है। और यही नेता आज जब नीतीश के साथ है तो अपराध के इतने मामले पर सामान्य मानवी के लोग सुरक्षित नज़र आते हैं इस हुजूर को।

खैर, मोदी की यही स्तर है। हर मोड़ पर यह नेता ऐसे ही बेनकाब होता है अपने भाषण को लेकर। इन बातों का जिक्र इसलिए किया क्योंकि पटना में चुनावी गर्मी कुछ ज्यादा ही मोदी जी को लगती है। इस बार पटना में इनके पार्टी के 10 प्रत्याशी मैदान में चुनाव लड़ रहे हैं और कुल सीटों की संख्या 14 है। पिछले बार वर्ष 2015 में मोदी जी जब ज़हर उगले तो 7 सीट अपने पार्टी के नाम किये थे। इनके 3 नेता मात खाये थे। इस बार यह गर्मी इन्हें किस मोड़ पर ले जाएगी इसका न मुझे अनुमान है न आपको।

मगर फिर भी नज़र बनाये रखियेगा। यह नेता हर मर्यादा को लांघने की कोशिश करेगा। आप लोग उस दौर से बाहर निकलिए कि राजनीति में यह सब होता है। आप क्या इतने मूर्ख हैं कि कोरोना में लोग मौत की बाजी लगाकर यहां भाषण सुनने आएंगे और मोदी जी दो कौड़ी की बात करेंगे और आप कहेंगे  ये सब चलता है। तो सुन लीजिये यह सब नहीं चलता है। मोदी प्रधानमंत्री हो या रोड छाप कोई नेता, उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर कोई नेता इतने घटिया सोच के साथ लोकतंत्र का मजाक बनाएगा, जमूरा बनेगा तो उसे सिकेन शेखर बाजपेयी एक नहीं सौ बार बेनकाब करेगा।

1 नवंबर को मोदी जी छपरा की धरती पर अपने 6 सेना को जीताने के लिए भाषण में भोजपुरिया रंग का इस्तेमाल करेंगे। पिछले चुनाव में साहब के पास 8 सेना थी। जिसमें 6 सेना मात खा गई थी। जिसका असर ये हुआ कि 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश जी सिर्फ 6 सेना उतारने के लिए ही मोदी जी से कहा है।

सारण में विधानसभा के कुल 10 सीटें हैं। जिसे जीतने के लिए मोदी जी क्षेत्र का विकास न होने की वजह राजद पार्टी को वोट देने की गलती बताएँगे। लोगों को ठेठ भाषा में मोदी सरकार और नीतीश सरकार द्वारा विकास करने की रफ़्तार को समझायेंगे। लोगों को राजद को गलती से भी वोट न करने की सलाह देंगे। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रवासी श्रमिकों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की रोजगार गारंटी योजना का जिक्र करेंगे। कोरोना वायरस की वजह से लागू लॉकडाउन के बीच बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने गांवों को लौटे थे और वहां उन्हें रोजगार की समस्या आ रही थी। जिसे मोदी सरकार ने प्रवासी मजदूरों को सशक्त बनाने के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत की इसे भी मोदी जी ताल ठोककर लोगों के हित में उन्होंने कार्य किया उसे साबित करेंगे।

पूर्वी चंपारण जब मोदी जी कदम रखेंगे तो इनका सीना सबसे ज्यादा चौड़ा दिखेगा और सभी 12 सीटों पर एनडीए के प्रत्याशियों को जनता जीत दिलाये इसके लिए मोदी जी की पूर्ण भरोसा जनता पर है इसका जिक्र करेंगे। पिछले विधानसभा में मोदी जी के झोली में 7 सीटें आई थी। इनके 3 नेता चुनाव में इस जगह पर मात खाये थे। इस बार इनके पार्टी से 10 प्रत्याशी चुनाव-ए-जंग में किस्मत आजमा रहे हैं और उन सभी की जीत सुनिश्चित हो इसके लिए मोदी जी जनता को लुभाने की कोई कोशिश नहीं छोड़ेंगे। 

1 नवंबर 2020 को मोदी जी की इस दिन की आखरी रैली समस्तीपुर में होगी। समस्तीपुर में अपनी सबसे ज्यादा जोर मोदी जी लगाने वाले हैं क्योंकि पिछले बार साहब खाता भी नहीं खोल पाए थे। इनके 4 सभी प्रत्याशी बगैर लड्डू खाये ही मोदी मोदी के राग अलापते नज़र आये थे। इस बार मोदी जी के 3 प्रत्याशी मैदान में हैं, मगर एनडीए समस्तीपुर के सभी 10 सीटों पर अपनी जीत दर्ज करें इस विश्वास को जनता से कायम रखने की अपील करेंगे।

समस्तीपुर की धरती पर मोदी जी कांग्रेस को बेनकाब करने के लिए जनता के साथ मूर्खों जैसी बात एक बार फिर करेंगे। समस्तीपुर की जनता से बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की हर एक अपील और संकल्पों को प्रतिज्ञा के रूप में लेने का आवाहन करेंगे और इस मकसद को पूरा करने के लिए भाजपा और नीतीश कुमार को सत्ता में बनाये रखने के लिए जमूरे की तरह जनता के साथ राजद और कांग्रेस पर संवाद के जरिये हमला करेंगे। 

3 नवंबर 2020 को मोदी जी आत्मनिर्भर बिहार के लिए जमकर दहाड़ लगाएंगे। सकारात्मक और जमूरे वाले अदा में कॉमेडी करते हुए अलूल जलूल तथ्यों के सहारे पश्चिमी चंपारण के भोले भाले लोगों पर जादू चलाएंगे। राजद के परिवारवाद से लेकर कांग्रेस के भ्र्ष्ट नीति पर साधारण मानवी के लोगों पर शब्दों से नया रिश्ता स्थापित करेंगे। मोदी जी के लिए यह प्राण और वचन पर आन की रैली होगी। जैसे एक नौटंकीबाज को नौटंकी करने के लिए भेजा जाता है तो वापस आते वक्त उसे अपना कोई ठिकाना नहीं होता। बिलकुल वैसा ही हाल मोदी जी का यहां होने वाला है। इनकी जुबान से लेकर बॉडी लैंग्वेज सब बेकाबू होने वाला है।

बिहार में एक साधारण से चुनावी रैली में मोदी जी अपनी आपा इस तरह खोने वाले हैं जैसे इनकी गद्दी साफ़ खसक गई हो। पश्चिमी चंपारण द्वारा भाजपा के प्रति पूर्व योगदान पर मोदी जी अपने भाषण में गौरव गाथा भी गर्व से देश की जनता के समक्ष रखने वाले हैं। 9 विधानसभा की सीट पर मोदी जी के पार्टी के 7 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, हालांकि पिछले बार यहां इनके 8 प्रत्याशी मैदान में थे जिसमें 3 को मात मिली थी और 5 नेता विधायक का ठप्पा लगाने में सफल हुए थे। राजद पिछली बार इस जगह पर खाता भी नहीं खोल पाई थी जिससे मोदी जी को लगता है कि कांग्रेस को आसानी से इस जमी पर पटकनी दी जा सकती है। यही सोच मोदी जी की विश्वास को 9 में से 9 सीट पर जीत दर्ज करने के लिए एक बार फिर से अनाफ सनाफ शब्दों के जरिये जमूरा बनने पर विवश करेगा। 

3 नवंबर 2020 को ही मोदी जी सहरसा की धरती पर कदम रखेंगे और अपने पार्टी के 2 विधायक की आवाज बनने की कोशिश करेंगे। पिछले विधानसभा चुनाव में साहब को एक सीट भी हाथ नहीं लगी थी, इसलिए राजद के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए कुल 4 विधानसभा की सीट वाली सहरसा की धरती पर अपना दमखम भाषणबाजी के जरिये दिखाएंगे।

इसके साथ सहरसा में सहरसा को मजेदार शब्दों के जरिये कभी श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के संस्थापक डॉ मंडन मिश्र का जिक्र करेंगे तो शुरुआती भाषण के दौर में आदि शंकराचार्य के नाम लेकर वहां की जनता को नंदन-वंदन और अभिनन्दन करेंगे। सूर्य मंदिर एवं प्रसिद्ध माँ तारा स्थान के जरिये भी साहब अपने भाषण को मजेदार बनाएंगे। साथ ही सहरसा को पर्यटन स्थल के चश्मा से मोदी जी इसी चुनावी माहौल में देखेंगे। 

3 नवंबर 2020 और बिहार विधानसभा 2020 की आखरी चुनावी रैली मोदी जी प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार फणीश्वरनाथ रेणु की कर्मभूमि अररिया की धरती पर करेंगे। आगे मैं कुछ लिखूं उसके पहले मोदी जी भी मिनिस्टर हैं तो ऐसे में फणीश्वरनाथ रेणु जी की 'मिनिस्टर मंगरू' कविता को पढ़ते चलते हैं, फिर मौका मिले या न....?

'कहाँ गायब थे मंगरू?'-किसी ने चुपके से पूछा।
वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था।
बताया काम अपने महकमे का तानकर सीना-
कि मक्खी हाँकता था सबके छोए के कनस्टर का।

सदा रखते हैं करके नोट सब प्रोग्राम मेरा भी,
कि कब सोया रहूंगा औ' कहाँ जलपान खाऊंगा।
कहाँ 'परमिट' बेचूंगा, कहाँ भाषण हमारा है,
कहाँ पर दीन-दुखियों के लिए आँसू बहाऊंगा।

'सुना है जाँच होगी मामले की?' -पूछते हैं सब
ज़रा गम्भीर होकर, मुँह बनाकर बुदबुदाता हूँ!
मुझे मालूम हैं कुछ गुर निराले दाग धोने के,
'अंहिसा लाउंड्री' में रोज़ मैं कपड़े धुलाता हूँ।

मोदी जी पर भी ये पंक्ति एकदम फिट है साहब। मोदी जी सबसे ज्यादा सुकून और नारों का मज़ा इसी धरती पर लेने वाले हैं। विश्व का सबसे ऊँँची खड़़गेेश्वरी काली मंदिर अररिया मेें ही स्थित है। तो ऐसे में मोदी जी भक्ति राग को भी ज़हरीली जुबान से निकालेंगे। बिहार का सबसे ऊंचा शिवलिंग का जिक्र करते हुए वहां की जनता से कहेंगे कि यहां की जनता जिसे चाह जाये वही मुख्यमंत्री बनेगा क्योंकि उन्हें भगवान शिव की शक्ति प्राप्त है।

यह भी जिक्र करेंगे कि यहां के लोग बहुत किस्मत वाले हैं कि सुन्दरनाथ धाम (सुंदरी मठ) के आंगन में कदम रखने का सौभाग्य प्राप्त है। इसी धाम की शक्ति ने मुझे यहां की जनता की सेवा करने के लिए खींचकर लाया है। इसके बाद अपने पार्टी के 4 नेताओं को भारी मतों से विजय बनाने के लिए हुंकार भरेंगे। अररिया में कुल 6 विधानसभा की सीट है। वर्ष 2015 में भाजपा के 2 नेता को इस जमी पर मात मिली थी और 2 नेता पर विधायक का ठप्पा लगा था। इस बार मोदी की कोशिश होगी कि भगवान शिव को भी राजनीत में इस्तेमाल करके एनडीए के खाते में 6 का 6 सीट कर लें। 

कुल मिलाकर मोदी जी अपने चुनावी रैली में यही सब ड्रामा करते नज़र आएंगे। जितना मैं मोदी जी को जनता हूँ मेरे जहन में मोदी जी के लिए अधिकतर बेकार के ही शब्द है। फालतू नेता जैसी चरित्र उनमें मुझे नज़र आती है। कोरोना पर जितनी मूर्खता उन्होंने किया है उसे देश कभी माफ़ नहीं करेगा। देश की जनता के सामने मोदी जी मुद्दे को गायब वैसे ही करते हैं जैसे बोल जमूरे, हां मदारी, खेल दिखाएगा, पब्लिक को मजा आएगा।

जय हिन्द।
सिकेन शेखर बाजपेयी

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