Monday, March 12, 2018

महिलाओं को अपने हक के लिए आगे आना होगा: स्मिता परमार

8 मार्च 2018 को स्वाभिमान भवन में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बियॉन्ड द थर्ड आई द बिग कन्वर्सेशन में स्मिता परमार से बातचीत के मुख्य अंश:


बियॉन्ड द थर्ड आई द बिग कन्वर्सेशन में स्मिता परमार से पहला सवाल ‘कॉन्फिडेंस बियॉन्ड इमेज एंड इंसल्ट की चुनौती को लेकर था, जिस तरह से समाज में लड़कियां या महिलाएं प्रताड़ना की शिकार होते रहती हैं और किसी के खिलाफ स्टेप नहीं ले पाती हैं क्योंकि उन्हें डर लगता हैं कि थाना, कोर्ट और कचहरी जाने के वजह से उनकें समाज में लोग उन्हें बुरी निगाहों से देखेंगे? ऐसे में लड़कियों और महिलाओं को किस तरह से आत्मविश्वास विकसित करनी चाहिए?

स्मिता परमार अपने जवाब में कही, बहुत बहुत धन्यवाद सिकेन कि आपने यह सवाल मेरे समक्ष रखा है। जब हम यहाँ पर आत्मविश्वास की बात कर रहे हैं तो एक वाकया सुनाना चाहूंगी। कल जब अख़बार पढ़ रही थी तो पटना से एक खबर पढ़ने को मिली कि एक लड़की पर एसिड अटैक हुआ। वह लड़की इस वक्त अस्पताल में है। बहुत दुःख हुआ इस खबर को पढ़ते हुए दुःख इसलिए ज्यादा गहरा था क्योंकि एक तरफ हम महिला दिवस की तैयारी में जुटे हैं और दूसरी तरफ समाज में ऐसी ख़बरें जो बिल्कुल इसके विपरीत है तो मुझे लगता है कि अगर हमारे अंदर आत्मविश्वास की शक्ति नहीं है तो हमलोग अपनी लड़ाई नहीं लड़ सकते हैं और ना ही समाज में रह सकते हैं। विशेष करके मैं पढ़ी लिखी महिला हूँ और मुझमें आत्मविश्वास है तो फिर भी समाज के कई तत्व ऐसे हैं जो हमारे आत्मविश्वास को तोड़ना चाहते हैं और कई बार ऐसा होता है कि मैं भी टूट जाती हूँ  लेकिन अपनी आत्मविश्वास को बार-बार जगाना होगा और कहना है ख़ुद से की उठो और फिर से काम करो। आगे मैं कहना चाहूंगी कि हमारे संविधान में कितने अच्छे तरह से हमारी महिलाओं के हक के बारे में बातें की गई हैं तो इसका सही इस्तेमाल के लिए महिलाओं में आत्मविश्वास का होना अत्यंत जरुरी हैं और अपने हक के लिए आपको आगे आना होगा। 



स्वाभिमान लोक सेवा संस्था की जो कार्यकर्ता हैं वो गाँव-गाँव में जाते हैं लेकिन क्या हम अकेले लड़ाई लड़ सकते है ? हाँ या, ना ? इन बुराइयों के खिलाफ किसकों लड़ना है लड़ाई? हम सभी को मिलकर के लड़ना है और एक दुसरे की मदद भी करनी है।  किसी के भी आत्मबल को तोड़ना नहीं है बल्कि हर किसी के आत्मबल को बढ़ाना है।

बियॉन्ड द थर्ड आई द बिग कन्वर्सेशन में स्मिता परमार से आख़िरी सवाल था, ग्रामीण महिलाओं में सकारात्मक ऊर्जा भरपूर है। अब इस ऊर्जा को कैसे इस्तेमाल की जाए जिससे ये महिलाएं अपने करियर में कुछ बेहतर हासिल कर सकें? देखिये आपने जो प्रश्न उठाया है, इस प्रश्न के संदर्भ में कहूंगी कि हमारे साथ जो महिलाएं गाँव-गाँव में जाती हैं वो हमारे साथ कार्य करती हैं और इस सभागार में जितनी महिलाएं बैठी हैं अधिकतर महिलाएं कार्य करती हैं। अगर आपको लगता है कि इन लोगों को किसी अन्य क्षेत्रों में लगाई जाए तो हमलोगों ने यह भी प्रयास किया हैं। जैसे स्किल डेवलपमेंट सम्बंधित प्रशिक्षण के अंतर्गत लहटी बनाना, शिलाई, ब्यूटिशियन आदि की प्रशिक्षण भी आयोजन समय-समय पर कराते हैं और मैं देखती हूँ कि महिलाएं बहुत दिलचस्पी से बेहतर कार्य करती हैं। इसमें से कई ऐसी महिलाएं हैं जो छोटा-छोटा व्यवसाय के जरिये अपना जीवन चला रही हैं।


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