वैशाली में अगर कानून का डंडा मजबूत हो और उस डंडे की मार से आह की आवाज अगर उसी जिला के प्रशासन के कान में सुनाई न दें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी बंद कर दीजिये अपने प्रशासन की दुकान को। आज सुबह की दूसरी कॉल ने फिर से एहसास कराया कि वैशाली में जनता कराह रही है। हाजीपुर बांस और बल्ला के सामने बेबस है। क्योंकि वैशाली प्रशासन का ठप्पा लगा है। खैर, इतनी सी बात भी सामन्य है। कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कोरोना पर जिला में यही इलाज की एक मात्र हमारे प्रशासन के पास कारगर दवाई है।
एक तरफ पूरी दुनिया में आप कोरोना की मार देख रहे हैं मगर आज आपको देखने की जरुरत है कि कोरोना पर प्रशासन की बेवकूफी की मार कैसी होती है? इस दर्द की आवाज को सुनने की जरुरत इसलिए है क्योंकि आपके साथ इसी आवाज को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान, पूर्व सांसद पप्पू यादव, बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, साथ में दो चार और लोग के साथ वैशाली के डीएम भी देख रही है और इन सवालों को पढ़ने की कोशिश में हैं। यह ट्विटर का खेल वाकई लाजवाब है। नेता से लेकर प्रशासन तक आवाज पहुंचाने का बड़ा सस्ता खिलौना है। मगर इन लोगों तक आवाज पहुंचने के साथ साथ इन लोगों को अनजान और अनसुना बनाने का भी सबसे तेज तर्रार औजार है।
जितने लोग नाम कमाने वाले होते हैं वो आवाज सुनने के बाद सटक लेते हैं और जितने लोग काम करने वाले होते हैं वो लोग फौरन एक्शन लेते हैं। यह ट्विटर की कहानी है लेकिन आज हम ट्विटर पर बात तो कर नहीं रहे हैं इसलिए इस टॉपिक पर पूर्ण विराम लगाते हैं।
अब अपने ध्यान को जरा कान नाक के सहारे पोस्ट किये हुए तस्वीर पर ले जाइये और पढ़िए एक-एक सवाल को, समझ आ जायेगा कि प्रशासन के सामने हाजीपुर की जनता की आवाज क्या है? इस आवाज को विवेक रंजन जी लगातर कई दिनों से उठा रहे हैं। इसके साथ ही वह कई दिनों से हाजीपुर की जनता को भी खोजने की कोशिश में जुटे हैं मगर यहां के लोग प्रशासन के सामने डरे हुए हैं। तो एक सवाल क्या प्रशासन का काम आम जनता को डराना है? या कोरोना पर जारी किये जा रहे एक-एक कानून के बाद उठ रही आह की आवाज को मरहम लगाकर दर्द मिटाना है? मेरे प्यारे जनता जनार्दन, आप निर्णय आज कर ही लीजिये।
अब सीधा सवाल वैशाली प्रशासन से।
वैशाली प्रशासन में जितने लोग हैं आप सब की कानून पर अच्छी पकड़ है या कच्ची, उससे वहां की जनता को कोई मतलब नहीं मगर एक-एक आम जनता के लिए आप लोग सोचिये? अपने दफ्तर के बहार निकल कर उन्हें देखिये तब जब उनके रास्ते को आप अपने डंडा और वर्दी के दम पर घेड़ देते हो, उनके घर में जरुरत के सामान ले जाने और पहुंचाने के लिए आपकी क्या सोच है जरा उसी दम को डंडा और वर्दी के साथ सामने ले कर आइये। वैशाली जिला में आप लोग अपने दफ्तर, पद और पहचान के नाम पर बहुत सम्मानित शख्सियत में गिने जाते हैं मगर आज 2020 का भारत है जो आपके सकारात्मक पहल और समझ को सम्मानित करना चाहता है। अगर ऐसा आप करने के काबिल नहीं हैं तो आपकी छवि ख़राब हो गई है, लगे हाथ, मैं मुख्यमंत्री को भी यह आवाज दे रहा हूँ कि आप उन लोगों की वहाँ से छुट्टी करके बोरा बिस्तर के साथ घर जाने की इजाजत दे ही दीजिये । आप लोगों को सामने निकलकर आना चाहिए और साबित करना चाहिए कि विकट स्थिति में आप सभी डंडा और वर्दी के साथ कितने दमदार शख्सियत हैं? और आखिर में दो टूक में सिर्फ एक बात कि आपमें क्षमता है तो इस कोरोना काल में आप साबित कर दीजिये कि भारत में आप ऐसे प्रशासन के नायक हैं जो सबसे बेहतर हैं? जय हिन्द।

1 comment:
निर्भीक कलम
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