Friday, October 2, 2020

एक परिचय : सिकेन शेखर बाजपेयी

अपने बारे में लिखना, वो भी एक बेबाक पत्रकार के लिए? ईमानदारी की सबसे बड़े इम्तिहान से गुजरने जैसी स्थिति को बतलाता है। शुरू से आज तक इम्तिहान से डरता आया हूँ। विद्यालय में कब कैसे इम्तिहान आ जाता था समझ नहीं आता था। इम्तिहान में कभी भी दिल नहीं करता था बैठने को। विद्यालय के इम्तिहान में विषय से सवाल होते थे, शिक्षक जब कॉपी की जांच करते थे तो उन्हें सवाल का जवाब बेहतर पता होता था। और परिचय के इस इम्तिहान में सवाल मेरी अंदरूनी इच्छा, नजरिया, मेरी ईमानदारी, मेरा विश्वास, सोच और समझ पर है। मैं आज जवाब दूंगा भी।

इन सारे पहलुओं को आपने मेरे कार्यों से जाना और समझा भी है। मतलब मैं कुछ खुद के विषय में कहूं इस बारे में आपको भी जानकरी बेहतर है। ठीक वैसे ही शिक्षक की तरह जैसे उन्हें विषय सम्बंधित प्रत्येक प्रश्न का जवाब उन्हें मालूम होता है। अगर मैं खुद के बारे में बताने में स्पष्ट नहीं हो पाता हूँ तो आप मेरे परिचय को बेहतर जानते हैं, समझते हैं।

बचपन वैशाली की धरती पर शुरू हुई 'चन्द्रकेत नारायण सिंह' के नाम के साथ और आगे बढ़ी। के.डी. हैप्पी विद्यालय बाकरपुर से यह नाम की पहचान बनती है और वही समाप्त हो जाती है।

बलवा कुआरी मध्य विद्यालय में पांचवी कक्षा में नामांकन के दौरान 'चन्द्रकेत नारायण' को शॉर्ट करके 'सिकेन' (चंद्र- सी, केत- के, नारायण- न= सिकेन) किया। इस धरती पर आम तौर पर एक नाम से काम नहीं चलता है। यह भी यहां अद्भुत है। किसी से नाम एक समान न मिले उसके लिए एक नाम के साथ एक दूसरा नाम जोड़ने की परंपरा है। फिर मंथन और चिंतन के बाद 'शेखर' पर मुहर लगता है और मेरा नया नाम सिकेन शेखर हो जाता है। सिकेन शेखर नाम के साथ बलवा कुआरी गांव से मेरा फिर से एक परिचय और पहचान की शुरुआत होती है और आगे चलकर यूरोप के देशों में टॉन्सन मिलर और फिर भारतीय पत्रकारिता की नई पीढ़ी में दस्तक देते हुए 'सिकेन शेखर बाजपेयी' के साथ आपके बीच विकसित होता है।

महज 17 वर्ष की आयु मैं तीन नाम को अपने शख्सियत के लिए इस्तेमाल करता हूँ। मजे की बात है कि मुझे इन सब के दौरान नाम परिवर्तन में कोई हैरानी नहीं होती। आगे आप लोग हमेशा मुझे 'सिकेन शेखर बाजपेयी' के नाम से ही जानेंगे। इस नाम के साथ अब अटल रहना भी मेरी प्राथमिकता है। मुझे इस नाम के साथ गर्व की अनुभूति होती है। साथ ही मैं इस नाम के साथ खुद को पूर्ण मानता हूँ।

आपलोगों से भी कहूंगा जाति या धर्म के नाम पर नाम मत रखा कीजिये। आप भी देखिये कि आप अपने लिए ऐसे किन शब्दों के जरिये नाम का निर्माण करेंगे जिससे आपको भी गर्व की अनुभूति हो। गर्व की अनुभूति पाकर आप इस ऊर्जा को अपने कार्य के लिए इस्तेमाल कीजिये। नाम से पहचान बने या, पहचान से नाम, कार्य करने वाले लोगों के लिए यह सब मायने नहीं रखता। आप खुद के लिए बेहतर महसूस करें, यह हम सभी की प्राथमिकता होनी चाहिए। उम्मीद है आप सभी को नाम परिवर्तन के इस मसले पर संतुष्ट कर पाया होगा।

कुछ लोगों के साथ मेरा सम्बन्ध सोशल मीडिया पर बेबाक लिखने के क्रम में स्थापित हुआ। आपमें से कुछ लोग मुझे मोदी सरकार की योजना में हो रहे गड़बड़ी पर खुलासा करने और उन घोटाला के तथ्यों के साथ पीएम मोदी की कार्यशैली पर प्रहार करने को लेकर जानते हैं।

कुछ लोग मुझे वर्ष 2010 से यूनाइटेड किंगडम की बेहद प्रतिष्ठित टेलीकॉम कम्पनी ट्वेंटी फोर टॉक, प्राइमस टेलीकॉम, भारत की आइडिया सेल्युलर, प्लीज टेक माइ कॉल, इवेंट कंपनी ज़ूम क्लब, न्यूज़ चैनल आज तक, जनता टीवी, न्यूज़ 7, चैनल वन न्यूज़, समाचार पत्र नई पीढ़ी, न्यूज़ पोर्टल इरेडियो, रिपब्लिकन न्यूज़, देश के के प्रतिष्ठित विद्यालय बीआईटी ग्लोबल स्कूल, संत. जॉन्स एकेडमी, लक्ष्य सैनिक स्कूल, आरके इंटरनेशनल, माउंट कार्मेल, केसीआई, वर्चूअस इंटरनेशनल, किड्स इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल आदि संस्थानों के प्लेटफॉर्म से जानते हैं।

मैंने जिस रूप में कार्य किया है उसे आप बेहतर जानते हैं। 15 वर्ष की आयु में यूरोप के लोगों के लिए टेलीफोन सेवा देने से लेकर 18 वर्ष की आयु में भारतीय लोगों के लिए सिम कार्ड बेचना हो या प्रचार हेतु न्यूज़ पेपर से लेकर मैगज़ीन तक के पन्नों को बेचना। इसके साथ ही 19 वर्ष की आयु से पत्रकारिता के राह पर न्यूज़ टेलीविज़न चैनल रेगुलेट करने से लेकर न्यूज़ पेपर पब्लिश करना हो या लिखना पढ़ना। यह सब कुछ सफर का हिस्सा बनता चला गया। 

देश के हर मुद्दे को प्रधानमंत्री और सरकार से जोड़कर बेबाक टिप्पणी करते हुए जनता को बताना चाहा कि नेता और सरकार सामान्य मानवी के लिए ही होते हैं जिन्हें जनता की समस्या से जोड़कर देखा जाना चाहिए ताकि जनता पर सरकार और नेता लोगों की निगाहें हमेशा बनी रहे।

इसके साथ मीडिया के मंच पर चाहे एडिटिंग की बात हो या न्यूज़ स्टोरी राइटिंग की, एडिटोरियल राइटिंग की बात हो या इनवेस्टिगेटिव स्टोरी फाइंडिंग की, न्यूज़ स्टोरी, क्राइम स्टोरी या सुपरफास्ट न्यूज़ में वॉइस देने से लेकर रेडियो नाईट शो के लिए आवाज देने तक की जर्नी को जीया हूँ। इसके साथ सबसे रोमांच जहां आप हज़ारों हज़ार की संख्या में होते हैं और मेरे कहने पर हर वो मेरी बात मानते हैं उस लाइव शो में मैंने एंकरिंग के दौरान खुद को जीया हूँ। इन हर स्थिति में मैं आपका सिर्फ सिकेन रहा हूँ जिसे सिर्फ आपने ही पहचान और परिचय दिया है। आप हर मोड़ पर मुझसे मिले हैं और बेहतर जानते  हैं।

आपमें से कुछ लोग मुझे मेरे द्वारा वर्ष 2013 - 2014 तक किये जाने वाले टीवी शो के जरिये भी जाने पहचाने। तब मैं आपके सामने एक टेलीविज़न जर्नलिस्ट के रूप में था और उन दिनों भी मेरे निशाने पर सरकारी तंत्र ही था। मेरी कोशिश थी कि जिले में सरकारी अस्पताल से लेकर शिक्षा की व्यवस्था बेहतर रहे। हाजीपुर ब्लॉक में मैं एक दिन ठंड में दिनों में 10 बजे वहां के कर्मचारी के टेबल पर कैमरा लगाया और पता चला कि आम जनता कतार में खड़ी है काम कराने के लिए मगर साहब लोग घर से 1 घंटा लेट दस्तक देते हैं। मेरा दिमाग इन सभी हालातों को देखने के बाद खसक जाता था। उन दिनों मुख्य रूप से मेरे खास कार्यक्रमों में मीडिया एज अ फोर्थ पिलर, मौजूदा हालात सिकेन शेखर के साथ, डेयर टू एक्सपोज़ विद सिकेन शेखर, एक्सक्लूसिव इंटरव्यू आदि शामिल थे। 

वर्ष 2015 - 2017 तक में मेरी पहचान आपसे मेरठ की धरती पर नार्थ इंडिया के बेहद प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भारतीय फिल्म और टेलीविज़न संस्थान में हुई। आपमें से कुछ लोग मुझे वर्ष 2015 से रियलिटी शो के माध्यम से जानने लगे। क्यूटेस्ट किड्स, स्टार ऑफ़ द सिटी, वंडर मॉम, इंडियाज सुपर टैलेंट, सिंगिंग स्टार ऑफ़ बिहार आदि रियलिटी शो के आयोजन ने मुझे आपसे जुड़ने का एक नया अवसर दिया और उन दिनों से आज तक हम एक बेहतर रिश्ते के साथ आपसे जुड़े हैं।

वर्ष 2018 के दौरान मेरी पहली मुलाकात इनवेस्टिगेटिव न्यूज़ को लेकर आपसे रिपब्लिकन न्यूज़ के प्लेटफॉर्म पर हुआ। उस दौरान मेरे खास शो न्यूज़ फेस और खास मुलाकात ने एक बार पुनः आपसे नया रिश्ता बना। वर्ष 2020 में जब मैं नो मोर कैंसर और टर्निंग फेज ऑफ़ इलेक्ट्रो होम्यो पैथी पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया तो पुनः नए लोगों से जुड़ने का अवसर मिला और आपके साथ नए रिश्तों के बंधन में बंध गए। 

जरा याद कीजियेगा तो वर्ष 2012 दिनांक 22 फरवरी को हमारी और आपकी सबसे मजबूत और विश्वशनीय रिश्ता स्थापित हुआ तब जब मैंने बियॉन्ड दी थर्ड आई को अपने नाम के साथ जोड़ा। उस वक्त इरेडियो के संपादक त्रिनाथ मिश्र जी मेरे सामने थे। पत्रकारिता में क्रांतिकारी पहल को लेकर ब्लॉग बनाने की सलाह देने के साथ न्यू मीडिया की महत्वपूर्ण पड़तों को मुझे समझा रहे थे। फिर मैंने बियॉन्ड दी थर्ड आई के टैग लाइन के साथ पत्रकारिता के राह पर पत्रकारिता को सीखने से लेकर पत्रकारिता को जीना शुरू किया।

उस दौरान हिंदी-भाषा-लेख-आलेख मास कम्युनिकेशन को सिर्फ सुनना और समझना ही शुरू किया था मगर यह नहीं सोचा था कि अपनी जीरो की शुरुआत भी खबरों के ग्राउंड से ही करूंगा। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान सिर्फ मैंने 10 महीना ही कक्षा में गया। इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद मीडिया में आना मतलब एक 5 साल के बच्चे को जैसे दसवीं के बोर्ड परीक्षा में बैठाने जैसी स्थिति थी मेरे सामने। मगर 10 महीना की शिक्षा ने मुझे खबरों के ग्राउंड में खड़ा होने के काबिल बना दिया था। मेरठ में दिनेश चंद्रा जी, त्रिनाथ मिश्र जी, पूजा रावत जी, विजय रोहित जी, गौरव चौधरी जी, प्रमोद तेवतिया जी आदि लोगों ने मुझे मीडिया के सामने खड़ा होना सिखाया। मैंने बहुत इन डिसिप्लिन तरीके से मीडिया को समझा और सीखा है। 

इसके पूर्व मेरी फर्स्ट मीडिया गुरु तनुजा शंकर खान जी के सलाह पर वर्ष 2011 में मीडिया स्टडी के लिए आईएफटीआई में नामांकन लिया और वहां देश के कई दिग्गज मीडिया शख्सियतों से रूबरू होने का अवसर मेरे लिए इंटरनल बिलीफ की सबसे मजबूत इरादा की पाठ को पढ़ाया।

उस दौरान मैंने अपने ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण गुरु को अपने करीब पाया, जिसमें संदीप महाजन सर और प्रमोद कुमार पांडेय सर से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। इन सब के बाद टूटे फूटे शब्दों के माध्यम से बियॉन्ड दी थर्ड आई के साथ आपके सामने टिका रहा।

बियॉन्ड दी थर्ड के बैनर तले हाल के वर्षों में मैंने कई बड़े आयोजन किये जिसमें वर्ष 2018 का अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह, देश के 71 वर्ष पर समस्तीपुर में आयोजित जश्न-ए-आज़ादी, वर्ष 2019 में रियलिटी शो सिंगिंग स्टार ऑफ़ बिहार, देश के 72 वर्ष पर खबर नहीं कहानी की स्पेशल सीरीज, वर्ष 2020 में टर्निंग फेज ऑफ़ इलेक्ट्रो होम्यो पैथी आदि आयोजन शामिल है। आने वाले दिनों में वर्ष के प्रत्येक विशेष दिन पर बड़े आयोजन करने का भी लक्ष्य समाहित है।

मैंने सोचा था खुद के बारे में 5 से 10 पंक्तियों में अपनी बात कहकर निकल लूंगा मगर कैसे इतना सब कहता चला गया मुझे भी नहीं मालूम। मगर फिर भी कहूंगा जितना मैं खुद को जानता हूँ उससे कहीं ज्यादा आप मुझे बेहतर जानते हैं। कई लोग आपमें से मुझसे अपने ज़िंदगी में सिर्फ एक बार मिले हैं मगर हमारी दोस्ती गहरी होती चली गई है और कई लोग कई बार मिले हैं मगर दोस्ती आज भी फीकी है। आप हैरान मत होइए। नाक पर गुस्सा ज्यादा होता है तो अपने रिश्ते से लेकर हर फायदा महज एक सेकेंड में सब कुछ खत्मकर घाटा में तब्दील कर लेता हूँ। इन सब से खुद पर रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ता। ज़िंदगी को ग्राउंड जीरो की ग्राउंड पर विकसित करने का मौका जो पाया हूँ। 

मेरे द्वारा लिखे हर आलेख मुझे रोड पर ले आता है मगर फुटपाथ के सहारे फिर हाईवे पर कुछ वक्त बाद पहुंच जाता हूँ। आपलोगों को खुलकर विरोध करने का मौका देता हूँ। आप जब गाली और धमकी देते हैं तो आपको भोला भाला मानकर आपकी गाली की स्क्रीन शॉट को सम्मान समझकर लैपी में संभालकर रख लेता हूँ। मगर जिस आम जनता के लिए आवाज उठाता हूँ उस आम जनता की आवाज के सामने आपकी धमकी की कोई हैसियत नहीं होती है। याद रख लीजियेगा।

गाली गलौज करते रहिये, वो सब आपका काम है मगर मेरा जो काम है वो कभी रुकने वाला नहीं है। अक्टूबर 2020 के शुरुआती दिनों में मुझे खबर मिली है कि मेरे सिस्टम के फाइल्स पर मेरे विरोधियों की नज़र है। आपसे दो टूक में एक बात कहूंगा आप जिन मेरी स्ट्रेटेजी और एक्शन प्लान पर निगाहें बना रहे हैं उससे मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। समय लेकर मुझसे सभी फाइल आकर आप ले लीजिये। आप भी इन मुद्दों पर कार्य कीजिये। मगर साइबर क्राइम करके मेरे जो 21 फाइल पर आप निशाना बना रहे हो इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला। जितनी मर्जी अपनी आप आईटी की क्षमता लगा लो। बियॉन्ड दी थर्ड आई की रथ रुकने वाली नहीं है। सरकार की गोद आपको मुबारक हो।

दोस्तों, मेरी परिचय आपसे बियॉन्ड दी थर्ड आई के मंच से एक बेखौफ स्वतंत्र पत्रकार के रूप में है। जब लाइव शो में आप मुझसे देश के विभिन्न संस्थानों के मंच से जुड़ते हैं तो बतौर एंकर आपसे मुखातिब होता हूँ। जब किसी कॉर्पोरेट संस्थान में दस्तक देता हूँ तो स्ट्रैटेजिस्ट के नाते आपसे परिचय करता हूँ। जब आप मुझसे मदद के लिए आगे आते हैं तो बैरन के हैसियत से खुद की इमेज खुद में देखता हूँ मगर अक्टूबर 2020 से अब मदद करना छोड़ रहा हूँ। आपमें से कुछ लोग जो बीते वर्षों में मेरे साथ किये हैं उसने मुझे बहुत कुछ शिक्षा दी है।

सिकेन को आपने ही बनाया है और आज सिकेन अगर बदल रहा है तो यह भी कोशिश आपकी ही है। अपनी विशेष पहल कक्षा के जरिये देश के झुग्गी झोपड़ी के बच्चों से जुड़ना भी एक खूबसूरत परिचय की वहां एहसास कराता है मगर इस पंक्ति को यही गुमनाम रखना चाहता हूँ क्योंकि यह परिचय सिर्फ उनके दहलीज तक ही सीमित है और आखिर में आपसे एक और सबसे खूबसूरत परिचय का जिक्र करूंगा। यह परिचय आपसे तभी विकसित होता है जब आप सिकेन का रेडियो सुनते हैं। आरजे वाली भी इस परिचय को मेरे साथ ऐसे ही स्थापित करने का मौका देते रहिएगा ताकि आगे भी आरजे के रूप में आपको एंटरटेन कराता रहूँगा। 

आने वाले दिनों में कुछ अधूरे मेरे कार्य हैं जिसे पूरा करना है। बहुत कुछ पढ़ना है। बहुत कुछ समझना है। आपसे जो वादा किया हूँ उसे जरूर पूरा करूंगा। आप इंतज़ार कीजियेगा और आगे की मुलाकात यहीं बियॉन्ड दी थर्ड आई डॉट इन पर करूंगा इसलिए आप भी यहां आते रहिएगा।

 जय हिन्द

आपका

सिकेन शेखर बाजपेयी

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